Bhojpuri: जादू आ सम्मोहन विद्या के वैज्ञानिक पक्ष रोचक बा, पढ़ीं अउर गुनी

आमतौर पर जादू देखावत का घरी सम्मोहन के इस्तेमाल ना कइल जाला. जादू अइसन रोचक विद्या ह, कि लोग देखत- देखत खुदे सम्मोहित हो जाला. केहू के भी कई घंटा तक सम्मोहित कइल जा सकेला. पढ़ीं जादू अउर सम्मोहन के वैज्ञानिक पक्ष.

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जादू भा मैजिक आदि काल से रोचकता आ रहस्यमयता से ओतप्रोत बा. कोलकाता त एकरा खातिर विख्यात हइए ह. आज से 25 साल पहिले कोलकाता के मशहूर जादूगर पीसी सरकार जूनियर से जब हम इंटरव्यू लेबे उनुका घरे गइनीं त कई गो नया जानकारी मिलल. आज फेर ई लेख लिखे के पहिले जादू सिखावे वाला एगो इंस्टीच्यूट के मुखिया से बात कइनी हं. त पहिले रउरा के ऊ बात बतावतानी कि जौन इंस्टीच्यूट के मुखिया हमरा के बतवले. हमार पहिला सवाल रहे कि जादू का ह? त जबाब मिलल- जादू सिर्फ आ सिर्फ हाथ के सफाई ह, एगो विज्ञान ह. ई जादू- टोना ना ह. एगो ट्रिक ह.

अच्छा ई त क्लीयर हो गइल. त एगो छात्र/छात्रा के जादू सीखे में कतना दिन लागेला. आज पता चलल ह कि लइका तेज बा त साल भर में सीख ली. आ साधारण स्तर के बा त दू साल लागि जाई. हमार अगिला सवाल रहुए कि जादू में का सम्मोहन (मेस्मरिज्म) के प्रयोग भी कइल जाला? त जबाब मिलुए कि ना. आमतौर पर जादू देखावत का घरी सम्मोहन के इस्तेमाल ना कइल जाला. जादू अइसन रोचक विद्या ह, कि लोग देखत- देखत खुदे सम्मोहित हो जाला. हम पूछलीं कि सम्मोहन सिखावे खातिर भी कोर्स बा का? त जबाब मिलल कि हं. बाकिर ऊ जादू से अलग कोर्स बा. त हम पूछलीं कि सम्मोहन के कौना परिस्थिति में इस्तेमाल कइल जाला. त जबाब मिलल कि मान लीं, केहू शराब के आदी बा, भा अउरू कौनो नशा के आदी बा. एक बार ऊ नशा छोड़ता आ फेर नशा ओकरा के ध लेता. त अइसना आदमी के सम्मोहित कइके नशा का खिलाफ ओकरा दिमाग के बनावे के परी. दोसर बात ई कि मानलीं कौनो आदमी घर में बेमतलब के झगड़ा- झांटी करता. घर के कलह केंद्र बना देले बा. तो ओकरा के सम्मोहित कइके नियंत्रिक क दिहल जाला. ओकर स्वभाव शात आ प्रेमपूर्ण बनि जाला. हम पूछलीं कि केहू के कतना देर ले सम्मोहित कइल जा सकेला? त जबाब मिलल कि कई घंटा तक सम्मोहित कइल जा सकेला. सम्मोहन से ओह आदमी के दिमाग कमजोर त ना होला? एकर जबाब मिलल- ना.

बाकिर बार- बार सम्मोहन से दिमाग के एगो हिस्सा परमानेंट कमजोर हो सकेला. एसे सम्मोहन विद्या से दूर रहे के चाहीं. त हम पूछलीं कि तब सम्मोहन विद्या के क्लास काहें चलता? बंद क दीं सभे. त जबाब मिलल कि ई एगो विद्या ह. एकर अच्छा इस्तेमाल भी हो सकेला आ खराब इस्तेमाल भी हो सकेला. त सिखावल काहें बंद कइल जाउ. तंत्र विद्या से लाभ भी उठावल जा सकेला आ हानि भी कइल जा सकेला. त आज तंत्र विद्या लोग सिखते बा. समाज के हित में काम करेके प्रवृत्ति होखे के चाहीं. आज तक त सम्मोहन के कहीं दुरुपयोग नइखे सुनाइल. हं, अपवाद त हर जगह मिल जाई. हमार अगिला सवाल रहे कि रउरा इंस्टीच्यूट के कतना फीस बा? जबाब मिलल- एडमिशन का घरी एक हजार रुपया आ हर महीना पांच सौ रुपया. हफ्ता में क दिन क्लास चलेला? त हफ्ता में खाली एक दिन क्लास चलेला. माने महीना में चार दिन क्लास होला जौना के फीस पांच सौ रुपया बा. कोलकाता में जादू सिखावे के बहुते इंस्टीच्यूट भा केंद्र बाड़े सन. सबकर अलग- अलग फीस आ सिखावे के तरीका बा. बाकिर एगो चीज सबमें कामन बा कि जादू सिखावे के गति धीमा बा. शायद एसे कि छात्र/ छात्रा गहराई से कुल ट्रिक सीख सक स. त जादू सीखे में कम से कम दू साल त लागिए जाई. जेकरा धैर्य रही, ऊहे जादू सीख सकेला. त जादू के परिभाषा का भइल? असाधारण या असंभव बाति के संभव कके दिखावे वाला एगो गुप्‍त तरीका के नांव ह जादू भा इंद्रजाल. एगो अउरी परिभाषा हो सकेला- लोगन के मनोरंजन खातिर असंभव लागे वाला करतब भा कला भा हाथ के सफ़ाई के जादू कहल जाला. ई परिभाषा रउरा पसंद नइखे त रउरा कौनो दोसर परिभाषा बना सकेनीं.

बाकिर जब रउरा इंटरनेट पर मैजिक के बारे में जाने के चाहब त ओमें सुपरनेचुरल पावर के बात कहल जाई. सुपरनेचुरल माने अलौकिक. अलौकिक माने जौन एह लोक से परे होखे. सच्चाई ई बा कि जौन जादू आजकाल प्रचलित बा, ओमें कुछू सुपरनेचुरल नइखे. हर जादू का पीछे एगो ट्रिक काम करता. साइंस काम करता. साइंस कइसे काम करता? त सरकार जादू देखावे का घरी कुछ सामान लागेला. खास तरह के रुमाल, बेल्ट, कोट आ बहुत कुछ. रुमाल से कबूतर बनावे के बा त रुमालो चाहीं आ कबूतरो चाहीं. ई बात अलग बा कि कबूतर के रउरा केतरे छिपवले बानीं, केहू जानत नइखे. त साइंस ई बा कि राउर ध्यान कहीं और केंद्रित कराके जादूगर आपन ट्रिक खेल देला. त मैजिक के एगो अउरी परिभाषा बा- इलूजन. अब एतरे त डिलूजन भा इलूजन के अध्यात्म में “माया” के कहल जाला. आदि शंकराचार्य कहलहीं बाड़े- जगत मिथ्या, ईश्वर सत्य. ईहे मिथ्या तत्व माया ह. माया के बाइबिल में शैतान के संज्ञा दीहल बा. त जादू का मामला में इलूजन माने जौन रउरा देखतानी सच्चाई ओकरा से भिन्न बा. सच्चाई कुछ अउर बा आ रउरा देखत कुछ अउर बानी.

अब स्वाभाविक बा कि रउरा मन में ई प्रश्न उठी कि जादू प्रदर्शन सबसे पहिले कब भइल रहे? एकर इतिहास का बा? त सरकार सन 1584 में, पुर्तगाल में रेजिनोल्ड स्कॉट के एगो किताब “द डिस्कवरी ऑफ विचक्राफ्ट” (जादू टोना के खोज) प्रकाशित भइल रहे (भारत में पहिला प्रिंटिंग प्रेस सन 1556 में गोवा में आ गइल रहे). एह किताब में ई जानकारी रहे कि जादू के करतब कइसे कइल जाला. लेखक  ए किताब में स्पष्ट कइले रहले कि चुड़ैल के अस्तित्व ना होला. एह किताब के जादू के पहिला पाठ्यपुस्तक मानल जाला. त रउरा कहब कि एसे ई जबाब त ना मिलल कि जादू के शुरूआत कब भइल रहे. ई त रउरा किताब का बारे में बतावतानी. त ईहे किताब बतवले रहे कि जादू के शुरूआत आदि काल से चलत आ रहल बा. अब बताईं एह तरह के उल्लेख मिली त रउरा कौनो तारीख भा सन कइसे तय क सकेनी? त हमनियो का मानी जा कि जादू प्राचीन काल से चलि आवता.

अब रउरा मन में सवाल उठत होई कि अपना देश में जादू में आमतौर पर कौन- कौन चीज के देखावे के परंपरा बा. त कौनो चीज पैदा क दिहल, कौनो चीज गायब क दिहल, एगो वस्तु के दोसरा वस्तु में बदल दिहल, कौनो चीज गायब कके फेर ओकरा के ओही रूप में ओही जगह प्रकट क दिहल, कौनो चीज के एक जगह से लिहल आ ओकरा के दोसरा जगह पर प्रकट क दिहल. केहू के बक्सा में बंद कइके पानी में डुबा दिहल आ थोरहीं देर बात ओकरा के सूखल कपड़ा में स्टेज पर खड़ा देखावल, गुरुत्वाकर्षण के खारिज कइके भारी से भारी सामान उठा लिहल आ एगो लोहा के सामान में दोसरा धातु के सामान प्रवेश करा दिहल. एकरा अलावा कौनो लड़की के दू भाग में काटि के जोड़ि दिहल. ई सब ट्रिक बहुते सम्मोहक आ आनंददायी होला. (विनय बिहारी सिंह वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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