Bhojpuri: शंखपुष्पी, अश्वगंधा आ गिलोय के कमाल, बढ़ा देला इम्युनिटी

कोरोना काल में शंखपुष्पी, अश्वगंधा और गिलोय जैसी औषधियां बेहद काम की रही हैं.

औषधीय पेड़- पौधन के प्रति बंगाल में बहुते रुचि रहेला. कोरोना के एह दोसरकी लहर में एइजा के लोग एघरी शंखपुष्पी, अश्वगंधा आ गिलोय के प्रयोग खूब कर रहल बा. विशेषज्ञ कहता लोग कहता कि एकर कारन ई बा कि ई कुल आयुर्वेदिक दवाई रोग के नाश करेली सन आ आदमी के रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत क देली सन.

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अभी तक ले लागत रहल ह कि ज्यादातर लोग खाली कोरोना रोके खातिर जौन ब्रांडेड आ नामी दवाई बाड़ी सन ओही के मंगावता आ खाता. चाहे ऊ आयुर्वेद के होखे, एलोपैथी के होखे भा होमियोपैथी के होखे. बाकिर पिछला छव महीना में एह आदत में एगो नया बदलाव आइल बा. अब बंगाल के बात लीं. औषधीय पेड़- पौधन के प्रति बंगाल में बहुते रुचि रहेला. कोरोना के एह दोसरकी लहर में एइजा के लोग एघरी शंखपुष्पी, अश्वगंधा आ गिलोय के प्रयोग खूब कर रहल बा. विशेषज्ञ कहता लोग कहता कि एकर कारन ई बा कि ई कुल आयुर्वेदिक दवाई रोग के नाश करेली सन आ आदमी के रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत क देली सन.

अच्छा त एह तीनों जड़ी- बूटियन के लोकप्रियता अचानके काहें बढ़ि गइल बा आईं देखल जाउ. शंखपुष्पी अइसन जड़ी- बूटी कहाला जौन दिमाग त पुष्ट करबे करेला, अउरुओ कई गो रोग में काम आवेला. पुरान कहाउत ह कि जे शंखपुष्पी के सेवन करी ओकर बुद्धि आ स्मरण शक्ति बलवान रही. शंखपुष्पी के प्रकृति ठंढा होला आ एकर स्वाद सवाद कसैला होखेला. विशेषज्ञ कहेला लोग कि जे ढेर तनाव में रहेला, ओकरा शंखपुष्पी लेबे के चाहीं. एकरा पौधा के फूल से लेके पतई, तना, जड़ आ बीज तक ले दवाई के रूप में प्रयोग होला. हं, एगो अउरी बात- एह तीनों जड़ी- बूटियन के अलावा एलोवेरा के भी प्रचलन खूब बा. बाकिर ओकर चर्चा फेर कबो. अभी त एह तीनों औषधियन पर फोकस कइल जाउ.

पुराना जमाना के बैद जी लोग कहत रहल ह कि दिमागी रोग में शंखपुष्पी रामबाण नियर काम करेला. कइसे खाए के चाहीं? दू- चार गो गमला में शंखपुष्पी के पौधा लगा लीं. पुरनिया लोग कहि गइल बा कि शंखपुष्पी के पौधा के भा डाल आ पतई के ताजा पीस के दूध भा मक्खन के साथे मिश्री मिला के खाईं त दिमाग तेज होई. शंखपुष्पी के जड़ के पीस के ओकरा रस के तीन बूंद नाक में डालला से कपार के बार (बाल) सफेद ना होला. ईहे रस मधु में मिला के पीयब त बार ना झरी आ बार घना, मजबूत आ चमकदार हो जाई. शंखपुष्पी तेल पहिले के जमाना में एही से लोग ढेर यूज करत रहले ह.

अश्वगंधा खाली मर्दाना ताकत बढ़ावे वाली कारगर बूटी ना ह, अउरुओ कई गो बेमारी में कामे आवेला. जेकरा मानसिक तनाव बा, कमजोरी लागता ओकरा के अश्वगंधा दियाला. एकरा में एंटी-स्ट्रेस वाला रसायन बाड़े सन. जेकरा रात खान नींद नइखे आवत, ओकरा के अश्वगंधा देबे के पुरान प्रचलन बा. काहें? त अश्वगंधा के पतई में ट्राइथिलीन ग्लाइकोल नामक यौगिक पावल जाला, जौन रउरा के गहिर नींद में सुता दी. एकरा अलावा जेकरा हृदय रोग बा ओकरो खातिर अश्वगंधा बड़ा उपयोगी चीज बा. अइसहूं अश्वगंधा के सेवन कइला से दिल के बेमारी के कौनो खतरा ना रहे. काहें से कि अश्वगंधा में एंटीआक्सीडेंट आ एंटीइंफ्लेमेटरी बा. अश्वगंधा खराबका कोलेस्टेराल कम क देला. राउर मांसपेशी मजबूत क देला. जे पहलवानी करत रहल ह ऊ अश्वगंधा जरूर खाई. अब त अखाड़ा के परंपरा खत्म हो गइल बा आ जिम जाए के परंपरा शुरू हो गइल बा. पहिले अखाड़ा में कौनो फीस ना लागत रहल ह. अब जिम में फीस दीं, तब कसरत करीं. पहिले के जमाना में डायबिटीज माने सुगर के बेमारी में अश्वगंधा जरूर दियात रहल ह. आजो दियाला. आ खाली सुगरे के बेमारी में ना आजकाल त कैंसर के रोगी के भी कई बार अश्वगंधा खात देखल जा सकेला.

अब आईं गिलोय पर. त रउवां कहब कि गिलोय का बारे में का पढ़े के बा. ई त घर- घर के दवाई हो गइल बा. बाकिर ढेर लोग ना जाने कि गिलोय डायबिटीज के हरावे में बहुते मदद करेला. एकर दोसरका सबसे बड़ गुण ई ह कि ई राउर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देला. इम्यूनिटी बढ़ा देला. बोखार लागल होखे त ओहू में बहुत फायदा करेला. आजकाल जेतना मोटापा से परेशान लोग बाड़े ओकरा खातिर गिलोय रामबाण बा. बाकिर मोटापा के दवाई का संगे खान- पान पर भी कंट्रोल करेके परी. ई ना कि खूब मलाई, घीव आ क्रींम खातानी आ दवाइयो खातानी त फायदा ना करी. विशेषज्ञ लोग कहि गइल बा कि मोटापा में व्यायाम करेके चाहीं, दवाई खाए के चाहीं आ खानपान में कंट्रोल के अलावा चीनी वगैरह से परहेज जरूर करेके चाहीं. बहुत लोगन के अब भी सवाल रहेला कि गिलोय के सेवन के मात्रा का रही? कइसे बनावे के चाहीं गिलोय के काढ़ा? गिलोय के काढ़ा जदि रोज पीए के बा त जानकार लोग कहले बा कि एक कप रोज से ज्यादा ना पीए के चाहीं ना त नोकसान क दी. एकर मात्रा के बारे में डाक्टर से सलाह लिहल जरूरी बा. आजकाल त डाक्टर साहेब लोग आनलाइन भी सलाह दे रहल बा. सरकार, हम त हफ्ता में तीन दिन गिलोय के काढ़ा दू साल के पीयतानी. हमरा कौनो दिक्कत नइखे. अच्छा एइजा एगो सावधानी भी बा. जदि रउवां गिलोय के सेवन से पायखाना होखे में दिक्कत होखे लागल त एकर माने रउरा गिलोय सूट नइखे करत. हालांकि ई समस्या कमे लोगन के होला बाकिर तबो एकर चर्चा कइल जरूरी बा. गिलोय के अमृता, गुडुची, छिन्नरुहा, चक्रांगी वगैरह भी कहल जाला.

कई लोग पूछेला कि ताजा गिलोय कइसे चिन्हाई? त सरकार एकर पतई पान के पतई नियर रहेला. एकर तना सफेद भा भूरा रंग के होला आ एकर मोटाई एक से लेके पांच सेंटीमीटर तक होला. आयुर्वेद में गिलोय के ज्वर नाशक कहल बा. अब रउरा देखते बानी कि ई कोरोना काल बा. हमनी का देश में जड़ी- बूटी के प्राचीन काल से रामबाण मानल जाला. त केहू कतनो एलोपैथी दवाई, होमियोपैथी दवाई खाता बाकिर आयुर्वेद के साथ नइखे छोड़त. काहें से कि ई हमनी के माटी के विद्या नू ह. अब अश्वगंधा लेब त कुछ दिन में अपने फायदा बुझाई. शंखपुष्पी स्त्री भा पुरुष केहू ले सकेला. आ गिलोय के त पुछहीं के नइखे... (लेखक विनय बिहारी सिंह वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)