भोजपुरी में पढ़ें: समाजवाद बबुआ धीरे धीरे आई, केकरा फिकिर बा किसान के?

किसान बिल पर जवन कुल्हि संसद में देखे के मिलल हा, ओकरा बाद से जेतना चर्चा किसान बिल पर बा ओतने तरह के बात विचार राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश जी आ समाजवाद के लेकर होत बा. बिहार चुनाव में इ सब केतना असरदार हो सकेला यही पर ये लेख में विचार बा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 23, 2020, 10:39 PM IST
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ज गांव में बाड़ा हलचल रहे. बक्सर के किसान नेता रामसुमेर तिवारी फजिरे से नागा बाबा के दलान पर मंडली जमवले रहन. गांव भर के गिरहतन के बाबा के दलान पs बोलाहटा रहे. गाय-गेरु, सानी -पानी से फुरसत मिलल तs लोग बाबा के दलान पs जुटले. सब बेयादर के लोग आइल रहे. नाहिंयो तs करीबन चालीस अदमी ले जुटिइये गइल रहन. दरी-जाजिम बिछावल रहे. सभे बइठ गइल तs तेवारी जी कहले, किसान तs पहिलहीं से अधमरु रहन, अब जवनो तनी जान बांचल बा उहो छीने के तैइयारी बा. मोदी सरकार के अब इहे मंशा बा कि खेती करे वला लोगन के उपज के बाजिब दाम ना मिलो . मोदी के मोतिबक नया कानून बनी तs किसान सरकारी दाम पs धान-गेहूम ना बेंच पइहें. बड़का-बड़का कंपनी खेती में ढुक जाई अउर किसान कंपनी के मोहताज हो जइहें. एकर बिरोध बहुते जरूरी बा. ऐह से रउआ सभे से हथजोरी बा कि 25 तारीख के भारत बंद में शामिल होखीं जा. रामसुमेर तिवारी जेएनयू में पढ़ल रहन. आरा के कवलेज में पोरफेसर रहन. लेकिन एकदिन सब छोड़छाड़ के लाल झंडा उठा लेहलन.

समाजवाद बबुआ धीरे-धीरे आई
जनारदन महतो हाईअस्कूल में मास्टर रहन. छव बिगहा के गिरहतो रहन. रोज अखबार पढ़े के आदत रहे. उनका से बहस में केहू पार ना पवतs रहे. जनारदन मास्टर कहले, तेवारी जी रउआ ई कइसे कहत बानी कि मोदी सरकार अनाज के समरथन मूल्य खतम कर दिही ? आजे नू अखबार में छपल बा कि रबी के छव फसल के एमएसपी बढ़ा दिहल गइल बा. गेहूम, चाना, मसूरी, तोरी, जौव अउर रेपसीड के अबहीं बोआइयो नइखे शुरू भइल लेकिन एकर एमएसपी बढ़ा दिहल गइल. इहवां पढ़ल, बेपढ़ल सबे बइठल बा. ऐह से ई बतावल जरूरी बा कि एमएसपी के मतलब का हs. एमएसपी माने ऊ सरकारी दाम जवना से कम पs कवनो अनाज के खरीद ना कइल जा सकेला. हर अनाज के एगो सरकारी दाम होखी अउर एही दाम पर सरकार किसान से अनाज खरीदी. तेवारी जी, रउआ काहे सब कोई के भरमावतs बानी ? कौमनिस्ट अ समाजवादी लोग समाज के लड़ा के अ झूठा सापना देखा के बहुते नोकसान कइले बाड़े. एह लोग के राज करे के मौका मिलल तs का कइले ? किसान खुश हो गइले ? गोरख पांडे लिखले बाड़े-

समाजवाद बबुआ धीरे, धीरे आई
परसों ले आयी, बरसों ले आई


हरदम अकासे तकाई
समाजवाद बुबुआ धीरे, धीरे आई

जनारदन मास्टर तेवारी जी देने देख के कहले, रउए कहीं, का आ गइल समाजवाद ? केहू किसान के कबो सोचले बा ? मोदी के कनून बनइला से का फर्क पड़ी. बिहार में तs पहिलहीं से बजार समिति खतम बा. मोदी आज मंडी खतम करत बाड़े, नीतीश तs चौउदह बरिस पहिलहीं खतम कर दिहले. भारत बंद में बिहार के अनेरिये सानल जातs.

बिहार में तs पहिले से मंडी खतम बा
तेवारी जी एतना सुनs के पितपिता गइले. जनारदन महतो देने देख के कहले, देखीं मास्टर साहेब, अनाज खरीद के सरकारी दाम बढ़ाइये के का होई, जब कवनो किसान के एकर फैद ना मिली. एह साल बिहार में निमन धान के सरकारी रेट रहे 1835 रोपया कुंटल. धान बेचे खातिर करीबन साढ़े गेयारह लाख किसान आपन नांव लिखवले रहन. तीन महीना में बस पैंतालिसे हजार लोग आपन धान सरकारी रेट पर बेच पइले. पिछिला साल तs साढ़े गेयारह लाख में दूइए लाख लोग सरकारी रेट पs धान बेचले रहन. बिहार में सै में दसे किसान के सरकारी दाम के फैदा मिल पावेला. जनारदनो मास्टर ताव में आ के कहले, तs तेवारी जी अतना दिन से रउआ कहां रहीं ? बिहार के किसानन के धान एमएसपी पs बेचवावे खातिर काहे ने एक्को दिन मोर्चा रोपनी ? बिहार में किसान के हकमारी होता तs कंगरेस, कौमनिस्ट, राजद के लोग कहवां सूतल रहे ? एह बात पs काहे ना केहू लड़ाई लड़ल ? अब दिल्ली के बात पs बिहार में झंझट पसारला के का जरूरत बा ? कतनो कनूनबन जाए, जब ले लूट-खसोट ना बंद होई, किसान के दुख दूर होखे वला नइखे.

बिहार में काहे बबाल बा?
रामपुकार सिंह के गांव में बाड़ा मान आदर रहे. बोली-बचन अइसन रहे कि सब बेयादर के लोग उनकर इज्जत करत रहे. इंजीनियर रहन. लेकिन रिटायर भइले तs गांवही पs रहे लगले. ईमनदारी से रहले तs शहर में घर बनावे के बेंवत ना भइल. बहुते देर से ऊ तेवारी जी अउर मास्टर साहेब के बतकही सुनत रहन. रामपुकार सिंह गाला खंखरले तs नागा बाबा कहले, अब चुप रहs लोग, इंजीनियर साहेब कुछ कहल चाहत बाड़े. रामपुकार सिंह सबके देनेदेख के कहले, दिल्ली के घटना पs घनघोर पोलटिस हो रहल बा. राजसभा में जब किसानी के नया कानून बनावे खातिर बिल पास भइल तs बिरोधी दल के लोग हंगामा कर दिहले. राज्यसभा के उपसभापति हरिबंस जी के माइक तूर दिहल गइल, रूल बुक फार दिहल गइल. अब ई घटना के अपना-अपना तरीका से फैदा उठावे के कोशिश हो रहल बा. विरोधी दल जब संसद में फेल हो गइले तs अब किसान पs जुलुम के बात उठा के आंदोलन कइल चाहत बाड़े. दोसरा देने भजपा अउर जदयू अपना फैदा के फेर में बाड़े.

दिल्ली में भले विपक्ष अबर अ लचार बा लेकिन बिहार में अइसन बात नइखे. बिहार में राजद सबसे बड़ पार्टी बा. ओकरा में हूब बा कि उ बिहार चुनाव में किसान हकमारी के मुद्दा बना सकेला. जदयू-भाजपा के मन में डर बा कि कहीं राजद किसान मुद्दा के गरमा ना देवे, एहसे पहिलहीं बात पलट दs. किसान मुद्दा के बेअसर करे खातिर अब जदयू-भाजपा के लोग हरिबंस जी के साथ भइल घटना के बिहार के इज्जत से जोड़ देले बा. अब ई बात के परचार कइल जा रहल बा कि हरिबंस प हमला बिहार के इजत पs हमला बा. राजद-कंगरेस के सांसद बिहार के बेइजती देखत रहले लेकिन कुछ कइले ना. तनी दम लेके इंजीनियर साहेब फेन कहले, सभे अपना-अपना फेर में बा. के बिहार विरोधी हs अउर के किसान विरोधी, अब रउए सभे विचार करीं. हमार तs इहे कहनाम बा कि केकरो किसान के फिकिर नइखे. एकरा बाद नागा बाबा सभ टोला के लोगन बिचार जान के कहले, केहू साथे कवनो बरियारी नइखे, जेकरा जवन निमन लागे उहे करे.
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