भोजपुरी विशेष: सतुआ बा त लिट्टी से लड्डू तक सब सिद्ध बा

भोजपुरी विशेष: सतुआ बा त लिट्टी से लड्डू तक सब सिद्ध बा
सतुआ के फास्टे ना 'फास्टेस्ट फूड' भी कहल जा सकेला.

सतुआ भोजपुरी इलाका के दिव्य भोजन ह. मेहनतकश खातिर बिना थारी लोटा के अंगौछा में सानी के मरिचा नून संगे खा लेबेके बा, त मसाला मिला के लिट्टी से लेकर बहुत कुछ बन सकेला. सतुआ के महातम पर लेख-

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 10, 2020, 10:23 AM IST
  • Share this:
टेड एक्स के स्टेज जब गायिका मैथिली ठाकुर पहुंचली त कहली कि हामारा पासे बातावे के बहुत कुछु त नइखे. ईहां त लोग आवेला त बीस बीस साल के अनुभव सुनावेला, हमार त उमिरे अभी ओतना भइल. बाकिर बातावे में जवन बात ऊ बतवली ऊ एक लाख के बात रहे. काहें से कि बात खांटी माटी से जुड़ल रहे.

मैथिली ठाकुर बतवली कि उनकर घरे के नाम तनु ह. तनु ए से कि 'तनुआ' बोलावल जा सके. मैथिली के ओइसे ना बोलावल जा सकेला. बिलकुल सही बात कहलू बूची. सुनि के जिया जुड़ा गईल. मैथिली बतवली कि तनु में 'आ' जोड़ि देला पर जवन अपनापन आवेला ऊ अइसे त नाहिंए आ सकेला.

'सत्तू की लस्सी' - ए घरी सहरन में जाहां ताहां ठेला प अइसहिं लिखल देखे के मिलेला, लेकिन सत्तू में जब तक आ ना लागे तब तक ओकारा में सोन्हापन ना आवेला - 'सतुआ'. बिलकुल ऊहे फीलिंग जवन मैथिली आ उनुकर परिवार 'तनुआ' में महसूस करेला.



सतुआ दुनिया के पहिलका फास्ट फूड ह. नून-रोटी से भी फास्ट. सतुआ के फास्टे ना 'फास्टेस्ट फूड' भी कहल जा सकेला. जेकारा गामाछा में दू मुट्ठी सतुआ होखे ओकारा कवनो बात के चिंता फिकिर ना रहि जाला. जब जाहां मन करे ऊ ऊहें बइठि के सानि के खाके आगे बढ़ि सकेला. सतुआ के साथे एगो मरिचा आ मुरई होखे त फेरु का कहे के. माजा दोगिना हो जाला.
सतुआ प एगो बाड़ा मजेदार किस्सा भी कहल जाला. एक बार एगो पूरबिया आदमी परोरा के खेत में काम करत रहे. आगि लेखा घाम भइल रहे त एक जागो बइठि के सुस्ताए लगले. फेरू गामाछा खोलि के सातू सनले आ खाइल सुरू हो गइले. जइसहीं एगो पिंड़ी के बाद मुरई काटत रहले तले देख तारे कि सामने एगो गोर आदमी सामने खाड़ा बा आ मुंह पर हाथ ध के चिहइला लेखा बोलता - 'ओ माय गॉड!' ऊ अंगरेज मुसाफिर रहे आ आपाना गाइड के साथे भारत के गांव घूमे निकलल रहे. अंगरेजवा के चिहइला पर ओकार गइडवा पूछलसि कि का बात ह. बाड़ा दुखी होके अंगरेजवा बतवलसि - 'इंडिया में बहुते गरीबी बा. लोग के खाना नइखे मिलत त नदी किनारे पहुंचि के बालू खाता. जब बालू घोंटात नइखे त डांडा से ओकारा के ठेलि के अंदर ठूंसता.'

भोजपुरी स्पेशल- गायक बन गइले नायक, भोजपुरी सिनेमा अपना समाजे से कटि गइल

अंगरेजवा के मुंह से सतुआ के बाखान सुनि के गइडवा के हंसी रुके के नावे ना लेत रहे. जब गाइड से अंगरेजवा पूरा बात सुनि लेलसि तो फेरू चिहा के बोललसि - 'ओएमजी... इंडिया इज ग्रेट!' हामारा त कबो कबो लागेला ऊहे अंगरेजवा जब लौटि के गइल होई आ काहानी सुनवले होई त ओकनियो के फास्ट फूड पर फोकस भोइल होइहें स. आ फेरू देखा देखी दुनिया भरि में फास्ट फूड सुरू हो गइल.

सतुआ खाइल त दूरि, ना मालूम नाया पीढ़ी में काताना लोग सतुआ के सोन्हापन के महसूस भी कबो कइले होइहन कि ना. पूरब से निकलि के सतुआ के पहुंच त दूर दूर तक हो गइल बा, लेकिन एगो-दूगो से जादा इस्तेमाल बहुते कम लोग के आवेला. जादा से जादा लोग सतुआ घोरि के पी ले ला आ ना त लिट्टी-पारावठा बाना लेला.

सतुआ के रेसिपी त मजे के बाड़े स, लेकिन सतुआ खाये के खांटी तरीका भी बिलकुल अलगे होखेला. सतुआ के साथे नून के आलावा आम-पुदीना के चटनी, पिआजु आ आंचार, मुरई आ हरियर मरिचा भी जरूरी होखेला.

सतुआ खाये में भी तीन गो स्टेज जरूरी होखेला. लबरी, पिंड़ी आ घोरना. लबरी आ पिंड़ी खाये में पसंद के हिसाब से आगे पीछे हो सकेला, लेकिन घोरना के नंबर अंते में आवेला. लबरी मने सतुआ के गाढ़ा घोल जइसे पकउड़ी छाने खातिर बेसन के बैटर बानावल जाला. पिंड़ी मने ठोस रूप में - आ घोरना मने हलाहल पानी. बिलकुल सरबत लेखा. ई तीनों स्टेज भी काफी सोचि बुझि के बानावल बा. लबरी से सुरू कइला के बाद पिंड़ी खइला पर सावाद थोड़ा बदलि जाला. घोरना के पारंपारा के पीछे ओजह नोकसान रोकल होला. थारी में बांचे के कुछ ना चाहीं. खइला के बाद थारी बिना धोअले साफ हो जाए के चाहीं.

भोजपुरी विशेष - लालूजी लचार काहे भइले,कइसे मिली राजद के गद्दी? 

ओइसे त सतुआ सुद्ध चाना के बनेला, लेकिन बहुत लोग मिलौनी भी पसन करेले. कुछ लोग चाना के साथे जनेरा, जौ, मटर आ जवन भी आनाज पासे होखे कुल्हि भूंजि के मिला देले - ओकरे के मिलौनी सतुआ कहल जाला. जादातर लोग सतुआ नमकीने खाइल पसन करेले,  लेकिन कुछ लोग के मीठे नीक लागेला. मीठ सतुआ चाना ना बल्कि जौ के ठीक लागेला. जौ के सतुआ के साथे देसी घी आ गुड़ चाहे चीनी मिला दीहल जाला आ फेरु एगो फास्ट फूड कहीं चाहे मिठाई कहीं तेयार हो जाला. ए घरी लोग सतुआ के लड्डू भी बानावता. जानल मानल यू-ट्यूबर निशा मधूलिका भी अब 'सत्तू के लड्डू' बानावे सिखावतारी - आ लोग यू-ट्यूब से सीखि के सतुआ के लडुआ खूबे बानावता.

पूर्वांचल के कुछ जिलन में सतुआ के घाठी भी कहल जाला. ऊंहा के लोग सतुआ भरि के जवन लिट्टी बानावेला ओकरो के घाठिये बोलेले. सगरे भले लिट्ठी बोलल जात होखे, लेकिन बलिया में ओकारा के फुटेहरी कहल जाला. बलिया में लिट्टी मोट रोटी के कहल जाला. कुछ जगह लिट्टी के मकुनी भी कहल जाला, जबकि कहीं कहीं भरल पारावठा के मकुनी कहल जाला. ओमे सतुआ भरल होखे चाहें आलू-पिआजु. ओसहिं कहीं कहीं भउरी, बाटी के नाम से भी लिट्ठी के जानल जाला.

लिट्टी के साथे चोखा त आलू, बैंगन, पिआजु, टामाटर, धनिया, मरिचा से बनि जाला, लेकिन सबसे जरूरी सतुआ होला. सतुआ त चाना के घोंसारि में भूंजि के पीसि दीहल जाला आ फेरु चलनी से भूसी चालि दियाला. सतुआ के सबसे निमन क्वालिटी सतुही होखेले - सतुही में चाना के छिलिका बिलकुले ना होला आ ऊ बहुते मेहीं होखेला.

भोजपुरी में पढ़िए: खांटी माटी के तीन परधानमंतरी अइसन जिनकर भौकाल से पस्त हो गइल पाकिस्तान

काहाला कि घीव के लडुआ टेढ़ो भला - ओसहिं सतुआ के पोर्टीन के बाखान गूगल में पढ़ि के बहुते नीमन लागेला. समझीं कि कलेजा जुड़ा जाला. सतुआ के बाखान में कम्प्लीट फूड से लेके सुपर फूड तक इंटरनेट भरल परल बा - सतुआ के लिट्टी से लड्डू तक के सफर के बारे में पढ़िके बाताइबि सभे.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज