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Bhojpuri: काशी के कल्लू क कहानी, बाभन कइसे बनल चंडाल, पढ़ी

आत्मा से अलग होइ चुकल पंचतत्व के शरीर के पंचतत्व में वापस मिलावय क इ काम केतना पवित्र अउर पुन्य क हौ, लेकिन डोम जाति के लोगन के समाज में हेय दृष्टि से देखल जला. डोम जाति अछूत नाहीं हौ. एनकर इतिहास बहुत गौरवशाली रहल हौ.

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काशी धरती पर एक मात्र जगह हौ, जहां डोम राजा क स्थान हौ. काशी में दुइ शमशान घाट हयन - मनिकनिका घाट अउर हरिश्चंद्र घाट. दूनों घाट गंगा के किनारे हयन अउर इहां डोम राजा क राज चलयला. शमशान पर जेतना भी मुर्दा फूंकालन, मुखाग्नि बदे आग डोम राजा के परिवार से ही लेहल जाला. बाकी मुर्दा फूंकय क काम भी डोम जाति क लोग ही करयलन. आत्मा से अलग होइ चुकल पंचतत्व के शरीर के पंचतत्व में वापस मिलावय क इ काम केतना पवित्र अउर पुन्य क हौ, लेकिन डोम जाति के लोगन के समाज में हेय दृष्टि से देखल जला.

डोम जाति अछूत नाहीं हौ. एनकर इतिहास बहुत गौरवशाली रहल हौ. बतावल जाला कि डोम राजा के परिवार क संबंध वैदिक काल में एक बड़े राजपरिवार से रहल. पौराणिक मान्यता के अनुसार, पूरी डोम जाति कल्लू डोम क वंशज हौ. उहय कल्लू डोम, जेकरे इहां राजा हरिश्चंद्र अपुना के बेचि देहले रहलन. कल्लू पहिले बाभन रहलन. बाभन से डोम कइसे होइ गइलन, एकर एक ठे कथा हौ.

हलांकि डोम शब्द भी अपने आप में बहुत पवित्र हौ. इ शब्द ’ड’ अक्षर अउर ’अ’ अउर ’ऊं’ से मिलि के बनल हौ. ’ड’ से डमरू, ‘अ’ से आदि अउर ‘ऊं’ से ओमकार, यानी शिव. डोम जाति क लोग भगवान शिव क ही पूजा करयलन. कालभैरव, काली अउर यम भी ओनकर देवता हयन. शिव पुराण के अनुसार, आदिकाल में जब काशी क नाम आनंदवन रहल, तब भगवान शिव एक दइया माई पार्वती के संगे काशी घूमय आयल रहलन. माई पार्वती के नहाए के रहल त मनिकनिका घाटे पर जवन एह समय कुंड हौ, उ कुंड के भगवान शिव अपने जटा से पानी निकालि के भरि देहलन. माई पार्वती ओही में नहइलिन. नहात क समय माई क काने क कुंडल ओही गिरि गयल. कल्लू नाम क एक ठे बाभन ओही ठिअन रहल अउर उ कुंडल उठाइ लेहलस. पूछले पर भी उ कुंडल के बारे में नाहीं बतइलस. भगवान शिव आग बबूला होइ गइलन. कल्लू फिर भी कुंडल के बारे में नाहीं बतइलस. भोलेनाथ कल्लू के अउर ओकरे आवय वाली कुल पीढ़ी के चंडाल होवय क श्राप देइ देहलन. शिव क श्राप मिलला के बाद कल्लू बाभन, कल्लू डोम बनि गयल अउर मनिकनिका घाटे पर मूर्दा फूंकय क काम करय लगल.

राजा हरिश्चंद्र जब आपन कुल राजपाट विश्वामित्र के दान कइ देहले रहलन अउर ओकरे बाद भी ओनकर दक्षिण बाकी रहि गयल रहल, तब विश्वामित्र क दक्षिणा चुकावय बदे हरिश्चंद्र काशी आयल रहलन. अपने महरारू अउर लड़िका के एक बभने के बेचि देहलन अउर अपुना खुद कल्लू डोम के इहां बिचाइ गइलन. हरिश्चंद्र क जिम्मेदारी घाटे पर मुर्दा फूंकय वालन से पइसा वसूलय क रहल. हरिश्चंद्र राजा से डोम क गुलाम बनि गइलन. तबय से डोम के आगे राजा लगय लगल. हरिश्चंद्र जवने घाटे क निगरानी करत रहलन, सोनारपुरा महल्ला में उ घाट आज ओनही के नाम पर हौ.

कल्लू डोम से आज के तारीख में डोम जाति क पांच हजार से जादा आबादी होइ गयल हौ. मनिकनिका अउर हरिश्चंद्र घाटे पर ही पांच सौ से छह सौ डोम जाति क लोग रहयलन. परिवार क आदमी लोग मूर्दा फूंकय क काम करयलन, अउर बदले में जवन मेहनताना मिलयला, ओही से ओनके परिवार क खर्चा चलयला. काशी क दूनों शमशान घाट महाशमशान हयन अउर इहां 24 घंटा मूर्दा फूंकालन. फिर भी आबादी अधिक रहले के नाते डोम जाति के लोगन के हमेशा काम नाहीं मिलि पावत. घाटे पर बारी-बारी से काम मिलयला अउर एक आदमी क बारी 10 से 20 दिना पर आवयला. महंगाई के जमाने में एक दिन के कमाई से 10 दिन परिवार क खर्चा चलाइब मुश्किल होइ जाला. डोम जाति के कल्याण बदे सरकार के तरफ से भी कवनो योजना नाहीं हौ. जवने के नाते डोम जाति क लोग गुर्बत अउर जलालत क जिनगी जीअत हयन.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 के लोकसभा चुनाव में काशी के डोम राजा जगदीश चौधरी के आपन प्रस्तावक बनउले रहलन. डोम जाति बदे इ बहुत बड़े सम्मान क बात रहल. जगदीश चौधरी प्रधानमंत्री मोदी क प्रस्तावक बनले के बाद खुद कहले रहलन कि डोम जाति बदे इ गौरव क दिन हौ, पहिली बार कवनो प्रधानमंत्री हमरे जाति के एतना सम्मान देहले हौ. उम्मीद हौ कि जवन आज शुरुआत भयल हौ, उ आगे भी जारी रही अउर हमरे जाति के समाज में सम्मान मिली. लेकिन जगदीश चौधरी पिछले साल 25 अगस्त के शरीर छोड़ि देहलन. जगदीश क गद्दी अब ओनकर लड़िका ओम संभारत हौ.

मोदी क प्रस्तावक बनय से पहिले भी 1977 में डोम राजा के परिवार के एक बार बड़ा सम्मान मिलल रहल, जब गोरक्ष पीठाधीश महंत अवैद्यनाथ साधु-संतन के साथ डोम राजा के इहां भोजन कइले रहलन. अवैद्यनाथ तमिलनाडु के मीनाक्षीपुरम मंदिर में दलितन के प्रवेश पर रोक के खिलाफ आंदोलन करत रहलन. अवैद्यनाथ डोम राजा से भी आंदोलन में शामिल होवय बदे कहलन. जवाब में डोम राजा कहलन कि जब संत लोग हमरे घरे आइ के भोजन करिहय तब हम मानब कि उ आंदोलन सही नीयत से करत हयन. अवैद्यनाथ डोम राजा क शर्त मनलन अउर ओनके घरे जाइके भोजन कइलन. ओकरे बाद से डोम राजा क सम्मान काशी में अउर बढ़ि गयल. (सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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