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Bhojpuri: अश्लीलता के शोर के बीच कुछ क्लासिक भोजपुरी फिल्मन के बात

भोजपुरी खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) के एगो गाना से जवन अश्लीलता के विवाद शुरू भइल बा, ओकरा चलते कए गो सिंगर निशाना पर आ गइल बाड़ें. लेकिन एगो जमाना रहे, जब भोजपुरी गाना अपना मिठास के कारण बॉलीवुड में भी जगह बनइले रहे.

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भोजपुरी सिनेमा के इतिहास 60 साल पुरान बा. कहल गइल बा साठा प पाठा. आपन भोजपुरी इंडस्ट्री तब खड़ा भइल जब हिन्दी सिनेमा अपना उफान पर रहे. राजकपूर, देवानंद, गुरुदत्त के टाइम चलत रहे. धर्मेन्द्र इंडस्ट्री में आ गइल रहलें अउरी आवे वाला साल में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के पदार्पण होखे वाला रहे. कहे के माने कि जब भोजपुरी के मौसेरी भाषा हिन्दी में एतना बढ़िया सिनेमा बनत रहे आ भोजपुरिया दर्शक भी उहे देखे तब भोजपुरी सिनेमा के लॉन्च कइल, कम दिलेरी के बात ना रहे. बाकिर ई दिलेरी तक तक 500 से अधिक फिल्मन में काम कर चुकल नाजिर हुसैन साहेब कइलें आ खनन व्यवसाय के एगो नवहा निर्माता विश्वनाथ शाहाबादी के साथे मिलके पहिला फिल्म बना देहलें.

गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो
हम बात करत बानी गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो के. साल 1962 में रिलीज भइल फिल्म के आइडीआ नाजिर साहेब के दिमाग़ में ना जाने कई बरिस पहिलहीं फूटल रहे. बाकिर आपन व्यस्तता अउरी फंड के कमी के कारण मामला टलल जात रहे. हालांकि उनका जिनगी में जामवंत बनलें भारत के प्रथम राष्ट्रपति अउरी भोजपुरिया लाल डॉक्टर राजेन्द्र बाबू. उहे नाजिर साहेब के उत्प्रेरित कइलें आ एह फिल्म पर जोर शोर से काम चलल, फंड मिल गइल आ कलाकार से लेके क्रू सब जुटिया गइल. एह फिल्म के निर्देशन कइलें कुंदन कुमार. फिल्म में हीरो अशिम कुमार रहलें अउरी हिरोइन कुमकुम रहली. फिल्म के कहानी विधवा के पुनर्विवाह पर आधारित रहे. एगो युवती शादी के तुरते बाद विधवा हो जा तिया, फेर ओकर दोसर बियाह पर समाज कइसे बाधा बनत बा, इहे फिल्म के प्लॉट रहे. विधवा बियाह ओ समय के ज्वलंत मुद्दा रहे आ लोग एकरा खिलाफत में ढेर रहे. ई फिल्म एगो सामाजिक संदेश लेके आइल आ ओ बेरा जवना जवना सिनेमा हॉल में लागल, उ साल साल भर ई फिलिम देखवलस. लोग बैलगाड़ी, ट्रेन, पैदल जा जा के ई फिल्म सिनेमाघर में देखल. एकर सब गनवे सदाबहार बा. ई फिल्म भोजपुरी के गौरवशाली इतिहास समझे खातिर जरूर देखे के चाहीं.

लागी नाही छूटे राम
भोजपुरी के दुसरको फिल्म नाजिरे साहब आ कुंदन कुमार के जोड़ी लेके आइल. फिल्म के नाम रहे लागी नाही छूटे राम. फिल्म के निर्माता रामायण तिवारी रहलें. निर्माता खुद हिन्दी अउरी भोजपुरी फिल्मन में सक्रिय रहलें आ तिवारी के नाम से जानल जास. एह फिल्म में हिट आइटम डान्सर अउरी सलमान खान के सौतेली माई हेलेन भी पहिला बार भोजपुरी में आपन जादू बिखेरली. फिल्म में एगो गरीब बाप सुक्कू के बेटी रूपा बचपने में हेरा जात बिया, उ बेचारा अकेले गाँव के बड़हन जमींदार के घरे काम धाम कर के पेट पालत बा. ओकर मालिक भी सुक्कू के बड़ा मानत बाड़ें. अचानक रूपा मिलत बिया त पता चलत बा कि उ त नाच के नचनिया हो गइल बिया. जमींदार लोक लाज से बचे खातिर गाँव छोड़ के जाये के कहत बाड़ें. फिल्म के कहानी बड़ा मार्मिक बा आ ओकर गाना भी. ओ बेरा नाच गाना के लोग बड़ा निकृष्ट काम माने, तब हई टिकटॉक के जमाना ना रहे. फिल्म कहानी अउरी गाना खातिर देखे के चाहीं. सावन आवता. राखी के त्यौहार आवता. एह फिल्म में एगो गाना बा, लता मंगेशकर जी के आवाज़ में- ‘’ रखिया बन्हा ल भईया सावन आइल, जीयs तू लाख बरिस हो’’

बिहारी बाबू
फिल्म बिहारी बाबू 1985 में आइल आ शत्रुघ्न सिन्हा के हिन्दी से भोजपुरी में पदार्पण करवलस. शत्रुघ्न सिन्हा बिहारी बाबू के नाम से जानल जालें आ ओही नाम के एह में भुनावल गइल. फिल्म के कहानी एगो बहादुर आदमी के रहे जवन हमेशा गरीब अउरी लाचार खातिर खड़ा रहेला. फिल्म में एगो घर के लोग के ठगी करके आ जाल में फंसा के ओकर सब जमीन जायदाद लूट लिहल जाता तब बिहारी बाबू आके ओह सुंदर परिवार के बिखरे से बचावत बाड़न. एह फिल्म में टीना मुनीम भी रहली, जे आज टीना अंबानी के नाम से जानल जाली. कुणाल सिंह भी एह फिल्म में समानांतर भूमिका में रहलें. एहू फिल्म में राखी पर एगो गाना बा- ‘’ राखी हर साल कहेले सवनवा में, भईया बहिनी के रखिहs अपना मनवा में ’’. हर साल राखी प ई गीत देश भर में गूँजेला.

पहिलका रंगीन भोजपुरी फिल्म ‘’ दंगल ‘’
1977 में आइल फिल्म दंगल सुजीत कुमार के तीसरा भोजपुरी फिल्म रहे. एकरा से पहिले उ बिदेसिया अउरी लोहा सिंह कर चुकल रहलें. सुजीत कुमार हिन्दी में काफी पहिले से सक्रिय रहलें. फिल्म दंगल के गीत ‘काशी हिले पटना हिले’ त क्लासिक हो गइल. फिल्म के कहानी एगो नौजवान कुंदन ठाकुर के रहे जे समाज में होखत अत्याचार से हरदम लोह लेत बा. ओकर चाचा ठाकुर साहब छोट जात से बड़ा नफरत करत बाड़ें. बाकिर एक बार लड़ाई में जब उनके जान पर बन आवत बा आ उनके ब्लड ग्रूप के खून नइखे मिलत त एगो छोट जात के लइकी के खून से उ बचत बाड़ें. इहाँ उनके हृदय परिवर्तन होता आ उ कुंदन के बियाह ओ लइकी बादामी से करा देत बाड़ें अउरी जाति पात के बंधन पाट देत बाड़ें.

रूस गइलें सइयाँ हमार
पाँचवा क्लासिक फिल्म बा नाजिर हुसैन के निर्देशन में बनल ‘रूस गइलें सइयाँ हमार’. फिल्म के गीत संगीत बड़ा हिट भइल. फिल्म के हीरो रहलें राकेश पांडेय. एह फिल्म के कहानी रहे एगो गाँव के अधेड़ उम्र के ठाकुर के. जे अपना प्रेमिका रामकली के लइका के अपनावे से इनकार कर देत बाड़ें काहें कि उ लोग के का मुंह देखइहें. रामकली के अपना गोदी में के लइका लेके अकेले उ गाँव छोड़ के जाए के पड़त बा. जब रामकली अकेले अपना बेटा के पाल पोस के बड़ा कर देत बाड़ी त उहे बेटा ठाकुर से अपना हक अउरी नाम खातिर लड़त बा. ई फिल्म भी जरूर देखें लायक बा.

देखे लायक भा क्लासिक भोजपुरी फिल्मन के एगो बड़हन लिस्ट बा, जवना के देख-देखा के छाती उतान कइल जा सकेला. उक्त पाँच गो फिल्म त नजीर के रूप में पेश कइनी ह. बिदेसिया, बलम परदेसिया, धरती मईया, गंगा किनारे मोरा गाँव, पिया के गाँव, दुल्हा गंगा पार के आदि पुरनका दौर में भा परिवार, औलाद, फिरंगी दुलहिनिया, कोठा, बिदाई आदि नयका दौर में भी अइसन तमाम फिल्म बा, जवन देखल जा सकेला. अँधेरा प उजाला उछाले के पड़ी ए भाई. कीचड़ से कीचड़ ना धोआई.

( लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य और सिनेमा के जानकार हैं.)

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