Bhojpuri: तेज प्रताप मनवले 33 वां जन्मदिन, दिखल लालू जइसन रोचक अंदाज

कोरोना संक्रमण के चलते तेज प्रताप एकदम निजी तरीका से कार्यक्रम कइले. एह जलसा में उनकर कुछ नजदीकी मित्र अउर परिचित लोग ही बोलावल गइल रहलें. जन्मदिन के पार्टी में तेज प्रताप के छोट भाई व बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव आ त ना सकलें लेकिन वीडियो काल से कार्यक्रम से जुड़ल रहलें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 16, 2021, 4:30 PM IST
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माधुरी कुमारी

राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बड़का लाल यानी तेज प्रताप यादव शुक्रवार के आपन 33 वां जन्मदिन मनवले. कोरोना संक्रमण के चलते तेज प्रताप एकदम निजी तरीका से कार्यक्रम कइले. एह जलसा में उनकर कुछ नजदीकी मित्र अउर परिचित लोग ही बोलावल गइल रहलें. जन्मदिन के पार्टी में तेज प्रताप के छोट भाई व बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव आ त ना सकलें लेकिन वीडियो काल से कार्यक्रम से जुड़ल रहलें. तेजस्वी वीडियो कॉल से ही तेज प्रताप के बधाई दिहलें अउर केक काटने तक वीडियो काल पर अपना भाई से बतियावत रहलें. जन्मदिन के लेके तेज प्रताप आपन सरकारी आवास के खूब सजवले रहले. घर के लाइट अउर गुब्बारा से खास तौर से सजावल गइल रहे.

तेज प्रताप के साथ तेजस्वी के भी फोटो लगावन गइल रहे.जन्मदिन के जश्न रात 12 बजे शुरू भइल. तेज प्रताप अपना खास दोस्तन के साथे पहिले केक कटले. फेर सबलोग जमके मस्ती कइलें. तेज प्रताप के समर्थक लोग एह पार्टी के वीडियो सोशल मीडिया पर डलले बाड़े जेकरा प लगातार कमेंट आ रहल बा. तेज प्रताप राजनीति से ज्यादा अपना अनोखा अंदाज से अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होले. कभी अपना वेशभूषा के लेके त कभी जिलेबी बनावत. तेज प्रताप के पिता लालू प्रसाद भी अपना अइसने अनोखा अंदाज से दोस्तन के बीच अक्सर चर्चा में रहल बाड़े. लालू दोस्तन से अपना जीवन से जुड़ल किस्सा-कहानी भी खूब सुनावत रहल बाड़े. लालू के जीवन से जुड़ल किस्सा-कहानी खूब मजेदार बा.

जेल में बंद रहत देख आवत रहले दशहरा के मेला
राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बात ही कुछ अलग होला, अंदाज भी निराला होला. थेट गंवई भोजपुरिया अंदाज से देश में उनकर पहचान भी बा अउर एहसे उ हमेशा चर्चा में भी रहले. अपना जीवन के दिलचस्प किस्सा कहानी के वइसन के अंदाज में सुनावे में भी लालू के महारत हासिल बा अउर उनका अइसन करे में मजा भी आवेला. सुने वाला के भी किस्सा भी अच्छा लागेला अउर लालू के कहे के अंदाज भी. एगो अइसनके किस्सा लालू प्रसाद सुनवले रहले. इ किस्सा 1974 में जेपी आंदोलन के दौरान भइल लालू यादव के जेल यात्रा से जुड़ल बा. जेपी आंदोलन के समय लालू पटना विश्वविद्यालय के छात्र राजनीति में आपन खास स्थान बना चुकल रहले. एह प्रसिद्ध विश्वविद्यालय के छात्र संघ के उ अध्यक्ष भी रहले. बिहार के मुख्यमंत्री अउर केंद्र में रेल मंत्रालय जइसन महत्वपूर्ण कुर्सी प बइठ के शासन के भी अपना अंदाज में चलावे वाला लालू प्रसाद एह किस्सा के एगो टीवी टॉक शो में भी साझा कइले रहले. इ चर्चित टॉक शो के नाम रहे जीना इसी का नाम है. इस टॉक शो में लालू के बतावल किस्सा इ ह. अब रउरो जानीं.

जेपी आंदोलन लालू के भी गिरफ्तारी भइल. उनका के जेल में बंद कर दिहल गईल. तब उ बीमर पड़ गइले अउर उनका के पीएमसीएच के कैदी वार्ड में शिफ्ट कर दिहल गईल. कैदी वार्ड में लालू अक्सर ओहिजा तैनात सिपाही सबके चकमा देके बाहर निकल जात रहले. उ दशहरा के समय रहे. लालू दशहरा के मेला देखके फिर कैदी वार्ड में लौट आवत रहले. लालू खाली दशहरा मेला देखे खातिर ही सिपाही लोग के चकमा देके ना निकलत रहले दोसरो कवनो काम खातिर भी अइसहीं करत रहले. उनकर इ कारनामा करीब छह माह तक चलल. टॉक शो में जब लालू से पूछल गइल कि सिपाही लोग के रहला के बाद उ कैदी वार्ड से निकल कइसे जात रहले. चेहरा प मुस्कान लिहले लालू बतवले- ओह समय में पीएमसीएच के कैदी वार्ड कंटइला तार से घेरल रहे. सिपाही लोग गेट पर रहत रहले. एकरे लाभ उठाके पेटकुनिए जमीन पर लेटके कंटइला तार के घेरा से बाहर निकल जात रहले. लालू एक तरह से निकलत रहले कि सिपाही लोग के कुछ पता ही लागत रहे. कैदी वार्ड में लौटे समय भी लालू इहे काम करत रहले. एह तरह से कहे खातिर अउर देश-दुनिया के नजर में त लालू जेल में रहले लेकिन आपन बुद्धि लगाके जेल में रहला प भी दशहरा जइसन मेला घूम आवत रहले.

लालू प्रसाद के छात्र जीवन से जुड़ल इ अकेले किस्सा नइखे. अइसन कइगो कहानी उनकर विद्यार्थी जीवन से जुड़ल बा. एक समय अइसन भी रहे कि जब जूता अउर कपड़ा खातिर लालू एनसीसी ज्वाइन कइले रहले. हालांकि एनसीसी के कखगघ से भी उनका कवनो लेना-देना ना रहे. उ एनसीसी में एही खातिर आइल रहले कि जूता अउर कपड़ा त मिली. एनसीसी वाली कहानी के चर्चा लालू आपन आत्मकथा गोपाल गंज से रायसीना में कइले बाड़े. एह किताब में लालू लिखले बाड़े कि बचपन उनकर बेहद आर्थिक तंगी में गुजरल. पिता ग्वाला रहले अउर दूध-दही बेचके परिवार चलावत रहले. दूध-दही बेचला से एतना कमाई ना होत रहे कि परिवार के लालन-पालन हो सके. इहे कारण रहे कि पूरा परिवार कच्चा मकान में रहत रहे. बरसात के समय कच्चा घर के छज्जा से पानी टपकत रहे तब बरसात में कइसहूं काम चलत रहे. ठंडा के समय में भी एक कच्चा घर में कवनों तरह से गुजारा होत रहे. (डिस्क्लेमर- लेखक माधुरी कुमारी पत्रकार हैं. यह उके निजी विचार हैं.)




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