Bhojpuri Special: नीतीश कुमार के गोदी में खेलल बाड़े तेजस्वी, आज बाड़ें आमने-सामने!

हाउस में नीतीश जी के भाषण से पता चलल कि ऊ तेजस्वी जादव के गोदी में खेलइले बाड़े. अइसे आज के कार्यवाही के रिपोर्ट फाइल कर देले बानी. ओकरा में विस्तार से सब बात लिखल बा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 24, 2021, 2:27 PM IST
  • Share this:
‘भव्य भोजपुरी’ पत्रिका के सम्पादक कैलाश क्रांति अपना आफिस में बइठ के कवि त्रिभुवन से बरियावत रहन. अतने में रिपोर्टर संजीव उनका चेम्बर में पहुंचले. संजीव बिधानसभा कार्यवाही के कभरेज से लौटल रहन. सम्पादक जी संजीव के बइठे के इशारा कइले. ऊ कवि त्रिभुवन के बगल में जम गइले. सम्पादक जी पूछले, आज का खास रहल ? संजीव कहले, आज हाउस में नीतीश जी के भाषण से पता चलल कि ऊ तेजस्वी जादव के गोदी में खेलइले बाड़े. अइसे आज के कार्यवाही के रिपोर्ट फाइल कर देले बानी. ओकरा में विस्तार से सब बात लिखल बा. कवि त्रिभुवन कहले, अरे ! ई तs हमनी खातिर एकदम्मे नाया जानकारी बा. देखs लs कि समय के पहिया कइसे घूम गइल. जे कहियो गोदी में खेलवले रहे आज ओकरा सामने तेजस्वी, नेता प्रतिपक्ष के रूप में खाड़ा बाड़े. राजनीति में ई अद्भुत संजोग बा.

बिजली पs चरचा में निकलल बात

सम्पादक जी कम्प्यूटर खोल के संजीव के रिपोर्ट पढ़े लगले. बिहार विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पs चर्चा के दौरान मंगलवार के नीतीश कुमार सरकार के पक्ष राखत रहन. मुख्यमंत्री राज्य में हो रहल बिकास के ब्योरा देत रहन. एक-एक बिभाग में भइल काम के ऊ गिनावत रहन. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सड़क के बाद बिजली के क्षेत्र भइल उपलब्धि के बारे में बतावत रहन. ऊ कहले, अब बिजली के कौन हाल बा ? तनी बताइय़े तो ? कहते हैं कि कुछ काम नहीं हुआ. पहिले जब ऊ लोग (राजद) रहे तब केतना बिजली रहत रहे ? बिजली खातिर हमनी के केतना काम कइनी जा. आज हर गांव में बिजली बा. हमनी के हर घर में बिजली पहुंची देनी जा. 2018 में तय समय से दू महीना पहिलहीं ई काम पूरा हो गइल. एह बात पs नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव उठ के टोका-टोकी करले लगले.

नीतीश के गोदी में खेलल बाड़े तेजस्वी
संजीव के रिपोर्ट जारी रहे. जब नीतीश कुमार लालू-राबड़ी शासन के दौरान बिजली के बादहाली के बात कहले तs तेजस्वी यादव सवाल उठावले. ऊ नीतीश कुमार से पूछले, जब रउआ बाजपेयी सरकार में मंत्री रहीं तs बिहार में बिजली के हाल सुधारे खातिर कोशिश काहे ना कइनीं ? तब नीतीश कुमार हंस के तेजस्वी से कहले, अरे भई जब हम उहां मंत्री थे तब आप गोदी में थे. अब काहे ई बात कर रहे हैं. का हम आपको गोदी में नहीं उठाये हैं ? बइठ जाइए. एतना सुन के तेजस्वी भी मुस्काये लगले. तब मुख्यमंत्री तेजस्वी से कहले, बाद में जे बोले के होखी से बोल लिहs, अभी हमार बात सुन लs. बाद में ई बहुत फैदा करी. जब हमनी के 2005 में सरकार में आइल रहीं जा तs बिहार में बिजली के खपत रहे 700 मेगावाट. जब कि आज बिजली के खपत 5 हजार 900 मेगावाट से भी बेसी हो गइल बा.

नीतीश जब मंत्री रहन तs केतना उमिर रहे तेजस्वी के ?

संजीव के रिपोर्ट पs कवि त्रिभुवन कहले, नीतीश जी कब के बात करत रहन ? सम्पादक कैलाश क्रांति जवाब देले, साटिकफिटिक के मोताबिक तेजस्वी यादव के जन्म नवम्बर 1989 में भइल रहे. एकरा एक महीना के बादे केन्द्र में वीपी सिंह के सरकार बनल रहे. दिसम्बर 1989 में जब वीपी सिंह के सरकार बनल तs नीतीश कुमार के कृषि राज्यमंत्री के जिम्मेवारी मिलल. जब नीतीश केन्द्र में कृषि राज्य मंत्री रहन तs ओह घरी तेजस्वी के उमिर दू महीना रहे. जाहिर बा कि ऊ गोदी में रहन. तब नीतीश कुमार और लालू जादव में पक्का दोस्तियारी रहे. एक दोसरा से खूब मेलजोल रहे. ओह घरी अगर नीतीश कुमार तेजस्वी के गोदी में खेलवले होखस तs कवनो अचरज नइखे. लेकिन जब नीतीश कुमार वाजपेयी सरकार में मंत्री रहन तs तजेस्वी के उमिर 9-10 के रहे. तब ले नीतीश कुमार अउर लालू जादव अलगा हो गइल रहे. बिहार में राबड़ी देवी के सरकार रहे. नीतीश कुमार राबड़ी देवी के समय बिजली के दुरदसा पs सवाल उठवले तs तेजस्वी बात काटे लगले. नीतीश कुमार उनका के समझावे खातिर गोदी वला बात कहले. नीतीश कुमार तेजस्वी से कहल चाहत रहन कि ऊ अभी नया उमिर के नेता बाड़े, ऐह से उनका समझे खातिर सभ बात धेयान से सुने के चाहीं.



बिजली में कमाल

संजीव बहुत देर से सम्पादक कैलाश क्रांति अउर कवि त्रिभुवन के बात सुनत रहन. संजीव कहले, बिहार में बिजली के हाल कमाल बा. अब गांव- गांव में 20 घंटा बिजली रहत बा. घरे-घरे फ्रीज, वाशिंग मशीन अउर मिक्सी चले के आवाज सुनल जा सकेला. सिल्ला-लोढ़ा से मसाला पीसल अब बीतल बात हो गइल. दिल्ली- बोम्बे कमाये वला केतना लइका तs अपना घर में एयरकंडिशन तक ले लगा ले बाड़े. पहिले ई सब सपना रहे. आज से आठ दस पहिले भी ई सुविधा के बारे में केहू सोच ना सकत रहे. बड़का-बड़का शहर में छव-सात घंटा बिजली रहत रहे. लेकिन अब भरपूर बिजली मिल रहल बा. दिन में तs कुछ देर बिजली कटियो जाला लेकिन रात में एकदम पक्का रहेला. गांव के पतोह लोग तs संझिय़े खैका बना के सिरियल देखे बइठ जाता लोग. ऐह मामला में गांव, शहर के कान काटले बा. अगर पढ़ाई अउर इलाज के अतने बढ़िया सुविधा हो जाय तs शायदे केहू शहर के कोलकी में रहल चाही. लइकन के बढ़िया स्कूल में पढ़ावे खातिर ही गांव के केतना अदिमी शहर में डेरा लेके रहत बाड़े. अउर कुछ तs ना लेकिन बिजली के मामला में गांव चकचक हो गइल बा. संजीव आगा कुछ कहले चाहत रहन कि चाह चल आइल. एकरा बाद सभे चाह के चुस्की मारे लागल. (लेखक अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ स्तंभकार हैं.)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज