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Bhojpuri: मुंबई में “बाढ़” के हल्ला आ कोलकाता में शांति, आखिर काहें?

मुंबई में अगर एक-दू दिन भी बारिश हो जाला त पूरा देश में हो-हल्ला मच जाला, लेकिन कोलकाता में अइसन हालात होखे ला त कवनो खबर ना बन पावे ला. लोग भी शांत रहेला, काहें से कि कोलकाता के लोग जानता कि ई बाढ़ 24 घंटा के भीतर गायब हो जाई.

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कोलकाता के बारे में कहाउत ह कि एइजा मुसरियो पेशाब क देले त सड़क पर ठेहुना भर पानी हो जाला. आ मुंबई के बारे में कहाला कि दिल्ली के साल भर के बरखा आ मुंबई पांच दिन के बरखा एके बराबर हो जाला. त ए दूनो कहाउत में अतिश्योक्ति अलंकार के रस बा. त ऊ कहाउते का कहाई कि जेकरा में अतिश्योक्ति अलंकार के रस ना होखे. रउवां सब जानते बानी कि अतिश्योक्ति अलंकार के बिसेसता ह कि ऊ बिषय के मैग्नीफाई क देला. बाकिर मुंबई के हाल बिसेस बा.

ओइजा जब बरखा का बाद सड़क, रेल लाइन आ मोटे में कहीं त पूरा महानगर पानी में छाती भर डूब जाला आ लोग ऊभ- चूभ होखे लागेला. त मुंबई आ कोलकाता दूनो महानगरन के सड़क बरखा भइला पर बढ़िया जाली सन. बाकिर ढेर हल्ला मुंबईए के होला. जहां देखीं, तहें मुंबई महानगर के हलचल ठप होखे के खबर आवता. आ कोलकाता के लोग शांत रहेला. कहीं हल्ला- गुल्ला ना. कोलकाता के लोग जानता कि ई बाढ़ 24 घंटा के भीतर गायब हो जाई. तलेले दुख सहि लेबे के बा. बाकिर मुंबई त माया नगरी ह. ओकरा के आर्थिक राजधानी कहल जाला. ग्लैमर आ अर्थ के जहां मेल होई ओइजा के कौनो गतिविधि हल्ला के कारण बन जाई.

कोलकाता के लोग जानता कि हल्ला कइला से बढ़िया बा कि पानी उतरे के इंतजार क लिहल जाउ. आंकड़ा कहतारे सन कि मुंबई में ड्रेनेज सिस्टम बहुते पुरान बा. एतना पुरान कि करीब 25 मिलीमीटर पानी प्रति घंटा निकल सकेला, जबकि भारी बरखा भइला पर ज़रूरत परेला कि 993 मिलीमीटर प्रतिघंटा पानी निकलो. त पानी जब ओह स्पीड से ना निकली त चारो ओर पानी- पानी होई आ बाढ़ के रूप लेली. रोड पर जे बा, ऊ ओइजे फंसल रहि जाला. चाहे कार में होखे, चाहे मोटरसाइकिल में, चाहे बस में होखे, चाहे ट्रक में. महाराष्ट्र के बिसेसज्ञ कहेला लोग कि पूरा ड्रेनेज सिस्टम के बदल देबे के परी. एकर खर्चा अरब में आई. प्रशासन एकरा पर मंथन करत होखी. त एगो रिपोर्ट कहतिया कि उत्तरी मुंबई - बांद्रा आ कुर्ला के आसपास के इलाकन में बेतरतीब विकास भइल बा. एइजा बड़े बड़े बिल्डिंग बिना उचित ड्रेनेज सिस्टम के बनावल बाड़ी सन. बिल्डिंग बनावे के पहिले पानी के निकास के कौनो प्लानिंग नइखे भइल.

खबर बा कि 1990 के दशक में तत्कालीन भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय के बता दिहल रहे कि बांद्रा कुर्ला कांप्लेक्स के मंज़ूरी दिहला पर भविष्य में कई गो प्राकृतिक विपदा आ सकेली सन. बाकिर के सुनता. बर्तमान देख, भविष्य के देखता. बस बेतरतीब निर्माण भइल आ बाढ़ अउरी बिकराल रूप ले लिहलस. बिसेसज्ञ लोग ईहो कहता कि जनसंख्या त बेहिसाब बढ़ल बाकिर ड्रेनेज सिस्टम ऊहे रहल. जनसंख्या बढ़ी त पानी के इस्तेमाल करे वाला आ कचरा उत्पन्न करे वाला लोगन के संख्या आटोमेटिक बढ़ी. एकर प्रभाव निकासी व्यवस्था पर भी परी. सोशल मीडिया के आ गइला से कई गो नोकसान बा त फयदो बा. फायदा ई बा कि गड़बड़ी वाला जगहन पर आम आदमी वीडियो बना देता. सोशल मीडिया पर अइसन फोटो के भरमार बा, जौना में मुंबई के नाला, नाली आ गली प्लास्टिक कचरा से भरल बा. प्लास्टिक अउरी ड्रेनेज सिस्टम के जाम करता.

अब कोलकाता के हाल पर आईं. कोलकाता समुद्र तल से 20 फीट ऊपर बा. कोलकाता पहिले कलकत्ता रहल ह. त सन 1911 ले, कलकत्ता देश के राजधानी रहल ह. ओकरा बाद राजधानी दिल्ली हो गइल. अंग्रेज देश के एह तत्कालीन राजधानी के ड्रेनेज सिस्टम बड़ा दुरुस्त बना दिहले सन. बाकिर सन 1930 के बाद कलकत्ता के तेजी से विस्तार होखे लागल. जनसंख्या के दबाव आ बेतरतीब बिल्डिंग बने लगली सन. बिल्डिंग बनावे के जौन बेसिक रूल/नियम रहले सन ओकरा के तूरि के मनमाना निर्माण भइल. कलकत्ता में ड्रेनेज/निकासी खातिर “खाल” (नहर) प्रणाली रहल ह. अबो कई जगह बा. टाली नाला (सन 1777 में बनल), सर्कुलर कैनाल के निर्माण पानी के निकासिए खातिर भइल रहे. अंडरग्राउंड सीवर सिस्टम भी बड़ा दुरुस्त रहे.

कचरा के जौन समस्या मुंबई में बा, ठीक ऊहे कोलकाता में बा. एइजो प्लास्टिक के थैली के अंधाधुंध प्रयोग नाला- नाली जाम क देतारी सन. कौनो कचरा फेंके के बा, त कतने लोग नालिए में फेंकि देता. ई नइखे सोचत कि नाली जाम हो जाई. नाली कचरा फेंके खातिर ना ह. त कोलकाता में भी पुरान आ दुरुस्त ड्रेनेज सिस्टम के कचरा आ अवैज्ञानिक ढंग से बनल बिल्डिंग चुनौती देबे खातिर तेयार रहेली सन. ई कहाउत पुरान ह कि कोलकाता में चुहिया पेसाब क देले त ठेहुना भर पानी भरि जाला. त मान लीं कि एगो बिल्डिंग ड्रेनेज सिस्टम के बायकाट कके बनि गइल, त ऊहे बिल्डिंग काफी बिया सड़क पर पानी जमा क देबे खातिर. जब कोलकाता में बरखा होला त कुछ इलाका अइसन बाड़े सन जहां पानी के जमाव होखबे करी. जइसे महात्मा गांधी रोड, मुक्ताराम बाबू स्ट्रीट, सेंट्रल एवेन्यू, ठनठनिया, बेहला, कालीघाट, मटियाब्रुज, टालीगंज, उल्टाडांगा वगैरह इलाकन के सड़क पर जदि जम के बरखा हो गइल त पानी लगबे करी. रउरा जूता- मोजा खोलि के आपन पैंट ऊपर चढ़ा के पानी हेलत गते- गते चलहीं के परी.

कोलकाता के विडंबना ई बा कि जबे बंगाल के खाड़ी में निम्न दबाव पैदा भइल, जोरदार बरखा शुरू हो जाला. जोर के हवा बहे शुरू हो जाला. बाकिर पानी लागो चाहे तूफान आओ, कोलकाता के लोग शांत रहेले. जानेले कि ई आपदा अल्प काल खातिर आइल बा. अगिला दिन तक ले ठीक हो जाई. बाकिर मुंबई में तनी पानी लागि जाउ आ तब देखीं. लागेला कि देश भर में हल्ला हो गइल. त देखल जाउ त मुंबई के बाढ़, बाढ़ ह आ कोलकाता के बाढ़ कुछु ना. हालांकि मुंबई के तुलना में कोलकाता अभियो सहज आ करुणामय बा. एकर वजह ई बा कि कोलकाता में मनुष्यता के तत्व अभी बांचल बा. हालांकि धीरे- धीरे ई तत्व गायब हो रहल बा. फिर भी बांचल बा. कबले बांची, कहल ना जा सकेला. (विनय बिहारी सिंह वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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