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Bhojpuri: तालिबान से हमदरदी रखे में कई लोग रहे आगे, जेकरा परेशान बा अफगानिस्तान

बरसन से अफगानिस्तान में जमल तालिबान एक बेरि फेरू ताकतवर होइ के उठि रहल बा. ओकरा ताकति के एही बात से अंदाजा लगावल जा सकेला, कि जइसहीं विदेसी सेना वापस लवटे लागे लगली, तालिबान लगातार सीमा वाला इलाकन में कब्जा करत जा रहल बा.

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अफगानिस्तान में बीस साल से जमल अमेरिका के अगुआई वाली विदेशी सेना सभ लउटलि शुरू हो गइल बा. एह के अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक के जानकार लोग नीमन कदम बतावता, खासकर वामपंथी सोच वाला जानकार लोग. बाकिर एकर एगो आउर खतरा नजरि आवे लागल बा. बरसन से अफगानिस्तान में जमल तालिबान एक बेरि फेरू ताकतवर होइ के उठि रहल बा. ओकरा ताकति के एही बात से अंदाजा लगावल जा सकेला, कि जइसहीं विदेसी सेना वापस लवटे लागे लगली, तालिबान लगातार सीमा वाला इलाकन में कब्जा करत जा रहल बा. एकर असर ई बा कि भारत के कंधार के आपाना वाणिज्य दूतावास के अफसर-कारिंदा लोगन के वापस बोलावे के खातिर मजबूर हो गइल बा.

अफगानिस्तान में 20 को राज्य बाड़े स. जवना में कुल्हि 421 को जिला बा. तालिबान के ताकत के अंदाजा एही बात से लगावल जा सकेला कि एह में से करीब दू सइ जिलन पर तालिबान के कब्जा हो गइल बा. तालिबान के दावा बा कि देस के करीब 85 सैकड़ा सैनिक इलकन पर ओकर काब्जा बा. हालांकि अफगानिस्तान सेना दावा कइ रहलि बिया कि ऊ धीरे-धीरे तालिबान के कब्जा वाला इलाकन के छीनि रहलि बा.

तालिबान के लेके भारत में पहिलहीं से खौफ के माहौल रहल बा. जब तालिबान के अफगानिस्तान में सासन रहे त ओह घरी पूरा दुनिया ओकरा के अकेले छोड़ि देले रहे. साल 1999 के 24 दिसंबर के पाकिस्तान के आतंकवादी नेपाल के राजधानी काठमांडू से दिल्ली लवटत इंडियन एयरलाइंस के विमान नंबर आईसी 814 के अपहरण कइ लेले रहले स. ओह विमान के पहिले ऊ दुबई ले गइल रहले स. उहवां 23 गो लोगन के उतारि देले रहले स.ओकरा बाद ओह विमान के आतंकवादी ओकरा के लेके कंधार चलि गइल रहले स. ओह घरी अफगानिस्तान में दोसर सरकार रहल रहित त ओह अपहरण करे वालन सभ से कड़ाई करिते स, लेकिन ओह घरी मुल्ला उमर वाली शरिया कानून चलावे वाला सरकार रहे. ऊ सरकार भारत के मदद ना कइलसि. कहल जाला कि ऊ कंधार हवाई अड्डा के भाड़ा के नाम पर लाखन डालर भारत सरकारक से लेले रहले स. ओह विमान के यात्री लोगन के छोड़ावे खातिर भारत सरकार के चारि गो खूंखार पाकिस्तानी आ कश्मीरी आतंकवादियन के छोड़े के परल रहे.

मौलाना उमर के सासन खतम भइला के बाद अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में भारत खूब सहयोग कइले बा. आउर त आउर, अफगानिस्तान के संसद के भारते नौ करोड़ डालर लगाके बनवले बा. एह वजहि से तालिबान के जइसे-जइसे सासन के आहट सुनाई देता, भारत के समस्या बढ़े लागल बा.

तालिबान से हमदरदी राखे वाला भारत में एगो वर्ग बा. मार्च 2021 में जब बामियान वाली बुद्ध भगवान के दूनो मूरतियन के डाइनामाइट से उड़ा दिहल गइल रहे. बामियान काबूल से 230 किलोमीटर दूर बा. उहवां के पहाड़ी पर भारी-भारी ऊ दूनो मूरति रहली स. दूनो मूरति करीब ढाई हजार मीटर ऊंच पहाड़ी पर रहे. ओह में से एगो मूरति साल 507 ईसवी आ दोसरकी मूरति 554 ईसवी में बनावल गइल रहे. ओह में एगो मूरति के ऊंचाई 35 मीटर ऊंच रहे, जबकि दोसरकी 53 मीटर ऊंच रहे. ई दूनो मूरति यूनेस्को के विश्व धरोहर लिस्ट में सामिल रहली स. ओह खातिर तालिबान सासन में भी मोट रकम मिलत रहे, जबकि पूरा दुनिया शरिया कानून लागू कइला के वजहि से तालिबान के बायकाट कइले रहे. तालिबान के तरक रहे कि अफगानिस्तान में जब अकाल पड़ल बा, ओह घरी मूरति के रख-रखाव खातिर करोड़न रूपया आइल ओकरा ओकरा बरदास्त नइखे.

सभ जानता कि भगवान बुद्ध शांति आ अहिंसा के संनेस देबे वाला महापुरूष हवन. अइसन आदमी के मूरति डाइनामाइट लगा के उड़ा दिहल जाउ त असहज लगबे करी. पूरा दुनिया में एकर विरोध होत रहे. एह पर संसदो में चरचा भइल रहे. तब लोकसभा में वामपंथी दलन के संसदीय दल के नेता सोमनाथ चटर्जी रहले. उनुका समेत समूचा वामपंथी खेमा तालिबान के समर्थन में उतरि गइल रहे. ओह लोगन के कहनाम रहे कि चूंकि दुनिया तालिबान के ओरि नइखे देखति त ऊ आपाना ओरि धेयान बंटावे खातिर बामियान के मूरतियन के तूरलसिहा.

गोरा के देस, अफगानिस्तान में जब से तालिबान के फेरू से ताकतवर भइला के खबरि आ रहलि बा, वामपंथी सोच वाला लोग मनहिं मन गुदगुदाता. बाकी समूचा दुनिया एक बेरि फेरू घबराहट से भरि गइल बिया. दुनिया के लोकतांत्रिक ताकतन के लागता कि एक बेर फेरू भारतीय उपमहाद्वीप वाला इलाका में मार-काट आ धार्मिक कट्टरता बढ़ि सकेला. तालिबान के जमाना में ही भारत में आतंकवाद बढ़ल रहे. ऊ पाकिस्तान के आतंकवादिन के मदद करे के जरिया बनि गइल रहे.
अफगानिस्तान के छोड़े के पीछे अमेरिका के तरक बा कि अफगानिस्तान के तीन लाख के संख्या वाली सेना तालिबान के 75 हजार लड़ाकन पर भारी पड़ी. बाकिर अबहिं ई साफ नइखे कि अफगानिस्तान के भविष्य का होई, उहवां लोकतांत्रिक सरकार बनल रहि कि तालिबान के कब्जा हो जाई..लेकिन एगो बात तय बा कि अगर तालिबान के ताकति बढ़ल त भारत के अफगानिस्तान में जवन करोड़ो डालर के निवेश भइल बा, ऊ डूबि जाइ. (उमेश चतुर्वेदी वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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