Bhojpuri: चनेचर चा के चिट्ठी- ई अफसर लोग तs राउर जहाज डूबा दिहें नीतीश बाबू!

कोरोना महामारी में अफसरशाही के परपंच देख के उनका देह में लहर उठल रहे. गांव होखे बा शहर, सगरे हाहाकार मचल बा. लेकिन अफसर लोग के नजर में सभ ठिक्के बा. सच्चाई पs परदा डाल के ई अफसर लोग सरकार के भी सभ निमने देखा रहल बड़े.

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चनेसर चा के मन कुछ बेचैन रहे. मन में बबंडर उठल तs दलान के एह कोना से ओह कोना चक्कर मारे लगले. कोरोना महामारी में अफसरशाही के परपंच देख के उनका देह में लहर उठल रहे. गांव होखे बा शहर, सगरे हाहाकार मचल बा. लेकिन अफसर लोग के नजर में सभ ठिक्के बा. सच्चाई पs परदा डाल के ई अफसर लोग सरकार के भी सभ निमने देखा रहल बड़े. सोच-बिचार के उदबेग में चनेसर चा कुछ बुदबुदाए लगले. फेन कगज-कलम उठा के चौकी पs बइठ गइले. मन के बोझा हलुक करे खतिर जोर से सांस खींच के कहले, हमार बात सरकार भिरी पहुंची कि ना ? मालूम नइखे, लेकिन आज हम नीतीश बाबू के चिट्ठी लिखब जरूर.

चनेसर चा के चिट्ठी

चनेसर चा कलम उठा के लिखे लगले, हजूर के दंडवत, गांव के गरीब किसान रउआ से हाथ जोड़ के कुछ कहल चाहत बा. भारत में तीन इंजीनियर नामी मुखमंतरी बनले. रउओ ओकरा में एक बानी. सोच-बिचार अलहदा होखे के चलते रउआ से जनता के उमेद भी बहुत अधिक बा. महामारी में अगर जनता के दुख दर्द होई तs ऊ आपन तकलीफ केकरा से कही ? लेकिन अफसोस के बात ई बा कि जनता के आवाज रउआ भी पहुंच नइखे पावत. जनता अउर सरकार के बीच देवाल बन के खाड़ा बा अफसर लोग के परपंच. ऊ सही बात रउआ भी पहुंचे निइखन देत. ऊ बिगड़ल बेबस्था के भी रंग-पोत के निमन देखा रहल बाड़े. लेकिन रउआ भरमाई मत. अफसर के आंख से ना बलिक अपना आंख से देखीं कि जनता कवन हाल में जिनगी गुजार रहल बिया. कुछ दिन पहिले रउए पाटी के एक नेता कहले रहन, अस्पताल के बेबस्था सुधारीं ना तs अफसर डूबा दिहें रुउआ के. हमरो कहनाम इहे बा कि गलती करिहें अफसर अउर भरे के परी सरकार के.

हजूर ! अफसर तs आंख में धूर झोंक रहल बाड़े
चनेसर चा रोक के कुछ सोचे लगले. फेन लिखले, बेगूसराय के अफसर लोग कइसे सरकार के आंख में धुर झोंकले, तनी एकरा पs बिचार करीं. तारीख 17 मई, दिन सोमार. रउआ बेगूसराय के बाघा सामुदायिक किचेन के भरचुल जांच कइले रहीं. ओह दिन सामुदायिक भवन के बिहुती घर जइसन सजावल गइल रहे. फरस पर ललका कलीन. गद्देदार कुरसी. कुरसी टेबुल के उज्जर बगबग खोल के ओहार. टेबुल पs उजरका चमचम्मी. अइसन टंच बेबस्था तs निमन निमन बरियात में ना रहे. माल जनता के रहे एह से मिरजा के होली खेले में कवनो दिक्कत ना रहे. एक टेबुल पs दू अदिमी बइठ के शांति से खात रहन. रउआ नजर के सामने सामाजिक दूरी के भरपूर पालन देखावल गइल. लेकिन ई सभ नजर के धोखा रहे. कोरोना महामारी में जहां सगरे चीख पुकार मचल बा ओह स्थिति में सामुदायिक किचन के होटल जइसन चकाचक कइसे देखावल गइल ? अबहीं जब पइसा के कमी बा तs भोजन के बदले सजावट पs खारचा काहे भइल ?

एक्के दिन के बाद एकर पोल खुल गइल. तारीख 18 जून, दिन मंगर, समय रात के करीब आठ बजे. इहे सामुदायिक किचेन आपन ओरिजनल रूप में सामने आ गइल. करीब डेढ़- दू सौ अदिमी के भीड़ जुट गइल. गेट पर धाक्का धुक्की, ठेला ठेली, खींचा खीची शुरू हो गइल. पहिले जाये के फेरा में अदिमी प s अदिमी चढ़े लगले. कोरोना गाइडलाइंस चल गइल बूंट लादे. जब गिरील सटा के गेट बंद भइल तब तनी शांति भइल. लेकिन अकरा बादो हौल में आदिमी के भीड़ ढुक गइल रहे. सोमार के जवना टेबुल पs दू अदिमी खात रहन अब ओकरा पs चार-पांच अदिमी बइठ के जिमावत रहन. जे सीट लूटे में पिछुआ गइल ओकरा खाड़ा रहे के पड़ल. दरी, कालीन, गाद्दा अउर चमकऊआ ओहार गायब रहे. पुरान-धुरान टेबुल कुरसी पs लोग सट-सट के खात रहन. नीतीश बाबू समझ लीं, रउआ सही देखनी कि गलत देखनी.

टंच इंतजाम के असलियत



चनेसर चा चिट्ठी के पारगराफ बदलले. तरीख 18 जून, दिन मंगर. वैशाली जिला के दू सामुदायिक किचेन हाजीपुर अउर महुआ के रउआ भरचुअल जांच कइले रहीं. रउआ नजर में टोटल इंतजाम चकाचक देखावे खातिर अफसर लोग पूरा जोगाड़ कइले रहन. हाजीपुर सेंटर के साज-सजावट में कवनो कमी ना रहे. बेसहारा लोग के भोजन करे खातिर टेबुल बेंच के इंतजाम कइल गइल रहे. सामाजिक दूरी के भी नियम लागू रहे. एक बेंच पs एक अदिमी. अतना कइलो के बाद अफसर लोग ई बूझात रहे कि अगर मुखमंतरी जी कवनो दिक्कत के बारे में सवाल पूछ देले तs कहीं खाये वला लोग शिकाइत मत कर देस. राउर भिडियो कनपरेसिंग के पहिले एगो अफसर खाये वला लोग के समझावे लगले, अगर मुखमंतरी जी भोजन के इंतजाम के बारे में पूछिहें तs का कहे बा. अफसर सिखवले, सीएम साहेब के पूछला पs कहे के बा, दू टाइम भोजन मिल रहल बा, एकदम बढ़िया. सभ केहू बढ़िया-बढ़िया कह देलस. रउओ खुश हो गइनी. रउआ कोरोना काल में सामुदायिक किचेन एह से खोलले बानी जवना से कि महामारी में केहू भूख से बेयाकुल ना रहे. मकसद तs नेक बा लेकिन अफसर लोग सफल होखे दिहें तब नूं. अगर बेवस्था सही में ठीक बा तs केहू के सिखवला-पढ़वला के भला का जरूरत बा ?

अफसर लोग में तालमेल नइखे

चनेसर चा लिखले, हुजूर अफसरे लोग के चलते सरकार के पटना हाईकोट में फजीहत हो गइल. बक्सर में मौत अउर गंगा घाट पs दाह संस्कार के अफसर लोग अलग-अलग रिपोट देले. राज के मुख सचिव हलफनामा में कहले कि बक्सर में 6 लोग के मौत भइल बा. दोसरा देने पटना परमंडल के कमिश्नर अपना रिपोट में कहले कि बक्सर के चरित्तर बन शमसान में 5 मई से 15 मई के बीच 789 लोग के दाह संसकार कइल गइल. तब हाईकोट के पूछे के पड़ल कि केकर रिपोट के सांच मानल जाव ? मुख सचिव अउर कमिश्नर के आफिस पटने में रहे. कवनो रिपोट देवे के पहिले आपस में राय-सलाह करे के चाहत रहे. लेकिन अइसन ना भइल. पटना हाईकोट तs पहिलहीं से सरकार के काम से नाखुश रहे. ई रिपोट से तs पब्लिक भी समझ गइल कि हाकिम लोग महामारी में कइसे काम कर रहल बाड़े. रउए आदेश पs असकूल के देवाल पs गांधी जी के सात शिक्षा लिखल बा. एकरा में लिखल बा सिधांत के बिना राजनीति अउर अंतरआतमा के बिना सुख, पाप के समान बा. शासन के संचालन अफसर-करमचारी के मार्फत ही होला. अगर अफसर-करमचारी के अंतरआत्मा में खोट आ जाई तs शासन के सुख कवना काम के रह जाई. गरीब किसान के लिखे में अगर भूल-चूक भइल होई तs माफ करबs. बाकी भगवान के दया से सभ कुछ ठीक रहे. (लेखक अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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