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Bhojpuri Spl: बाबा के काशी में 122 माई क दरबार, शिव जी संगे रहेलन 33 करोड़ देवी-देवता

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आम तौर पर लोग जानयलन कि काशी में नवदुर्गा, नवगौरी, नवचंडी अउर नवमातृ क ही धाम हयन. केतना जने के त एतनी भी जानकारी नाही हौ. लेकिन सच्चाई इ हौ कि काशी में 122 देवी माई लोगन क धाम हौ, जवने क वर्णन पुराण में हौ.

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भगवान भोले के नगरी में खाली बाबा विश्वनाथ ही नाहीं रहतन, इहां कुल 33 करोड़ देवता भी रहयलन. एही से काशी के धरती क स्वर्ग कहल जाला, जहां सेे सीधे स्वर्ग में सीट आरक्षित होइ जाला. इ बात पुराण में लिखल हौ. इहां छप्पन विनायक, आठ भैरव अउर 64 योगिनीन क दरबार हमेशा से सनातन धर्म मानय वाले श्रद्धालुन के आस्था क केंद्र हयन. लेकिन एतने देवतन के बीचे इहां देवी माई लोगन क महिमा कवनों मामले में कम नाहीं हौ. जहां शिव, उहां शक्ति. लेकिन आम तौर पर लोग जानयलन कि काशी में नवदुर्गा, नवगौरी, नवचंडी अउर नवमातृ क ही धाम हयन. केतना जने के त एतनी भी जानकारी नाही हौ. लेकिन सच्चाई इ हौ कि काशी में 122 देवी माई लोगन क धाम हौ, जवने क वर्णन पुराण में हौ. काशी क 10 दिशा में रखवारी इ देवी माई लोग ही करयलिन अउर इहां के देवी स्थानन क परिक्रमा पौराणिक काल से होत आवत हौ.

काशी में देवी क जेतना शक्तिपीठ हइन, सबकर अलग-अलग महत्व हौ. केतना शक्तिपीठ सुख, समृद्धि, प्रेम प्रदान करय वाली हइन, त केतना जेल से छोड़ावय वाली, शोक, वियोग, भय क नाश करय वाली देवी भी हइन. काशी खंड में नवदुर्गा, नवचंडी, नवगौरी, नवमातृ के अलावा 86 देवी पीठ क वर्णन हौ. एहमें से 16 क नाम विशिष्ट श्रेणी में दर्ज हौ. एकरे अलावा लिंग पुराण के कृत कल्पतरु में 24 देवी पीठ क वर्णन हौ. नवरातर में इ कुल 122 देवी पीठन क अराधना करय क मान्यता हौ.

काशी में नवचंडी के रूप में दुर्गा, भद्रकालिका, भीष्मचंडी, शांकरी, महामुंडा क नाम हौ अउर उत्तरेेश्वरी, अंगारेशी, अघकेशी नगर क जागृत देवी हइन. एकरे अलावा शतनेत्रा, सहस्राया, अयुतभुजा, अश्वारूपा, गजास्या, त्वरिता, शववाहिनी, कौर्मीशक्ति, दीप्ताशक्ति, अमृतेश्वरी, कुब्जा, विधिदेवी, द्वारेश्वरी, शिवदूती, चित्रग्रीवा, हरसिद्धि, सिद्धिलक्ष्मी, हयकंठी, तालजंघेश्वरी, यमद्रष्टा, चर्ममुंडा, महारुंडा, स्वनेश्वरी, आशापुरी, देवयानी, द्रोपदी, भीषणा भैरवी, शुक्रोदरी, कुंडेश्वरी, गंगा, काशी देवी, निगडभंजिनी बंदी देवी, छागवक्रेश्वरी, अघोरेशी, योगिनी अउर कामाख्या देवी के कृपा से काशी हर तरह के संकट से सुरक्षित रहयला अउर इहां सुख-शांति बनल रहयला.

माई लोगन क पूजा त हमेशा होला. लेकिन नवरातर में भगवती के पूजा क खास मान रहयला. साल में दुइ ठे नवरातर आवयलन. एक नवरातर कुआर में पड़यला, जवने के शारदीय नवरातर कहयलन, अउर दूसरका चईत में पड़यला, जवने के वासंतिक नवरातर कहल जाला. शारदीय नवरातर में नवदुर्गा के नौ रूप क दर्शन काशी में होला. जबकि वासंतिक नवरातर में नवगौरी के नौ रूप क दर्शन कयल जाला.

नवदुर्गा के नौ रूपन क मंदिर काशी में गंगा के किनारे दशाश्वमेध घाटे से लेइके राजघाट तक मौजूद हयन. माई क पहिला रूप शैलपुत्री क हौ अउर शैलपुत्री माई क मंदिर अलईपुर रेलवे स्टेशन के पीछे शक्कर तलाब के पास बनल हौ. मान्यता हौ कि माई पर्वतराज हिमालय के इहां बिटिया के रूप में पैदा भइल रहलिन, जवने के नाते ओन्हय शैलपुत्री कहल जाला. काशी में शैलपुत्री क मंदिर साल में खाली दूनों नवरातर में पहिले दिन खुलयला. दुर्गा क दूसर रूप ब्रह्मचारिणी क हौ. ब्रह्मचारिणी माई क मंदिर ब्रह्मा घाट पर हौ. माई क तीसर रूप चंद्रघंटा हौ अउर ओनकर मंदिर चैक थाना के ठीक सामने चद्रघंटा गली में हौ. कहल जाला कि माई क इ रूप बहुत शांतिवाला अउर कल्याणकारी हौ. माई के माथे पर घंटा के आकार क आधा चंद्रमा हौ, जवने के नाते एन्हय चंद्रघंटा कहल जाला. दुर्गा माई क चउथा रूप कुष्मांडा हौ. कुष्मांडा माई क मंदिर दुर्गा कुंड पर मौजूद हौ. एह मंदिर में हर रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करयलन. नवदुर्गा के पंचवें रूप यानी स्कंदमाता क पूजा काशी में बागेश्वरी देवी के रूप में होला. बागेश्वरी माई क मंदिर जैतपुरा महल्ला में हौ. कहल जाला कि स्कंदमाता भगवान स्कंद यानी कुमार कार्तिकेय क महतारी हइन.

माई क छठा रूप कात्यायनी देवी क हौ. महर्षि कात्यायान के तपस्या से खुश होइके माई ओनके इहां बिटिया के रूप में पैदा भइल रहलिन. माई क पहिली पूजा महर्षि कात्यायान कइलन, जवने के नाते ओनकर नाम कात्यायिनी पड़ल. काशी में सिंधिया घाट के ऊपर संकटा मंदिर के बगल में माई क मंदिर मौजूद हौ. एकरे अलावा शक्ति क सतवां रूप यानी कालरात्रि क मंदिर कालिका गली में हौ. कालरात्रि क रूप भयानक हौ, लेकिन इ हमेशा शुभ फल देलिन. एही के नाते एन्हय शुभंकरी भी कहल जाला. माई क अठवां रूप यानी महागौरी क मंदिर रामघाट पर स्थित हौ. महागौरी क पूजा माई अन्नपूर्णा के रूप में कयल जाला. नवदुर्गा क अंतिम यानी नौवां रूप सिद्धिदात्री क हौ अउर माई क प्राचीन मंदिर काशी में गोलघर भवन के पीछे मौजूद हौ.

नवगौरी क विग्रह भी काशी में अलग-अलग स्थान पर मौजूद हयन. वासंतिक नवरातर में माई के गौरी स्वरूप क पूजा-अर्चना क मान्यता हौ. नवगौरी क पहिला स्वरूप मुख निर्मालिका गौरी क हौ. माई क विग्रह गायघाट पर हनुमान मंदिर में स्थित हौ. माई क दूसर गौरी स्वरूप ज्येष्ठा गौरी क हौ, अउर एनकर मंदिर सप्तसागर यानी कर्णघंटा महल्ला में हौ. तीसरका स्वरूप सौभाग्य गौरी क विग्रह ज्ञानवापी महल्ला में सत्यनारायण मंदिर के अंदर हौ. माई क चउथा स्वरूप यानी श्रृंगार गौैरी क विग्र्रह ज्ञानवापी परिसर में मस्जिद के पीछे मौजूद हौ. इ स्थान विवादास्पद हौ, जवने के नाते श्रृंगार गौरी के दर्शन-पूजन क अनुमति साल में एक बार वासंतिक नवरातर में चउथ के दिन ही मिलयला. इ व्यवस्था 1995 से लगातार जारी हौ.

नवगौरी मे पंचवें स्थान पर विशालाक्षी गौरी क स्वरूप आवयला. भगवती क विग्रह मीरघाट के धर्मकूप महल्ला में मौजूद हौ. माई क छठा स्वरूप ललिता गौरी क हौ अउर ओनकर विग्रह ललिता घाट पर स्थापित हौ. एही तरह सतवां स्वरूप भवानी गौरी क हौ, जेकर विग्रह विश्वनाथ गली में श्री राम मंदिर में मौजूद हौ. माई क अठवा स्वरूप यानी मंगला गौरी क मंदिर पंचगंगा घाट इलाके में मौजूद हौ. नवगौरी क अंतिम यानी नौवां स्वरूप महालक्ष्मी गौरी क हौ अउर एनकर मंदिर काशी में लक्सा इलाके में लक्ष्मीकुंड पर स्थित हौ. नवदुर्गा अउर नवगौरी क दर्शन नवरातर में अलग-अलग दिन एही क्रम में कयल जाला. ओइसे पूरे साल कवनों भी दिन माई क दर्शन श्रद्धा भाव से कइले पर भगवती मनोकामना जरूर पूरा करयलिन. (लेखक सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

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