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Bhojpuri: 'उल्टा रथयात्रा' के दिने बंगाल में, जिलेबी-पापड़ खाए के परंपरा

Bhojpuri: 'उल्टा रथयात्रा' के दिने बंगाल में, जिलेबी-पापड़ खाए के परंपरा

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बंगाल में हर सुंदर आचार- व्यवहार के भगवान से जोड़ देबे के बड़ा बढ़िया परंपरा बा. “उल्टा रथयात्रा” काहें कहाला? असल में कहे के चाहीं वापसी रथयात्रा. काहें से कि भगवान जगन्नाथ, उनकर भाई बलभद्र आ बहिन सुभद्रा अपना मौसी के घरे सात दिन रहि के अपना घरे लौटेला लोग.

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तब एमें “उल्टा” का बा? ई त अपना घरे लौटल हो गइल. बाकिर बंगाल में वापसी रथयात्रा के बड़ा प्रेम से “उल्टा रथयात्रा” कहल जाला. जौन नांव लोकमन में बइठि गइल बा, ऊ सर्वमान्य हो गइल बा. कथा ह कि एक बेर सुभद्रा जी के नगर घूमे के मन कइलस. त ऊ भगवान जगन्नाथ जी से कहली. भगवान तुरंत रथ तैयार करे के कहले आ तीनो आदमी ओपर बइठि के प्रेम से नगर घूमल लोग. ईहो कहाला कि सुभद्रा जी, भगवान के कौनो भक्त के पुकार सुनि के घूमे के बहाने भगवान के दर्शन करा दिहली. त घूमत- घूमत ई तीनो देवता अपना मौसी का घरे गुंडीचा पहुंचि गइल लोग. मौसी बड़ा प्रेम आ सरधा से ओह लोगन के साथ दिन अपना लगे रखली. सातवां दिन ऊ लौटल लोग. एह दिने भगवान जगन्नाथ (भगवान कृष्ण) के घर वापसी का खुशी में उनकर भक्त मिठाई खाला लोग. बंगाल में एह दिने कुरकुर गरम जिलेबी आ चुरचुर पापड़ा खाए के परंपरा ह. जगह- जगह दोकान पर ई दूनो चीज बिकाला आ खूब भीड़ लागेला. अब रउरा कहब कि जलेबी संगे पापड़ खाइल कइसन लागत होई? ईहे हमहूं सोचत रहनी हं. बाकिर एह बेरी घर के लोगन के जिद पर हम कुरकुर गरम जिलेबी ले अइनी आ मसालेदार पापड़ घरहीं छाना गइल. अब रउरा सब से का बताईं. हमरो ई दूनो चीज के मेल बड़ा अच्छा लागल. जब सब केहू खाता ओइजा रउरा बइठि के खाइब त सचहूं ई खाद्य पदार्थन के मेल सुस्वादु लागी. एक तरफ चटक कुरकुर पापड़ आ एक ओर गरम जिलेबी. एक काटा एमें से आ एक काटा ओमें से. अद्भुत, अद्भुत. बिसवास नइखे होखत त खा के आजमा लीं. रउरो बीच- बीच में ई खाए के मन करी.

अच्छा, अब रउरा सब के मन में प्रश्न उठत होई कि जिलेबी- पापड़ खाए के परंपरा कब से शुरू भइल? आ काहें शुरू भइल. त एकरा पीछे एगो कथा बा. भगवान के दू जाना बड़ा जबर भक्त रहे लोग. एक जाना के मीठ पसंद रहे आ एक जाना के नमकीन. त जब भगवान के भोग लागे त भक्त लोग मिठाई का संगे, भोजन के थाली भी भगवान के अर्पित करे लोग आ तब चढ़ावल भोजन के प्रेम से खासु लोग. जेकरा मीठ पसंद रहे ऊ कहे कि भगवान के मिष्ठान्न चढ़ावल जाला. देखत नइख, भगवान के मधु चढ़ेला, गुड़ चढ़ेला, मिश्री चढ़ेला. त नमकीन पसंद करे वाला भक्त कहले कि तब भगवान के चावल, दाल आ तरकारी काहें अर्पित कइल जाता? एकर माने कि भगवान के नमकीन पसंद बा. दूनो जाना आपन- आपन तर्क देसु लोग. दूनो जाना एकर समाधान खातिर एगो पंडित का लगे गइल लोग. पंडित कहले कि अरे भाई, भगवद्गीता में भगवान का कहले बाड़े, पढ़ले बाड़ लोग? भक्त लोगन के तत्काल ना मन परल. त पंडित जी भगवद्गीता के नौवां अध्याय खोलि के देखा दिहले-पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति.

तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः..9.26..
(जे भक्त पत्र, पुष्प, फल, जल आदि (यथासाध्य प्राप्त वस्तु) के अनन्य भक्ति के साथे हमरा के अर्पण करेला, ओह परम भक्त उपहार-(भेंट-) को हम प्रेम से खा लेनी.)

त भगवान खुदे कहि देले बाड़े कि जे भक्त प्रेम से जौन भी चीज चढ़ा दी, ऊहे हम खा लेब. भगवान के लगे कुल चीज बा. उनका खाए के जरूरतो नइखे. ऊ त हमनी के खियावे खातिर तत्पर बाड़न. त जौन चीज तूं लोग हृदय आ मन के भक्ति से ओतप्रोत क के चढ़इब, भगवान ऊहे खा लीहें. भगवान के ई स्पष्ट वक्तव्य बा. अबो मन में कौनो शक बा? त भक्त लोग कहल कि अबसे झगड़े खतम हो गइल. भगवान के मीठ चीज भी चढ़ी आ नमकीन चीज भी चढ़ी. जब शंका निवारण से ई दूनो भक्त लौटल लोग त कहल जाला कि ओह दिन ऊ लोग भगवान जगन्नाथ के मीठा के रूप में जलेबी आ पापड़ चढ़ावल लोग आ ओकरे के प्रसाद के रूप में ग्रहण कइल लोग(ओहू घरी जलेबी, पापड़ होत होई). एह भक्त लोगन के देखि के सामान्य लोग भी ऊहे परंपरा शुरू क दिहल लोग. तबसे जलेबी (जिलेबी) आ पापड़ खाए के परंपरा शुरू हो गइल. एह कथा से हमनी के एगो संदेश मिलल कि भगवान के प्रसाद चढ़ावे के घरी मन में अपार सरधा आ समर्पण के भावना रहे के चाहीं. त खाली जल भी चढ़ा दिहल जाई त भगवान ओही के पा के खुश हो जइहें. ऊ खाली मन के भाव देखेले. एह ब्रह्मांड के कुल चीज उनकरे बनावल ह. जल भी उनकरे बनावल ह. उनकर बनावल चीज, उनकरे के समर्पित क के हमनी के खुश हो जानी जा, त भगवानो बहुत खुश हो जाले. काहें से कहल जाला कि भगवान प्रेम के भूखा हउवन. उनका लगे सब चीज बा, बाकिर मनुष्य के प्रेम के कमी बा. लोग संसारे में एतना भुलाइल बाड़े कि भगवान कल्पना के चीज हो गइल बाड़े.

(विनय बिहारी सिंह स्वतंत्र पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri

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