Bhojpuri: ‘बिहारी’ CBI चीफ के अइला से सुशांत सिंह मौत मामला में इंसाफ मिल जाई?

संयुक्त बिहार के रहे वला सुबोध कुमार जायसवाल सीबीआई के डायरेक्टर भइल बाड़े तs एक बेर फेन भरोसा जागल बा कि सुशांत मौत के हकीकत सामने आ जाई. काहे से कि सुबोध कुमार जायसावाल के बहुत कड़क अउर ईमानदार अफसर मानल जाला. ई पहिले भी महाराष्ट्र के मुखमंतरी उद्धव ठाकरे के मुंहतोड़ जवाब दे चुकल बाड़े.

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एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के पहिला बरसी के 16 दिन पहिले सिद्धार्थ पिठानी के जब फेन गिरफ्तारी भइल तs पुरान घाव ताजा हो गइल. सुशांत मौत मामला में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो तs खूब तेजी देखा रहल बा लेकिन सीबीआइ जांच बहुत सुस्त बा. सुप्रीम कोर्ट अगस्त 2020 में सीबीआइ जांच के आदेश देले रहे. करीब दस महीना जांच के बाद भी सीबीआइ कवनो नतीजा पs नइखे पहुंचल.

जब बिहारी माटी के लाल सुशांत के मुम्बई में मौत भइल रहे तs महाराष्ट्र पुलिस के जांच पs बहुत सवाल उठल रहे. एकरा बाद जब सीबीआइ जांच शुरू भइल तs लोग के भरोसा रहे कि अब सच्चाई से परदा उठ जाई. लेकिन ई आस अभी तक पूरा नइखे भइल. अब जब संयुक्त बिहार के रहे वला सुबोध कुमार जायसवाल सीबीआई के डायरेक्टर भइल बाड़े तs एक बेर फेन भरोसा जागल बा कि सुशांत मौत के हकीकत सामने आ जाई. काहे से कि सुबोध कुमार जायसावाल के बहुत कड़क अउर ईमानदार अफसर मानल जाला. ई पहिले भी महाराष्ट्र के मुखमंतरी उद्धव ठाकरे के मुंहतोड़ जवाब दे चुकल बाड़े.

2018 में बनल रहन मुम्बई के पुलिस कमिश्नर

सुबोध कुमार जायसवाल पहिले मुम्बई के पुलिस कमिश्नर रहन. जब देवेन्द्र फणनवीस महाराष्ट्र के मुखमंतरी रहन तs 2018 ऊ सुबोध कुमार के मुम्बई के पुलिस कमिश्नर बनवले रहन. फरवरी 2019 में उनका के महाराष्ट्र के डीजीपी बनावल गइल रहे. नवम्बर 2019 में जब उद्धव ठाकरे सीएम बनले त ऊ सुबोध कुमार के पद पs बरकरार रखले. लेकिन सुबोध कुमार बहुत कड़ा अफसर रहन. कवनो राजनीतिक दबाव माने वला ना रहन. उद्धव ठाकरे सरकार एनसीपी अउर कांग्रेस के सहजोग पs टिकल बा. ओह घरी एनसीपी के नेता अनिल देशमुख गृहमंतरी रहन. उनका पs टरान्सफर पोस्टिंग रैकेट चलावे के आरोप लागल. कुछ दलाल मोटा रकम ले के पुलिस अफसरन के मनचाहा पोस्टिंग दियावत रहन स. ई आरोप महाराष्ट्र के इंटेलिजेंस कमिश्नर रश्मि शुक्ला लगवले रही. एकरा चलते रश्मि शुक्ला के भी महाराष्ट्र छोड़े के पड़ल रहे. एही बीच मुखमंतरी उद्धव ठाकरे कुछ आइपीएस अफसरन के बदली कर देले. ई ट्रांसफर आदेश में पक्षपात के आरोप लागल. चरचा के मोताबिक सुबोध कुमार जायसवाल ई आदेश पs दस्तखत करे से इंकर कर देले रहन. सरकार से पटरी ना बइठल तs ऊ सेंटरल डिपटेशन पs जाये खातिर दरखास दे देले लेकिन उद्धव सरकार के सामने झुकल मंजूर ना कइले.
उद्धव सरकार से पंगा

सुबोध कुमार के ई फैसला से उद्धव सरकार नाखुश हो गइल. सुबोध कुमार महाराष्ट्र कैडर के आइपीएस रहन. ऊ केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पs तब्बे जा सकत रहन जब राज्य सरकार एकरा खातिर मंजूरी दिहत. दोसरा देने चर्चा चले लागल कि सुबोध कुमार के दिल्ली पुलिस कमिश्नर बनावल जाई. इहां तक खबर उड़ गइल कि 29 फरवरी 2020 ऊ दिल्ली पुलिस कमिश्नर बन रहल बाड़े. लेकिन उद्धव सरकार एकरा में अड़ंगा डाल देलस. उ केन्द्र सरकार के लिख के भेज देलस कि अबहीं सुबोध कुमार के केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पs भेजल संभव नइखे. बाद में बिचार कइल जाई. एह तरीका से सुबोध कुमार के दिल्ली पुलिस कमिश्नर बने के संभावना खत्म हो गइल रहे. बाद में महाराष्ट्र सरकार सेंटरल डिपटेशन के प्रस्ताव मान लेलस. एकर बाद दिसम्बर 2020 में उनका के सीआइएसएफ के डीजी बनाव गइल रहे. महाराष्ट्र के पुलिस कमिश्नर बनल कवनो आइपीएस अफसर खातिर सबसे बड़ सपना होला. ई बहुत बड़ा पद रहे. उ चहिते तs 2022 तक जीडीपी रह सकत रहन. लेकिन सुबोध कुमार अपना सिद्धांत के रक्षा खातिर ई पोस्ट के मोह त्याग के सीआइएसएफ के डीजी बनल मंजूर कर लेले.

कड़क आइपीएस अफसर



सुबोध कुमार जायसवाल के जन्म 1962 में धनबाद जिला के झरिया बलौक के चासनाला में भइल रहे. सुबोध कुमार के पिताजी शिवशंकर जायसवाल के चासनाला में परचुन अउर किराना के दोकान रहे. चासनाला, झरिया-सिंदरी रोड पs रहे एह से दोकान खूब चलत रहे. उनका जनम के समय चासनाला बिहार में रहे. एह से उनका के बिहारी कहल जा रहल बा. सुबोध कुमार बचपन से पढ़े में बहुत तेज रहन. ऊ डिगवाडीह के मशहूर पब्लिक स्कूल डिनोबली से 1978 में मैट्रिक पास कइले रहन. एकरा बाद ऊ पढ़े खातिर चंडीगढ़ चल गइले. चंडीगढ़ के डीएवी कौलेज से अंगरेजी औनर्स में बीए कइले. एकरा बाद 1985 में उनकर आइपीएस में सलेक्शन भइल. 2001 में करीब 20 हजार करोड़ के स्टाम्प पेपर घोटला भइल रहे. महाराष्ट्र के बदुल करीम तेलघी एकर मास्टरमाइंड रहे. ई मामला भारत के सबसे बड़ घोटला में से एक रहे.

रिटायर भइला के अगिला दिन DGP गिरफ्तार

2003 में बोम्बे हाईकोर्ट जब एह मामला के जांच खातिर एसआइटी बनवलस तs सुबोध कुमार के ही एकर हेड बनावल गइल. स्टाम्प घोटला के जांच आगा बढ़ल तs एकर आंच मुम्बई के पुलिस कमिश्नर आर एस शर्मा तक ले पहुंच गइल. अपना से बड़ अफसर पs कार्रवाई करे के रहे. लेकिन सुबोध कुमार तनिको परसान ना भइले. एही बीच आर एस शर्मा मुम्बई पुलिस कमिश्नर के पोस्ट से रिटायर हो गइले. रिटायर भइला के अगिला दिन सुबोध कुमार के टीम उनका के गिरफ्तार कर लेलस. एह ममला में महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल के भी जेल जाये के पड़ल रहे. भुजबल एनसीपी के नेता रहन. सुशांत सिंह मौत मामला के भी जांच सीबीआई कर रहल बिया. 14 जून के साल लाग जाई उनकर गुजरला. सुबोध कुमार जायसवाल जइसन कड़क डायरेक्टर के अइला से एह मामला में इंसाफ के उमेद बढ़ गइल बा. (लेखक अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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