Bhojpuri: प्रदर्शनकारीन के पूड़ी-सब्जी खियावय वाला UP क मुख्यमंत्री, पढ़ी पूरी कहानी

जब चंद्रभानु गुप्ता उत्तर प्रदेश क मुख्यमंत्री रहलन. बलिया वाला चंद्रशेखर ओह समय प्रजा सोशलिस्ट पार्टी क नेता रहलन. चंद्रशेखर अउर ओनकर साथी लोग मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्ता के खिलाफ लखनऊ में विरोध प्रदर्शन बोलउले रहलन. शाम के जब चंद्रशेखर सीएम गुप्ता से मिले गइलन तब प्रदर्शनकारी लोग भूख से तड़पत रहे. जानीं आगे के कहानी...

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आज के जमाना में कवनो भी सरकार आपन आलोचना अउर अपने खिलाफ विरोध प्रदर्शन बर्दाश्त नाहीं कइ पावत. मुंह बंद करावय बदे सरकार क लोग तरह-तरह क हथकंडा अपनावयलन. डेरावय-धमकावय से लेइ के मुकदमा में फंसावय तक क तिकड़म रचल जाला. नेतन में धीरज, अउर धरम तनिखौ नाहीं रहि गयल हौ. लेकिन पहिले अइसन नाहीं रहल. विरोध सिद्धांत क रहय, निजी अउर मानवीय संबंध बनल रहय. हलांकि इ स्थिति नेतन के स्वभाव पर भी निर्भर करय. उत्तर प्रदेश क कद्दावर कांग्रेसी नेता चंद्रभानु गुप्ता एही स्वभाव क आदमी रहलन. जे भी मदद बदे पहुंचय, ओकर मदद करय, भले ही उ ओनकर विरोधी काहे न होय.

चंद्रभानु गुप्ता से जुड़ल एक घटना अइसन हौ, जवन आज के राजनीति अउर राजनेतन के गाले पर तमाचा हौ. इ घटना तब क हौ, जब गुप्ता उत्तर प्रदेश क मुख्यमंत्री रहलन. बलिया वाला चंद्रशेखर ओह समय प्रजा सोशलिस्ट पार्टी क नेता रहलन. चंद्रशेखर अउर ओनकर साथी लोग मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्ता के खिलाफ लखनऊ में विरोध प्रदर्शन बोलउले रहलन. विरोध प्रदर्शन में लगभग 10 हजार लोग हिस्सा लेत रहलन. सबेरे से शुरू विरोध प्रदर्शन संझा तक चलल. प्रदर्शनकारी चना-चबैना खाइ के दिन त काटि लेहलन, लेकिन संझा होत सबके पेटे में मूस कोलइया मारय लगल. लेकिन भोजन क कवनो ठेकाना नाहीं रहल.

चंद्रशेखर अपने कुछ साथीन के साथ संझा के मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्ता के इहां गइलन. गुप्ता के पास संदेशा गयल त उ तुरंत मिलय बदे बोलाइ लेहलन. चंद्रभानु गुप्ता मुहफट रहलन, लेकिन दयालु भी. चंद्रशेखर जइसय मुख्यमंत्री के सामने पहुंचलन, चंद्रभानु कहलन - आवा भूखा-नंगा लोग. एतना जने के लेइ के त आइ गइला, अब लखनऊ में सबके भूखा मरबा? चंद्रशेखर कहलन -आपक राज हौ, जइसन चाहय, करय. चंद्रशेखर के एह बाती पर गुप्ता खिसियाइ उठलन. लेकिन फिर कहलन -हम बोलि देहले हई, पूड़ी-सब्जी पहुंचत होई. हम पहिलय समझि गयल रहे कि बोलाइ त लेबा सबके, लेकिन खाए-पीए क इंतजाम न कइ पइबा. चंद्रशेखर अबही मुख्यमंत्री के पास ही रहलन, उधर प्रदर्शनकारीन के पास पूड़ी-सब्जी पहुंचि गयल. दिनभर क भूखायल लोग जमि के पूड़ी-तरकारी भिड़उलन. अपने विरोधी के साथ भी अइसन आचरण भारतीय राजनीति में अपने आप में एक अनोखा उदाहरण हौ.

चंद्रभानु गुप्ता तीन बार उत्तर प्रदेश क मुख्यमंत्री बनलन. लेकिन पांच साल क कार्यकाल एक बार भी पूरा नाहीं कइ पइलन. डॉ. संपूर्णानंद के इस्तीफा देहले के बाद पहिली बार सात दिसंबर, 1960 के गुप्ता मुख्यमंत्री बनलन. ओह समय उ विधायक भी नाहीं रहलन. सन 1957 क चुनाव उ लखनऊ पूर्व सीट से हारि गयल रहलन. राज्यपाल मुख्यमंत्री नियुक्त कइले के बाद ओन्हय विधानपरिषद में मनोनीति कइलन. चंद्रशेखर ओह समय प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के राज्य इकाई क महासचिव रहलन. प्रजा सोशलिस्ट पार्टी 1962 के चुनाव क तइयारी करत रहल अउर माहौल बनावय बदे कांग्रेस सरकार के खिलाफ लखनऊ में विरोध प्रदर्शन बोलावल गयल रहल. चंद्रभानु गुप्ता के ऊपर आरोप रहल कि उ कारोबारीन क जादा ख्याल रखयलन अउर एकरे बदले में ओनसे पइसा अइठयलन. किसान, मजदूर अउर आम आदमी गुप्ता के एजेंडा में नाहीं हयन. चंद्रशेखर विरोध प्रदर्शन क नेतृृत्व करत रहलन. लेकिन 1962 के विधानसभा चुनाव मे प्रजा सोशलिस्ट पार्टी क प्रदर्शन अच्छा नाहीं रहल अउर पार्टी क सीट संख्या 44 से घटि के 38 होइ गइल. चंद्रशेखर भी जनवरी 1965 में कांग्रेसी होइ गइलन. पुरनिया बतावयलन कि चंद्रभानु गुप्ता के ही प्रभाव में आइ के चंद्रशेखर कांगे्रस में शामिल भयल रहलन.
चंद्रभानु गुप्ता के नेतृत्व में कांग्रेस 1962 के चुनाव में जोरदार वापसी कइलस, अउर गुप्ता उत्तर प्रदेश क सबसे ताकतवर नेता बनि गइलन. उ खुद रानीखेत दक्षिण सीट से जीत दर्ज करइलन. मुख्यमंत्री क कुर्सी बरकरार रहल, लेकिन नेहरू के इ नीक नाहीं लगल अउर ओनके इशारे पर के. कामराज प्लान बनउलन, जवने के तहत दुइ अक्टूबर, 1963 के गुप्ता के पद छोड़य के पड़ल. सुचेता कृपालानी मुख्यमंत्री बनलिन. गुप्ता 1967 के चुनाव में फिर रानीखेत से जीतलन अउर दूसरी बार मुख्यमंत्री बनलन. लेकिन एदइयां चैधरी चरण सिंह खेला बिगाड़ि देहलन. गुप्ता के 19 दिन (14 मार्च, 1967 से तीन अप्रैल, 1967) में ही कुर्सी खाली करय के पड़ल. चरण सिंह कांग्रेस छोड़ि के, तोड़ि के मुख्यमंत्री बनि गइलन. लेकिन ओनकर सरकार चलि नाहीं पइलस अउर 26 फरवरी, 1969 के गुप्ता फिर एक दइयां मुख्यमंत्री बनलन अउर 18 फरवरी, 1970 तक पद पर रहलन.

चंद्रभानु गुप्ता क दुश्मन बहुत रहलन. लेकिन ओनके व्यवहार क कायल ओनकर दुश्मन भी रहलन. विरोधी के भी अपने पक्ष में कइ लेना, गुप्ता क बड़ी खासियत रहल. एही खासियत के कारण कांग्रेस में ओनकर दबदबा रहल. ओन्हय कांग्रेस क रणनीतिकार मानल जाय. बतावल जाला कि विधायक पहिले गुप्ता के सामने नतमस्तक होय, फिर नेहरू के आगे. चंद्रभानु गुप्ता के बारे में इ भी कहल जाला कि उ पार्टी बदे पइसा जुटावय क भी काम करय. ओनके ऊपर हमेशा आरोप लगय कि गुप्ता खूब पइसा कमइलन. एक बार एक भोज में उ खुदय मजाक-मजाक में कहय लगलन कि -आप सब इ बात सुनलन कि नाही? गली गली में शोर है, सी.बी. गुप्ता चोर है. लेकिन जब चुद्रभानु गुप्ता क निधन भयल तब ओनके बैंक खाता में खाली 10 हजार रुपिया निकलल.

अलीगढ़ के अतरौली क रहय वाला गुप्ता आजीवन अविवाहित अउर ब्रह्मचारी रहलन. जनम 14 जुलाई, 1902 के भयल रहल अउर 17 साल के उमर में अजादी के आंदोलन में कूदि पड़लन. सीतापुर में रौलेट विधेयक विरोधी प्रदर्शन में हिस्सा लेहलन. कई बार जेल गइलन. लखनऊ विश्वविद्यालय से एम.ए. अउर एलएलबी कइलन, फिर वकालत कइलन. 1929 में उ कांग्रेस पार्टी के लखऊ इकाई क अध्यक्ष चुनल गइलन. गुप्ता वास्तव में एक बेदाग छवि क नेता रहलन. मौजूदा लखनऊ क शिल्पकार चंद्रभानु गुप्ता के ही बतावल जाला. (लेखक सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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