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Bhojpuri Special: अब पुलिसो करे लागल डकैती, किडनैप करके लूट लेलें 30 लाख!

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नया साल के पहिला महीना में एगो गजबे समाचार सुने के मिलल ह. आरोप बा कि बस्ती में तैनात दरोगा आ कुछ सिपाही लोग गोरखपुर कैंट इलाका के रेलवे स्टेशन से महराजगंज के दू गो सोना व्यापारियन के अपहरण क के ओह लोगन से 30 लाख रुपया लुटले रहल ह लोग.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 25, 2021, 2:01 PM IST
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नया साल के पहिला महीना में एगो गजबे समाचार सुने के मिलल ह. आरोप बा कि बस्ती में तैनात दरोगा आ कुछ सिपाही लोग गोरखपुर कैंट इलाका के रेलवे स्टेशन से महराजगंज के दू गो सोना व्यापारियन के अपहरण क के ओह लोगन से 30 लाख रुपया लुटले रहल ह लोग. गोरखपुर पुलिस 24 घंटा का अंदर एह लूट कांड के पर्दाफाश कके दरोगा धर्मेंद्र यादव आ दू जाना सिपाही सहित छह आरोपी के गिरफ्तार क लेले बा लोग. एह पुलिस वालन के पास से लूट के 19 लाख रुपया नगद आ 11 लाख रुपया कीमत के सोना आ चांदी बरामद हो चुकल बा. पुलिस के आरोप बा कि गिरोह के सरगना दरोगा धर्मेंद्र यादव हउवन. आरोपी दरोगा कबूल क लेले बाड़े कि डकैती ऊहे कइले बाड़े. पुलिस कहतिया कि एकरा पहिले दरोगा धर्मेंद्र चार लोगन के साथे कस्टम अफसर बनि के शाहपुर में एगो व्यापारी से चार किलो चांदी लूट चुकल बाड़े. एहू मामला में एगो पुलिसकर्मी आरोपी बा. बाकिर ऊ सिपाही नापाता बा. त बुझाता कि धर्मेंद्र यादव पुलिस में एही से भर्ती भइले कि डकैती डाले के बा.

तब त एहू बात के जांचे के परी कि उनुका के कैरेक्टर सर्टिफिकेट के देले रहे. आ उनुकर भर्ती करेके पहिले के के उनुकरा सिपारिस में रहे. काहें से कि पुलिस में एही तरे त भर्ती होला ना. खूब ठोक- ठेठा के, छानबीन क के भर्ती होला. जदि केहू नेता उनुकर सिफारिश कइले रहले त उनुकरो जांच होखे के चाहीं. ऊ नेता जी के चाल- चरित्र के जांच होखे के चाहीं. जे भर्ती लेले रहे ओह अफसर के जांच होखे के चाहीं. काहें से कि भर्ती करे में जरूर खामी बा. जे रक्षक के रूप में भर्ती होता ऊ भक्षक कइसे बनि गइल? जरूर उनकरा पालन- पोसन में, संग- साथ में खामी बा. ना त देश के एगो प्रतिष्ठित विभाग के दरोगा पद पर बहाल आदमी डकैती कइसे करी?

ओने बस्ती के आईजी राजेश राय कहले बाड़े कि सोना के व्यापारियन से लूट के आरोपी पुरानी बस्ती थाना में तैनात दरोगा सहित 12 पुलिस के सिपाहियन के सस्पेंड/ निलंबित क दिहल गइल बा. लापरवाही बरतला पर इंस्पेक्टर अवधेश राज सिंह सहित नौ जाना अउरी पुलिस वाला लोग सस्पेंड भइल बा. कुल 12 लोग सस्पेंड बा. एह मामला के जांच एसपी करतारे. हमनी का स्वतंत्रता दिवस मनावतानी जा. आ डकैती क के दरोगा जी आपन स्वतंत्रता मनावतारे. उनुका भीतर अपना पद आ विभाग के कौनो गरिमा, कौनो प्रतिष्ठा नइखे. ऊ दरोगा के नांव पर कलंक बाड़े. देश आ समाज खातिर कलंक बाड़े. त एही से कहतानी कि एह कलंक के के भर्ती कइले रहल ह आ के सिपारिस लगवले रहल ह एकरो जांच होखे के चाहीं. हो सकेला ई दरोगा जी ना पकड़इते त कौनो सेंसिटिव विभाग- जइसे सीआईडी/खुफिया विभाग वगैरह में तैनात हो जइते द देश के महत्वपूर्ण दस्तावेज के संगे ऊ का करिते, भगवाने जानतारे. आईं एक नजर पुलिस अधिनियम पर डालल जाउ.



समाज के अपराध मुक्त आ बेखौफ बनावे के मकसद से अंग्रेज सन 1861 में पुलिस कानून (अधिनियम) बनाके देश में लागू कइले सन. ई कानून ओह घरी के देश, काल आ परिस्थितियन के ध्यान में रखिके बनावल गइल रहे. एकरा में दमनात्मक कार्रवाई के प्रावधान भी बा. आजादी के 74 साल बाद भी एही कानून से काम चलावल जा रहल बा. पुलिस तंत्र में विसंगति के दुरुस्त करे के कोशिश जरूर भइल बाकिर “जनता के पुलिस” बने के जगह “शासक के पुलिस” हो गइल. तमाम कमेटियन आ आयोगन के सिपारिस धूरि फांकतारी सन. अंग्रेज त एह अधिनियम के एहू से बनवले सन कि ब्रिटिश राज के कौनो विरोध होई त ओकरा के दबावे खातिर पुलिस के इस्तेमाल कइल जाई. आईं देखल जाउ कि एह पुलिस अधिनियम के बदले खातिर कतना मांग उठि चुकल बा. ई कुल मांग के समय कांग्रेस सरकार केंद्र में सत्ता में रहे. पुलिस कानून में जतना सुधार के सुझाव आवे कांग्रेस सरकार ठंडा बस्ता में डाल देउ. आरोप बा कि कांग्रेस सरकार कटिबद्ध रहे कि पुलिस कानून ना बदली. अंग्रेजन के जमाना के कानून एही से आजुओ जारी बा. आईं तथ्य देखल जाउ-
भारतीय पुलिस आयोग
1902-03 में ई आयोग आपन रिपोर्ट जमा कइलसि. एमें पुलिस आयोग पुलिस तंत्र के असफल घोषित क दिहलसि. अपना सिफारिश में आयोग कहलसि कि पुलिस अधिनियम में आमूलचूल सुधार तुरंत जरूरी बा.

राष्ट्रीय पुलिस आयोग (1977-1981)

आपातकाल के दौरान पुलिस महकमा के विसंगति खुलिके सामने आइल. एकरा बाद तत्कालीन केंद्र सरकार एह तंत्र में सुधार करे खातिर 1977 में राष्ट्रीय पुलिस आयोग के गठन कइलसि. ई आयोग पुलिस संगठन, दायित्व, कार्यशैली, जनता से संबंध, राजनीतिक हस्तक्षेप, पुलिस शक्ति के दुरुपयोग आ विभाग के जवाबदेही आ प्रदर्शन के मूल्यांकन सहित व्यापक संदर्भ में अध्ययन कइलस. सन 1979 से 1981 के बीच आयोग आठ गो रिपोर्ट पेश कइलस. कुल रिपोर्टन में पुलिस तंत्र में सुधार संबंधी सिपारिस रहे.

पद्मनाभैया कमेटी (2000)

जनवरी 2000 में केंद्र सरकार पुलिस सुधार खातिर पद्मनाभैया कमेटी के गठन कइलस. ई कमेटी अगस्त, 2000 में आपन रिपोर्ट दिहलसि. एमें अगिला सहस्राब्दी में पुलिस के सामने चुनौतियन के आकलन सहित एगो अइसन जन मित्रवत पुलिस के संकल्पना पेश करेके रहे जौन उग्रवाद, आतंकवाद आ संगठित अपराधन से निपटे में सक्षम होखे. अइसन रास्ता सुझावे के रहे जौना से पुलिस के एगो प्रोफेशनल आ सक्षम फोर्स बनावल जा सके आ राजनीतिक हस्तक्षेप पर विराम लागे. इहो कमेटी कई गो सुझाव दिहलसि. बाकिर सुझाव का रहे, ओपर कतना अमल भइल ई केहू जानते नइखे.

पुलिस एक्ट ड्राफ्टिंग कमेटी(2005-2006)

सन 2005 में सोली सोराबजी के अध्यक्षता में पुलिस एक्ट ड्राफ्टिंग कमेटी के गठन भइल. सितंबर, 2005 में कमेटी बैठक शुरू कइलस आ अक्टूबर 2006 में केंद्र के पास एगो मॉडल पुलिस कानून बनाके पेश कइल गइल. एकरा कार्यदायित्वन में पुलिस के बदलत भूमिका आ जिम्मेदारियन के आलोक में नया कानून बनावल रहे.

प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार (2006-07)
सन 1996 में उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह, सुप्रीम कोर्ट में एगो जनहित याचिका दायर कइल. उनुकर मांग रहे कि केंद्र आ राज्य सरकारन के पुलिस के खराब गुणवत्ता आ प्रदर्शन में सुधार करे खातिर सुप्रीम कोर्ट निर्देश देउ. करीब एक दशक तक लटकल एह मसला पर सुप्रीम कोर्ट 2006 में केंद्र आ राज्यन के सात गो दिशानिर्देश दिहलसि. ई सबका खातिर बाध्यकारी रहे. सन 2006 के अंत तक एह संबंध में कौन कदम उठावल गइल बा एकरा बारे में सुप्रीम कोर्ट के सब पक्ष ( केंद्र आ राज्यन के) के अवगत करावे के रहे. ज्यादातर राज्य कोर्ट से अउरी अधिक समय मंगले सन. कुछ राज्य कहले सन कि एह फैसला के समीक्षा होखे के चाहीं. अदालत अपने फैसला के समीक्षा कइला से इंकार क दिहलसि आ मार्च 2007 तक एह दिशानिर्देशन के अनुपालन के आदेश दे दिहलसि.

का रहे सुप्रीमकोर्ट के आदेश
1- स्टेट सिक्योरिटी कमीशन बने
2- डीजीपी के दू साल के कार्यकाल होखो
3- आइजी पुलिस आ अन्य अधिकारियन के दू बरिस के निश्चित कार्यकाल होखे
4- जांच कार्य में लागल पुलिस के कानून व्यवस्था के काम से अलग कइल जाउ
5- पुलिस एस्टैब्लिशमेंट बोर्ड बने
6- पुलिस कंप्लेंट अथारिटी के गठन होखे
7- नेशनल सिक्योरिटी कमीशन के गठन कइल जाउ. एह आदेशन पर सरकारन के 31 दिसंबर 2006 तक अमल करे के रहे.

आरोप बा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशन के सब राज्य अवहेलना कइले सन. आ केंद्र के कांग्रेस सरकार भी आंख मूंद लिहलसि. कई राज्यन में त कांग्रेसे के सरकार रहे. तब से ई मामला फेर ना उठल. अब एगो दरोगा डकैती में पकड़ाइल बा आ सस्पेंड हो गइल बा त फेर पुलिस एक्ट के तरफ देखे के मौका सामने आइल बा. कांग्रेस पार्टी के सरकार सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसला पर आंखि मूंदि लिहलसि. सबसे पहिले त कांग्रेस के केंद्र सरकार के गृह मंत्री के एकरा के गंभीरता से लेबे के चाहत रहे. आजु दरोगा आ पुलिस डकैती करतारे सन त एकरा प्रति सतर्क होखे के परी. कानून बदले के परी. अइसना चोरकट आ डकैत दरोगा आ पुलिस वालन के सस्पेंड ना बर्खास्त कइके ओकर मये संपत्ति कुर्क क देबे के चाहीं. ताकि देश का सामने एगो उदाहरण पेश होखे. आ फेर कौनो दरोगा भा पुलिस भा कौनो अफसर चोरी- डकैती नियर घृणित कृत्य ना करे, अपना पद आ विभाग के गरिमा माटी में ना मिलावे.
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