Home /News /bhojpuri-news /

Bhojpuri: उथल-पुथल वाली रहल वी.पी. सिंह क राजनीति, पुण्यतिथि पर पढ़ीं मिस्टर क्लीन क कहानी

Bhojpuri: उथल-पुथल वाली रहल वी.पी. सिंह क राजनीति, पुण्यतिथि पर पढ़ीं मिस्टर क्लीन क कहानी

.

.

राजनीति अउर विवाद दूनों क चोली-दामन क रिश्ता कहल जाला. लेकिन असली राजनेता ओही के मानल जाला, जे विवाद से पार पाइ के पार होइ जाय. जे फंसि गयल, अटकि गयल त समझि ल उ राजनीति के मैदान क कच्चा खेलाड़ी हौ.

देश में कच्चा अउर पक्का दूनों तरह क खेलाड़ी भयल बायन, लेकिन विश्वनाथ प्रताप सिंह एक अइसन खेलाड़ी रहलन, जवन पक्का होइ के भी कच्चा रहल, अउर कच्चा होइ के भी पक्का रहल. कहय क मतलब पूरा राजनीतिक जीवन उथल-पुथल से भरल. जवने रस्ता गइलन, हर जगह रोड़ा नाहीं चट्टान पड़ल मिलल. फिर भी उ आगे बढ़त गइलन. अंतिम मंजिल तक पहुंचलन, इ अलग बात हौ कि जादा समय उहां रहि नाहीं पइलन.

वी.पी. सिंह 1969 में कांग्रेस के टिकट से विधानसभा क चुनाव जीति के राजनीति में कदम रखले रहलन. लेकिन ओनकरे राजनीतिक जीवन क असली शुरुआत 1980 से मानल जाला, जब लोकसभा क चुनाव जीतले के बावजूद इंदिरा गांधी ओन्हय उत्तर प्रदेश क मुख्यमंत्री बनाइ देहलिन, जवने के नाते ओन्हय लोकसभा के सदस्यता से इस्तीफा देवय के पड़ल. सन 1980 के चुनाव में कांग्रेस जोरदार तरीके से उत्तर प्रदेश के सत्ता में वापसी कइले रहल. ओह समय उत्तर प्रदेश क बीहड़ डकइतन के आतंक से थर्रात रहल. वी.पी. सिंह चुनाव में इ मुद्दा जोरदार तरीके से उठइले रहलन अउर डकइतन क सफाया करय क वादा कइले रहलन. कांग्रेस के 309 सीट जीतलस. वी.पी. मुख्यमंत्री बनले के बाद डकइतन के खिलाफ जोरदार कार्रवाई शुरू कइलन. लेकिन एही दौरान 14 फरवरी, 1981 के बेहमई कांड होइ गयल. फूलन देवी क गिरोह दिनदहाड़े गांव पर हमला कइलस अउर 26 जने के गोली से छलनी कइ देहलस, 20 लोगन क मउत होइ गइल. घटना से पूरा देश हिलि उठल रहल. वी.पी. निर्देश पर पुलिस तीन महीना के भीतर 11 डकइतन के मारि गिरइलस. लेकिन तबतक डाकू लोग मुख्यमंत्री क न्यायाधीश भाई क हत्या कइ देहलन. इ घटना वी.पी. सिंह के गाल पर तमाचा रहल, तमाचा एतना तेज कि उ 28 जून, 1082 के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देइ देहलन. बतावल जाला कि जब पुलिस फूलन गिरोह क सफाया करत रहिल तब भी वी.पी. फूलन क एनकाउंटर न करय क सख्त निर्देश देहले रहलन. एह निर्णय से ओनकर बहुत किरकिरी भइल रहल, भले दलितन क वोट ओनके पक्ष में होइ गयल.

इंदिरा गांधी एकरे बाद वी.पी. के राज्यसभा क सदस्य बनउलिन अउर 1983 में केंद्र में वाणिज्य मंत्री बनाइ देहलिन. मुख्यमंत्री बनय से पहिले भी उ 1976-77 के दौरान वाणिज्य मंत्री रहलन. एही बीच 1984 में इंदिरा गांधी क हत्या होइ गइल अउर राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनलन. राजीव वी.पी. 31 दिसंबर, 1984 के आपन वित्तमंत्री बनउलन. लेकिन वित्तमंत्री बनले के बाद उ अइसन डंडा चलावय लगलन कि कर चोरन में खलबली मचि गइल. इहां तक कि धीरूभाई अंबानी अउर अमिताभ बच्चन के इहां आयकर क छापा मरवाइ देहलन. नतीजा इ भयल कि राजीव ओन्हय वित्तमंत्री पद से हटाइ के 24 जनवरी, 1987 के रक्षामंत्री बनाइ देहलन. इहां भी उ आपन हथियार नाहीं डललन. वी.पी. अब रक्षा विभाग क कुल फाइल छानय लगलन. ओनकर नजर रक्षा खरीद में होवय वाली गड़बड़ी पर रहल. कुछय दिना में खबर आइल कि वी.पी. बोफोर्स तोप सउदा के बारे में भी जानकारी मंगाइ लेहले हयन. बोफोर्स तोप क सउदा तब भयल रहल, जब रक्षा विभाग राजीव के पास रहल. इ खबर सीधे तौर पर राजीव के खिलाफ जात रहल. वी.पी. एह मामले में आगे बढतऩ तबतक ओन्हय रक्षामंत्री पद से हटाइ देहल गयल. इहां ओन्हय तीन महीना भी नाहीं बीतल रहल, अउर वी.पी. क छवि मिस्टर क्लीन क बनि गयल रहल. उ कांग्रेस से इस्तीफा देइ देहलन अउर लोकसभा क सदस्यता भी छोड़ि देहलन. आपन नई पार्टी जनता दल (1988) क गठन गइलन अउर 1989 के चुनाव में कांग्रेस के सत्ता से बेदखल कइ देहलन. केंद्र में राष्ट्रीय मोर्चा क तीन टांग वाली सरकार बनल. वी.पी. सिंह परधानमंत्री बनलन. कम्युनिस्ट पार्टी अउर भाजपा बहरे से सरकार के समर्थन देत रहलिन. एही दौरान राम मंदिर क मुद्दा जोर पकड़त रहल अउर लालकृष्ण आडवाणी रथ लेइके निकलल रहलन. वी.पी. बिहार में ओनकर रथ रोकवाइ के ओन्हय गिरफ्तार कराइ देहलन. ओह समय लालू प्रसाद बिहार क मुख्यमंत्री रहलन. भाजपा सरकार से समर्थन वापस लेइ लेहलस, वी.पी. बहुमत साबित नाहीं कइ पइलन अउर 343 दिना परधानमंत्री रहले के बाद सात नवंबर, 1990 के कुर्सी छोडय के पड़ल.

सिंह क परधानमंत्री क इ छोट क कार्यकाल भी बड़ा उठापटक वाला रहल. परधानमंत्री बनतय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के बिटिया रुबइया क अपहरण होइ गयल. रुबइया के छोड़ावय में आतंकवादिन के छोड़य के पड़ल. एह घटना के लेइ के वी.पी. क बहुतय किरकिरी भइल. किरकिरी पर मट्टी नावय बदे उ एससी-एसटी कानून 1989 लागू कइलन, जवने के लेइके भी पूरे देश में प्रतिक्रिया भइल. ऊंची जाति क लोग नराज होइ गइलन. इ मामला अबहीं ठंढायल नाहीं रहल कि मंडल आयोग क सिफारिश लागू कइ देहलन. सरकारी नौकरी में अन्य पिछड़ा वर्ग बदे आरक्षण लागू होइ गयल. एह घटना के लेइ के खासतौर से उत्तर भारत में जबरदस्त बवाल मचल, अउर महीनन तक आगजनी, आंदोल अउर बंद क आयोजन होत रहल. कई नौजवान आरक्षण के खिलाफ आग लगाइ के आत्मदाह कइ लेहलन. मामला सुप्रीम कोर्ट में गयल, लेकिन कोर्ट भी 2008 में ओबीसी आरक्षण के पक्ष में फैसला देहलस.

सन् 1991 के चुनाव में वी.पी. फिर से राष्ट्रीय मोर्चा के तरफ से परधानमंत्री क उम्मीदवार बनलन, लेकिन सफलता नाहीं मिलल. ओही चुनाव में प्रचार के दौरान राजीव गांधी क तमिलनाडु के श्रीपेरम्बदूर में हत्या होइ गइल, अउर हवा कांग्रेस के ओरी घूमि गइल.

कहय क मतलब वी.पी. जहां-जहां गइलन हर जगह कुछ न कुछ कांड भयल. अब एहके संजोग कहा चाहे दूसर कुछ कि मुख्यमंत्री बनतय बेहमई कांड होइ गयल, भाई क हत्या होइ गइल, अउर मुख्यमंत्री क कुर्सी छोड़य के पड़ल. केंद्र सरकार में वापस लउटलन त परधानमंत्री इंदिरा गांधी क हत्या होइ गइल. फिर वित्तमंत्री बनलन त उहां भी अइसन-अइसन कांड कइलन कि कुर्सी से हाथ धोवय के पड़ल. रक्षामंत्री बनलन त बोफोर्स क गोला दागय लगलन. कुर्सी, पार्टी, सांसदी कुल चलि गयल. हलांकि बोफोर्स क गोला ही ओन्हय परधानमंत्री के कुर्सी तक पहंुचइलस. लेकिन तीन टांगे क कुर्सी सालभर भी साथे नाहीं रहल.

कुछ लोग राजीव गांधी के हत्या के पीछे भी वी.पी. के जिम्मेदार ठहरावयलन. परधानमंत्री बनले के तीन महीना बाद वी.पी. राजीव गांधी क एसपीजी सुरक्षा वापस लेइ लेहले रहलन. लोगन क कहना हौ कि अगर राजीव क सुरक्षा न हटावल गइल होत त उ आज जिंदा होतन. एसपीजी क गठन इंदिरा गांधी के हत्या के बाद 1985 में भयल रहल, सन् 1988 में एकर कानून संसद में पास भयल. कानून में पूर्व परधानमंत्रिन के एसपीजी सुरक्षा क विधान नाहीं रहल. एही अधार पर राजीव क सुरक्षा हटावल गइल रहल, लेकिन इ करत समय सुरक्षा खतरा क समीक्षा नाहीं कइ गइल.

सन् 1991 में सत्ता से बहरे भइले के बाद वी.पी. 2006 क चुनाव नाहीं लड़लन अउर सक्रिय राजनीति से भी संन्यास लेइ लेहलन. लेकिन सार्वजनिक जीवन में बनल रहलन. सन् 1998 में ओन्हय कैंसर क पता चलल, अउर 10 साल के संघर्ष बाद 27 नवंबर, 2008 के 77 साल के उमर में ओनकर निधन होइ गयल. सिंह क जनम 25 जून, 1931 के उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद के पास मांडा रियासत में भयल रहल.

(सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर