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Bhojpuri: झोपड़पट्टी के ओह चांद के खूबसूरती में अंटक जाव हीरो लोग के प्राण जेकर नाम रहे मधुबाला

मधुबाला के जन्म दिल्ली में पश्तुन परिवार में भइल रहे. उ लोग झोपड़पट्टी में रहत रहे आ उनके बाबूजी अताउल्लाह खान एगो तंबाकू कंपनी में नोकरी करस. अपना गुस्सैल मिजाज के चलते जब नोकरी से निकाल दिहल गइलें त मधुबाला के मुड़ी पर परिवार के जिम्मा आ गइल. उ 7 साल के उमिर तब आकाशवाणी में लइकन के प्रोग्राम में गावे लगली.

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मुमताज़ जहां बेगम देहलवी उर्फ मधुबाला भारतीय सिनेमा के बेहद खूबसूरत अउरी आकर्षक अभिनेत्री के रूप में जानल जाली. उनके दिलकश अदा अउरी शानदार अदाकारी के ओह बेरा दर्शक त का फिल्म अभिनेता लोग भी दीवाना रहे. ओह बेरा के टॉप हीरो लोग मधुबाला के साथे फिल्म करे के ख्वाब देखो लोग आ जेके मौका मिल जाव, ओकर मधुबाला पर ध्याने अटक जाव, संवादे भुला जाव, चेहरा के हाव-भाव बदल जाव. अपना हैंडसम लुक अउरी अद्भुत डांस स्टेप खातिर जानल जाये वाला शम्मी कपूर एगो इंटरव्यू में कहले रहलें कि हम ‘रेल का डिब्बा’ के शूटिंग करत रहनी, जब हम मधुबाला से मिलनी, उनका के देखनी त फेर देखते रहि गइनी. जइसे हमरा पर बिजली गिर गइल होखो. हालांकि हमरा में कॉन्फिडेंस बहुत रहे बाकिर हम बहुत नर्वस रहनी आ बार-बार लाइन भुला जाईं. ई बात मधुबाला के पता भी चल गइल रहे आ उ मने मने अपना जादूई आभा पर मुस्कुरास.

मधुबाला के जन्म दिल्ली में पश्तुन परिवार में भइल रहे. उ लोग झोपड़पट्टी में रहत रहे आ उनके बाबूजी अताउल्लाह खान एगो तंबाकू कंपनी में नोकरी करस. अपना गुस्सैल मिजाज के चलते जब नोकरी से निकाल दिहल गइलें त मधुबाला के मुड़ी पर परिवार के जिम्मा आ गइल. उ 7 साल के उमिर तब आकाशवाणी में लइकन के प्रोग्राम में गावे लगली. उहें मधुबाला पर बॉम्बे टॉकीज के मैनेजर राय बहादुर चुन्नीलाल के नजर पड़ल आ उ उनका बाबू जी से फिल्म में काम करे खातिर मधुबाला के ऑफर देहलें. मधुबाला बचपने से अभिनेत्री बने के चाहत रहली. उनके परिवार बंबई आ गइल आ इहाँ फिल्म बसंत (1942) में 9 साल के उमिर में काम कइली. एकरा फिल्म के बाद उनका कवनो काम ना मिलल त मधुबाला के परिवार सहित वापस दिल्ली लौटे के पड़ल. 1944 में बॉम्बे टॉकीज के मालकिन अउरी हिरोइन देविका रानी ज्वार भाटा फिल्म में एगो चाइल्ड आर्टिस्ट के रोल खातिर मधुबाला के दिल्ली से बोलवली. बाकिर उ रोल कट गइल. इहे फिल्म रहे जवना से दिलीप कुमार डैब्यू कइलें. मधुबाला के परिवार बंबईये में रहे के सोच लिहल. एकरा बाद मधुबाला के बाद के साल में छोट मोट रोल मिलत रहल.

1947 में मधुबाला के फिल्म ‘नील कमल’ में मुख्य हिरोइन कमला चटर्जी के किशोरावस्था के रोल मिलल. बाकिर कमला के असामयिक मौत के बाद एकर डायरेक्टर केदार शर्मा 14 साल के मधुबाला के हिरोइन के रोल में कास्ट कर लेहलें. हालांकि एकर लोग विरोध भी कइल बाकिर डायरेक्टर शर्मा के मधुबाला के लगन पर भरोसा रहे आ उनके अपना फिल्म के नुकसान के भरपाई भी करे के रहे. फिल्म में राजकपूर हीरो रहलें. फिल्म बनल आ तारीफ के साथे खूब रुपिया बटोरलस. एह तरे मधुबाला के मुख्य भूमिका में बड़हन ब्रेक मिल गइल. ओकरा बाद उनके लाल दुपट्टा फिल्म आइल जवन मधुबाला के स्टार बना देहलस. फेर 1949 में अशोक कुमार के साथे उनके महल फिल्म आइल. ई फिल्म हॉरर रहे अउरी मधुबाला एगो नवयुवती के आत्मा के रोल में रहली. ई फिल्म मधुबाला के करियर में बहुत बड़ बदलाव लेके आइल आ उ रातों रात सुपरस्टार बन गइली. फेर त मधुबाला हर डायरेक्टर प्रोड्यूसर के पसंदीदा बन गइली.

दिलीप कुमार से दूर भइला के बाद टूट गइली मधुबाला
उ सबके नजर में पहिलही से रहली बाकिर उनका के लेके मीडिया गॉसिप तब ज्यादा बढ़ल जब उ हीरो प्रेम नाथ के डेट करे लागली. दुनू जाना बादल (1951) में मिलल लोग. ओकरा बाद ई जोड़ी ‘आराम’ अउरी ‘साक़ी’ फिल्म कइलस. दुनू जाना गहिरा प्यार में पड़ल रहे लोग, दुनू जाना बिआह भी कइल चाहत रहे लोग बाकिर ई रिश्ता मात्र 6 महीना ही चल पावल. कारण रहे कि नाथ उनके धर्म परिवर्तन करे के कहलें ताकि बिआह हो सके. मधुबाला मना कर दिहली. एह में उनके पिता के भी प्रभाव रहे. साल 1951 में ही तराना फिल्म के सेट पर मधुबाला के मुलाकात दिलीप कुमार से भइल. जब फिल्म हिट भइल त लोग के ई जोड़ी एतना पसंद आइल कि क्रिटिक इहाँ तक कह देलें कि जइसे स्वर्ग में जोड़ी बनेला ओसहीं ई जोड़ी बा. मधुबाला प्रेम नाथ से दूर हो गइली आ दिलीप कुमार के नजदीक आ गइली. हालांकि मधुबाला के पिता के दिलीप कुमार पसंद ना रहलें. ई जोड़ी फिल्म अमर, संगदिल अउरी ऐतिहासिक फिल्म मुग़ले आजम साथ में कइलस. दुनू जाना के प्यार के रिश्ता लगभग 8 साल ले चलल. उनका साथे अपना प्रेम संबंध के बारे में दिलीप कुमार अपना बायोग्राफी में लिखबो कइलें कि मधुबाला अइसन रहली जेकरा में हमरा अंदर के खालीपन के भरे के काबिलियत रहे जवन अउरी केहू से ना भरा पाइत.

दुनू जाना के बारे में तब अखबार में, पत्रिका में खूब गॉसिप छपे. दुनू जाना गहिरा प्यार में रहे लोग. एह लोग के रिश्ता में खटास तब आवे लागल जब मधुबाला के पिता अताउल्लाह खान मधुबाला फिल्म प्राइवेट लिमिटेड के बैनर से एगो फिल्म में दिलीप आ मधुबाला के जोड़ी के काम करे के कहलें. उ ई शर्त दुनू जाना के बिआह के बदले रखलें. दिलीप कुमार के ई मंजूर ना रहे. ई बात दिलीप कुमार ही बाद में बतवलें. दुनू जाना में स्वाभिमान के भी लड़ाई रहे. 1956 में मधुबाला अउरी दिलीप कुमार नया दौर के शूटिंग शुरू कइल लोग. फिल्म के 15 दिन के शूटिंग हो गइल रहे आ मधुबाला एड्वान्स भी ले लेहले रहली. फिल्म के निर्माता बीआर चोपड़ा ग्वालियर में 40 दिन के शूटिंग शेड्यूल रखलें. मधुबाला के पिता अपना बेटी के सुरक्षा कारण के वजह से बंबई के स्टूडियो में शूटिंग रखे के कहलें. चोपड़ा तैयार ना भइलें आ एही जा विवाद हो गइल. 9 महिना ले कोर्ट में केस चलल आ अंतिम में कोर्ट फैसला सुनवलस कि चोपड़ा वैजयंतीमाला के लेके फिल्म बना लेस. ओही बेरा कोर्ट में सुनवाई के बेरा दिलीप कुमार बी आर चोपड़ा के ओर से मधुबाला के खिलाफ गवाही देहलें आ इहवें से दुनू जाना के बीच खतम होत रिश्ता एकदम समाप्त हो गइल.

हालांकि फिल्म मुग़ले आजम के कई साल ले चलल शूटिंग अभियो चलत रहे. दिलीप आ मधुबाला एक दूसरा से बोले लोग ना बाकिर कई गो रोमांटिक सीन साथ में फिल्मावल लोग, जवना में सलीम अनारकली के चुंबन दृश्य भी बा. ई रहे दुनू जाना के प्रोफेशनल व्यवहार. हालांकि मधुबाला दिलीप से दूर भइला के बाद बुरा तरीका से टूट गइली. कोर्ट केस के चलते उनके इमेज भी बहुत बर्बाद भइल. देवानंद एगो इंटरव्यू में कहले कि ‘मधुबाला के चेहरे पर सुंदरता तो वैसे ही थी लेकिन उसकी सजीवता और हंसी गायब हो गई थी. मधुबाला अंदर से बहुत टूट गइल रहली. इहे कारण रहे कि जब उ मस्तमौला किशोर कुमार से मिलली त उनके हँसे-हँसावे के अंदाज के कारण उनके ओर खींचत चल गइली. दुनू जाना फेर बाद में घर-परिवार के मर्जी के खिलाफ जाके शादी कर लिहल लोग.

किशोर कुमार के मधुबाला के खराब हालत के पता चलल आ उ उनकर ख्याल रखे लगलें. मधुबाला के दिल में छेद रहे आ उनके कई बार फिल्म शूटिंग के दौरान नाक आ मुँह से खून बाहर आइल रहे. मधुबाला के खराब तबीयत उनके तुनक मिजाज बना देहलस आ फेर दुनू दंपति में झगड़ा रहे लागल. बाद में मधुबाला किशोर कुमार के फ्लैट छोड़ के आपन खरीदल बंगला पर आ गइली आ इहवें आपन अंतिम सांस लेहली. जीवन भर स्क्रीन पर प्यार के मूर्ति बनल रहल मधुबाला के जीवन में कबो उनके पूरा प्यार ना मिलल. मधुबाला 1969 में मात्र 36 साल के उमिर में एह दुनिया के अलविदा कह देहली. बाकिर अतने उमिर में उ 60 गो फिल्म कइली आ आजो हिन्दी सिनेमा के ‘स्क्रीन के देवी’ के रूप में जानल जाली.

फ़िल्मी मधुबाला के वास्तविक जिंदगी खुद में, मुहब्बत समेत जीवन के तमाम रंग के समझे-समझावे वाला एगो मुकम्मल फिल्म बा.

( मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य व सिनेमा के जानकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं. )

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