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Bhojpuri Spl: मिलीं भोजपुरी फिलिम के एंटी हीरोज से, कबो विजय खरे कहात रहन अमरीश पुरी!

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भोजपुरी फिल्म (Bhojpuri Cinema) में एक से बढ़कर एक एंटी हीरोज (Anti Heroes of Bhojpuri) बाड़न, जे अपना दमदार एक्टिंग से खलनायकी के मिसाल कायम करेलन जा. विजय खरे (Vijay Khare) के उनकर नेचुरल एक्टिंग के कारण भोजपुरी फिलिम के अमरीश पुरी (Amrish Puri) कहल जात रहे.

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एंटी हीरोज यानी कि खलनायक (Villain of Bhojpuri Movies) मजबूत होई तबे हीरो यानी कि नायक उभर के आई. विलेन के विलेनबाजी बढ़िया होई त हीरो के हीरोबाजी पर्दा पर लउकी. साँच पूछीं त तबे हीरो के संघर्ष पता चली. रामायण (Ramayan) आ महाभारत (Mahabharat) उठा के देख लीं. राम ले बड़ हीरो के बा. पांडव के कहानी में एतना दिलचस्पी काहे भइल ? काहे कि कौरव लोग बराबर के टक्कर देले रहे.

सफ़ेद रेखा करिये ब्लैकबोर्ड पर देखाई देला. आईं भोजपुरी सिनेमा के ब्लैकबोर्ड पर बैडमैन के किरदार करे वाला कलाकार लोग पर तनी बात कइल जाय. अरे भाई सिनेमा खाली हीरो आ हिरोइन से थोड़े बनेला. भोजपुरी में जेने देखीं तेने खाली हीरो के बात होई भा स्विमिंग पूल से नहा के निकलत हिरोइन के. कॉमेडियन लोग पर बात कर चुकल बानी. अब भोजपुरी सिनेमा के 60 साल के सफर के खलनायक लोग पर बात कर रहल बानी.

पुरनका दौर के खलनायक (1962- 2000 )
रामायण तिवारी, कुंदन, हरी शुक्ला, कन्हैया लाल, राम सिंह, ब्रजकिशोर, विजय खरे, गिरीश शर्मा आ उदय श्रीवास्तव आ महिला खलनायकन में लीला मिश्रा, शुभा खोटे आदि.

नयका दौर के खलनायक (2000-2021)
सुशील सिंह, अवधेश मिश्रा, संजय पाण्डेय, अनूप अरोड़ा, मनोज टाइगर, विपिन सिंह, आयाज़ खान, समर्थ चतुर्वेदी, देव सिंह, उमेश सिंह, विष्णु शंकर बेलू , बालेश्वर सिंह, राज प्रेमी, प्रेम दुबे, करण पाण्डेय, अमित शुक्ला आ महिला विलेन में नीलिमा सिंह आदि.

बात अगर पुरनका दौर के विलेन के कइल जाव त पहिलके भोजपुरी फिल्म 1962 के ‘गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ईबो’ के विलेन रहलन रामायण तिवारी जे बाद में कई गो बड़ भोजपुरी फिलिम प्रोड्यूस भी कइलें. दूसर फिलिम ‘लागी नाही छूटे राम’ में भी रामायण तिवारी ही खलनायक रहलन. उनका बाद कुंदन अइलें जे बिदेसिया, बलम परदेसिया जइसन फिलिम कइलें. हरी शुक्ला आपन पहिल फिलिम ‘गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ईबो’ में कॉमेडी रोल कइलें रहलें. बाद में उ कॉमेडियन के साथे साथ विलेन भी बने लगलें. उनकरे जइसन कन्हैया लाल भी शुरुआती फिल्मन में कबो कॉमेडियन त कबो मुनीम या कवनों खलपात्र करत रहलें. राम सिंह खलनायकी में आपन एगो अलगे पहचान बनवलें, उ सुजीत कुमार के दूगो हिट फिलिम ‘दंगल’ अउर ‘माई के लाल’ में दमदार खलनायक के रोल निभा के दर्शकन पर आपन असर छोड़लें. बाद में उ कइगो सफल फिल्मन में खलनायकी कइलें. ब्रजकिशोर के पुरान भोजपुरी फिल्मन में खलपात्र निभावत देखल जा सकेला. उ कुणाल सिंह के कई गो फिल्मन में नकारात्मक भूमिका निभवले बाड़े.

विजय खरे पुरान भोजपुरी फिल्मन के बड़ विलेन में पहला पंक्ति में आवेलें. उ आपन करियर के शुरुआत साल 1983 के हिट फिलिम ‘गंगा किनारे मोरा गाँव से’ कइलें. पुरान दौर के खलनायकन में गिरीश शर्मा आ उदय श्रीवास्तव के काम भी उल्लेखनीय बा. महिला खलनायकन में भी स्थिति जन्य किरदार ही बनत रहल. तब लीला मिश्रा, शुभा खोटे आदि कलाकार भोजपुरी मे बतौर खलनायिका काम करत रहली, जे हिंदी फिल्म में भी काफी सक्रिय रहली. तब आज के जइसन भोजपुरी एगो अलग इंडस्ट्री के रूप में व्यवस्थित ना भइल रहे, कलाकार से लेके टेक्नीशियन तक हिंदी, मराठी अउर साउथ के फिल्मन से ही आवत रहले. शुभा खोटे के कुछ बड़ भोजपुरी फिलिम में सुजीत कुमार के ‘दंगल’ अउर भारत कपूर के ‘गंगा के तीरे तीरे’ बा. उनकरा पर ‘दंगल’ में फिल्मावल गइल एगो गाना काफी मशहूर बा.

भोजपुरी सिनेमा के अमरीश पुरी कहास विजय खरे
विजय खरे पुरान भोजपुरी फिल्मन के बड़ विलेन में पहला पंक्ति में आवेलें. उ आपन करियर के शुरुआत साल 1983 के हिट फिलिम ‘गंगा किनारे मोरा गाँव से’ कइलें. फिलिम के हीरो कुणाल सिंह रहलें अउर हीरोइन गौरी खुराना. ओह फिलिम के याद करत विजय खरे हमरा से बातचीत में बतवलन कि एगो रेप सीन फिल्मावत समय हम एतना भावुक हो गइल रहनी कि डायरेक्टर के कट भी नाही सुन पवनी, हालाँकि उहां सब लोग प्रोफेशनल होत रहले. तब दर्शक अइसन दृश्य में खलनायक के क्रूरता के दृश्य देखके जी भरके गाली देके कोसत रहलें. आज के दर्शक वायलेंस अउर क्रूर दृश्यन के लुत्फ़ उठावेलें. हम शुरू में रोमांटिक विलेन के रोल भी निभवले बानी. अब बहुते कुछ बदल गइल बा. उनका अनुसार, ‘भोजपुरी के विलेन तब गमछा अपना साथे ज़रूर रखत रहले अउर लाठी चलावे के सीखे के पड़े, लेकिन अब के विलेन बदल गइलें. उ सूट-बूट अउर जींस टीशर्ट में लउके लगलें, ग्लोबल हो गइलें, अत्याधुनिक हथियार रखे लगलें.’

विजय खरे के कुछ बेहतरीन किरदार वाला फिल्मन में ‘पिया के गाँव’, ‘बिहारी बाबु’, ‘दूल्हा गंगा पार के’, ‘माई’ अउर ‘दगाबाज़ बलमा’ बा. लगभग 200 फिलिम करे वाला विजय खरे के आखिरी फिलिम 2010 में ‘देवरा बड़ा सतावेला’ रिलीज़ भइल. बकौल विजय खरे तब विलेन के 15-20 हज़ार रूपया एगो फिलिम के मेहनताना मिलत रहे. कुणाल सिंह के फिल्मन में उनका 40 हज़ार तक अधिकतम पारितोषिक मिलल. विजय खरे के बेटा आशुतोष खरे भी पिता के राह पर चल रहल बाड़े, लेकिन बतौर अभिनेता उनके श्रेष्ठ आइल अभी बाकी बा.

महाभारत सिरियल के द्रोणाचार्य सुरेंदर पाल के विरुद्ध खलपात्र बनलें ब्रजेश त्रिपाठी

साल 1983 में आपन करियर के शुरुआत करे वाला एगो अउर विलेन ब्रजेश त्रिपाठी भी हउयें, जे भोजपुरी के साथे हिंदी में भी बहुते काम कइलें बाड़े. आपन लम्बा कद काठी अउर चौड़ा डील-डौल के वजह से उनका के हमेशा दमदार किरदार ही ऑफर होत रहल बा. उ मशहूर भोजपुरी हीरो राकेश पाण्डेय के फिलिम ‘बंसुरिया बाजे गंगा तीर’ फिलिम से आपन सफ़र के शुरुआत कइलें रहले. ओकरा बाद उ फिलिम ‘गंगा की बेटी’ में महाभारत सिरियल के द्रोणाचार्य सुरेंदर पाल के विरुद्ध खलपात्र निभवले. ‘पिया टूटे ना पिरितिया के डोर’, ‘बटोहिया’, ‘हो जाये द नैना चार’, ‘पतोह-बिटिया’ उनका 80 आ 90 के दशक के उल्लेखनीय फिलिम हवे. आधुनिक दौर में ‘पंडित जी बताई ना बियाह कब होई’, ‘राम-बलराम’, ‘देवा’, ‘उठाई ले घुंघटा चाँद देख ले’ उनके कुछ बेहतरीन किरदार वाला फिलिम ह. बकौल ब्रजेश त्रिपाठी, अब भोजपुरी सिनेमा के कैनवास बड़ हो गइल बा अउर उ बड़ बजट में भीबने लागल बा. एगो ज़माना रहल जब साल में 1-2 फिलिम बनत रहल, अब समूचे भारत भर में भोजपुरी के हर रोज़ कम से कम 15 गो फिलिम के शूटिंग होता.

अमिताभ बच्चन के साथे काम कर चुकल बाड़न गिरीश शर्मा
पुरान दौर के खलनायकन में गिरीश शर्मा के काम भी उल्लेखनीय बा. उ करीब 60-70 भोजपुरी फिल्मन में अभी ले काम कर चुकल बाड़न. बिहटा पटना के रहे वाला गिरीश शर्मा भोजपुरी फिल्मन में आपन शुरुआत 1993 में कइलें रहलन. उनकर पहिला फिलिम ‘सैयां बेदर्दी’ बतौर हीरो रहल, लेकिन उ फिलिम जब तक रिलीज़ होइत उनके लगे विलेन के रोल के कई गो ऑफर आ गइल. उ सब फिलिम करके खुद के इंडस्ट्री में बतौर खलनायक स्थापित कर लिहलन. उनके पसंदीदा किरदार वाला फिलिम कुणाल सिंह के साथे ‘चलs सखी दूल्हा देखे’, रविकिशन के साथे ‘दूल्हा मिलल दिलदार, रविकिशन अउर रानी चटर्जी के साथे ‘मल्ल-युद्ध’, अमिताभ बच्चन अउर गुलशन ग्रोवर के साथे ‘गंगा देवी’ खेसारीलाल यादव के साथे ‘शोला शबनम’ ह. पुरान फिल्मन के ही खलनायकन के लिस्ट में एगो नाम उदय श्रीवास्तव के भी बा. उ ‘‘लक्ष्मी जइसन दुल्हिन हमार’, ‘राजा ठाकुर’, ‘भईया के साली’, ‘कर्ज’ अउर ‘दिलवा पर केहू के जोर नइखे’ में खलनायकी के बेहतरीन नमूना देखवले बाड़ें.
( लेखक मनोज भावुक भोजपुरी सिनेमा के जानकार हैं )

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