Bhojpuri: बंगाल के स्टेशन 'बेगुनकोदर', जहां भूत के डर से 42 साल ना रुकल ट्रेन!

कोलकाता (Kolkata) से 260 किलोमीटर दूर “बेगुनकोदर” (BEGUNKODAR) रेलवे स्टेशन (Ghost Railway Station) पर अइसना लोगन के दिल आ दिमाग के भीतर सफेद साड़ी पहिरले एगो औरत के भूत के डर जाके बइठि गइल बा. एही कहानी के चलते एह स्टेशन पर कई साल तक सन्नाटा रहत रहल ह. रात खान अबो सन्नाटा रहेला.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 19, 2021, 2:50 PM IST
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पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला के एह रहस्यमय रेलवे स्टेशन के नांव हिंदी आ अंग्रेजी में “बेगुनकोदर” (BEGUNKODAR) लिखल बा. बाकिर बांग्ला में एकर उच्चारण “बेगुनकोदोर” होला. एही रेलवे स्टेशन के घटना ह. घटना जाने के पहिले कुछ बात जानि लेबे के परी. एइजा भूत के डर से 42 साल तक ट्रेन ना रुकल. अब ट्रेन रुकेली सन. आ लोगन में अब डरो कम होखल जाता. अइसना बिषय में रुचि लेबे वाला पर्यटक एइजा आके कई बार घूमि चुकल बा लोग.

कुछ साल पहिले एगो पैरानॉर्मल रिसर्च टीम, एक ठे लोकल टूर ऑपेरटर के साथे मिलिके पश्चिम बंगाल के एह भूतहा स्टेशन खातिर गाइडेड टूर आयोजित कइले रहे. ढेर लोग बाड़े जे अपना भीतर सनसनी खातिर अइसना जगह पर राति खान गइल पसंद करेले. बाकिर डेराए वाला लोग आजुओ बाड़े. अइसन लोग दुनिया चाहे कतनो आगा बढ़ि जाउ, डेरइबे करी. कोलकाता से 260 किलोमीटर दूर एह रेलवे स्टेशन पर अइसना लोगन के दिल आ दिमाग के भीतर सफेद साड़ी पहिरले एगो औरत के भूत के डर जाके बइठि गइल बा. एही कहानी के चलते एह स्टेशन पर कई साल तक सन्नाटा रहत रहल ह. रात खान अबो सन्नाटा रहेला. सन 2009 का पहिले कौनो ट्रेने ना रुकत रहलि ह त सवारी के सवाले नइखे पैदा होखत. बाकिर भूत के अंधविश्वास के तूरे खातिर सितंबर 2009 में एइजा सबसे पहिले रांची-हटिया एक्सप्रेस के हाल्ट तय भइल, तब जाके इलाका का लोगन में इत्मिनान के संचार भइल.

अब आईं असली कहानी पर. ई रेलवे स्टेशन 1962 में बनल रहे. कुछ समय तक सब कुछ ठीके रहे. ट्रेन आव सन, जा सन. लोग आवे ट्रेन पर चढ़े. कुछ लोग ट्रेन से उतरि के कतनो अन्हार रहो, अपना घरे चलि जाउ. बाकिर पांच साल बाद यानी सन 1967 में एइजा के कुछ लोग दावा कइल कि प्लेटफार्म का लगिए रात का घरी एगो सफेद साड़ी पहिनले भूतनी घूमेले. ई बात एतना तेजी से फइलल कि कुछुए दिन बाद ई स्टेशन पर रात होते आतंक के सनसनी फइल जाउ. रेलवे स्टेशन सुनसान रहे लागल.

भइल का रहे? एकरा बारे में दू तरह के कहानी प्रचलित बाड़ी सन.
पहिली कहानी-

सन 1967 में एगो रेलवे कर्मचारी एह रेलवे स्टेशन के दाईं ओर रेलवे लाइन पर सफेद साड़ी पहिरले एगो महिला के भूत (भूतनी) देखे का देखलस. डेरा के ऊ स्टेशन के भीतर जाके बइठि के आपन ड्यूटी करे लागल. बाकिर ओकरा कान में कुछ विचित्र आवाज आवे लागल. जब ई घटना कुछ सीनियर कर्मचारियन से बतवलस त ऊ लोग ओकरा के डांटि देसु आ कहसु कि ई ओकरा मन के भ्रम ह. गांव आ इलाका के लोग ओकर बात चाव से सुनसु आ ओकरा बाति में नमक- मिर्च लगा के दोसरा के सुनावसु. कुछ दिन बाद ओह कर्मचारी के मृत्यु हो गइल. अफवाह फइलि गइल कि ओह कर्मचारी के भूतनी मार दिहलसिह. अब त रेलवे स्टेशन पर रात होते अउरी डरावना माहौल हो गइल.

दोसरकी कहानी-



सन 1967 में “बेगुनकोदर” रेलवे स्टेशन के बगल में ओइजा तैनात स्टेशन मास्टर सफेद साड़ी में एगो युवती देखले. रात का ड्यूटी में ऊ जब आवसु त ऊ सफेद साड़ी वाली भूतनी जरूर लउके. ऊ डेरा के रेलवे स्टेशन के अपना कमरा में ड्यूटी करे लगले. रात का सन्नाटा में उनुका कान में तरह- तरह के रहस्यमय आवाज आवे लागल. ई बात ऊ कुछ बाहरी लोगन के बतवले. कुछ रेलवे कर्मचारियन के भी बतवले. कुछु दिन बादे अचानक स्टेशन मास्टर आत्महत्या क लिहले. अगिले दिने स्टेशन मास्टर के परिवार भी रेलवे के अपना मकान में मुअल पावल गइल. ई हत्या ह कि आत्महत्या एह नतीजा पर पुलिस भी ना पता लगा पावल. परिवार के मौत के बाद आसपास के लोगन में भयानक डर समा गइल. लोगन के मान्यता रहे कि जौन सफेद साड़ी में भूतनी स्टेशन मास्टर साहब के लउकत रहलि ह, ऊहे उनुका के मरले होई. एकरा बाद तरह-तरह के कहानी आ अफवाह फइले लागल. एकर कौनो कागजी प्रमाण बा? त जबाब बा कि ना. ई कहानी श्रुति परंपरा से चलतिया. कौनो पक्का दस्तावेज एकरा बारे में उपलब्ध नइखे. एसे ईहो सिद्ध होता कि अफवाह सच्चाई के भी कान काटेला.

भूत एगो अइसन विषय ह जौना के कहानी, आदमी बिना नमक मिर्च लगवले ना सुनावे. कुछ लोग त ईहो कहे कि सफेद साड़ी में एगो औरत प्लेटफॉर्म पर नाचत रहुए, केहू कहे कि रेल के पटरी पर सफेद साड़ी पहिरले एगो औरत रात भर खड़ा रहुए. कबो गायब त कबो परगट हो जात रहुए.

ई कुल कहानी अतना तेजी से फइलल कि रेलवे कर्मचारी तक डेराए लगले सन. कुछ कर्मचारिन के घर वाला त ईहो कहे लगले सन कि कहीं दोसरा जगह ट्रांसफर करा ल भा नोकरी से इस्तीफा दे द. जान रही त बहुत पइसा आई आ जाई. कई कर्मचारी ओइजा काम करेसे इंकार क दिहले सन. एइजा पोस्टिंग के नांव सुनते कर्मचारी डर से सिहरि जा सन. बिना स्टेशन मास्टर आ सिग्नल मैन के स्टेशन चालू कइसे रही? जौना कर्मचारी के देख, ऊहे ओइजा काम करे के नइखे चाहत. नतीजा ई भइल कि मानवीय आधार पर “बेगुनकोदर” रेलवे स्टेशन के बंद क दिहल गइल. एइजा कौनो गाड़ी ना रुक सन. बेगनकोदर स्टेशन के नांवे भुतहा स्टेशन परि गइल. नतीजा- स्टेशन बिल्डिंग सुनसान आ प्लेटफॉर्म खाली. चारो ओर सन्नाटा. अइसहीं बेयालिस साल बीत गइल.

सन 2009 में पश्चिम बंगाल के ओह घरी के रेल मंत्री ममता बनर्जी भूत के मौजूदगी के बकवास कहली आ बेगुनकोदर रेलवे स्टेशन के दोबारा खोलवा दिहली. ओकरा बाद एह स्टेशन पर ट्रेन रुके लगली सन. बाकिर जेकरा दिमाग में भूत से ज्यादा भूत के डर बइठि चुकल रहे, ऊ एह रेलवे स्टेशन के नांवों लेबे में डेराउ. स्टेशन आके ट्रेन धइल त दूर के बात बा. कतने लोग त डेरा के पुरुलिया जाके ट्रेन धरे. बाकिर अब धीरे- धीरे डर खतम होता.

कोलकाता के एगो पैरानॉर्मल रिसर्च संस्था अंधविश्वास खतम करे खातिर सुझाव दिहलस कि अब बेगुनकोदर रेलवे स्टेशन के राज्य के नक्शा पर एगो पर्यटन स्थल के रूप में ले आवे के चाहीं. पैरानॉर्मल रिसर्च संस्था ईहो पता चलल बा कि सिस्टमेटिक पैरानॉर्मल इंवेस्टिगेशन आ रिसर्च टीम जल्दिए एह डरावना रहि चुकल रेलवे स्टेशन खातिर गाईडेड टूर आयोजित करे के प्रस्ताव देले रहे.

त आज के स्थिति का बा? राति खान एइजा अबो केहू यात्री ना ट्रेन धरे आ ना ट्रेन से उतरे ला. एगो गांव वाला कहता कि ज्यादातर लोग पुरुलिया उतरि के आवेला. बाकिर कबो- कबो कुछ विज्ञानजीवी युवक राति खान दू या चार के समूह में उतरेलन स. हिम्मत वाला बुजुर्ग भी कबहिएं कबे एह रेलवे स्टेशन पर उतरेला लोग. बाकिर यात्री उतरे के ई घटना पांच- सात साल में एक बार कबो होला. ईहो सुनले बात ह. (लेखक विनय बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

Note- ई घटना बतावे के कारन ई बा कि कई बार हमनी का अंधविश्वास के चलते अपना निजी जीवन में आ सार्वजनिक जीवन में भी बहुत पीछे चल जानी जा. भूत- प्रेत के कथित घटना एगो अजब रहस्य पैदा करेली सन.

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