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Bhojpuri Spl: विक्टोरिया मेमोरियल में 'जय श्रीराम' वाली घटना पर बंगाल के लोग का कहता? पढ़ीं जा...

विक्टोरिया मेमोरियल में जय श्रीराम के नारा से ममता बनर्जी नाराज हो गइल रही.
विक्टोरिया मेमोरियल में जय श्रीराम के नारा से ममता बनर्जी नाराज हो गइल रही.

विक्टोरिया मेमोरियल (Victoria Memorial) में 23 जनवरी वाला कार्यक्रम में का भइल रउवां सब जानते बानी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के मंच पर आवते ही कुछ लोग “जय श्रीराम” के नारा लगा दिहलें. पढ़ीं एह पर बंगाल के लोग का कहत बा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 27, 2021, 6:11 PM IST
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पश्चिम बंगाल में कौनो घटना होता त स्वाभाविक बा कि ओकरा के जल्दिए होखे वाला विधानसभा चुनाव से जोड़ि के देखल जाता. सन 2016 में माने पिछला बंगाल विधानसभा के चुनाव चार अप्रैल से शुरू भइल रहे. कुल सात चरण में 19 मई तक मतदान भइल रहे. माने मतदान से लेके मतगणना प्रक्रिया के पूरा करे में डेढ़ महीना से अधिका लागि गइल. अब राजनीतिक प्रेक्षक लोग अनुमान लगावता कि एह बार के चुनाव मध्य मार्च से शुरू हो सकेला. एही बीच राजनीतिक घटनाक्रम अइसन बा कि लोग अखबार आ टेलीविजन सेट छोड़हीं के नइखन चाहत. अब फेर सुनाता कि तृणमूल कांग्रेस के कुछ प्रमुख नेता तृणमूल कांग्रेस छोड़ि के भारतीय जनता पार्टी में जाई लोग. अनुमान बा कि एक महीना का भितरे तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेता आपन पार्टी छोड़ि के भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो जाई लोग. आईं अब आगा बढ़ीं जा.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के 125वीं जयंती पर कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में 23 जनवरी वाला कार्यक्रम में का भइल रउवां सब जानते बानी. स्टेज पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बइठल रहे लोग. ओइजा दर्शकन में से कुछ लोग “जय श्रीराम” के नारा लगा दिहल. ममता बनर्जी नाराज हो गइली आ कहली कि ई नेताजी के कार्यक्रम ह. सरकारी कार्यक्रम ह. कौनो राजनीतिक पार्टी के कार्यक्रम ना ह. एकर एगो गरिमा बा. एइजा बोला के हमरा के अपमानित कइल गइल बा (इशारा जय श्रीराम नारा का तरफ). ऊ प्रधानमंत्री के प्रति आभार प्रकट कके कहली कि विरोध में हम भाषण ना देब. अंत में नारा लगवली- जय बांग्ला, जय भारत. एकरा पर बंगाल के लोगन के का प्रतिक्रिया बा, ईहे जाने खातिर बहुत लोगन से बात कइनी. लोग का कहल?

लोगन के कहनाम ई रहे कि नेताजी के कार्यक्रम में उनुकरे नारा “जय हिंद” बोले के चाहत रहे. “जय श्रीराम” बोले के ई मौका ना रहे. खैर अगर बोलिए दिहल लोग त ममता दीदी के भाषण देबे से मना ना करेके चाहत रहे. ऊ विरोध करती बाकिर भाषण दे दिहिती. आखिर ऊहो त कौनो राजनीतिक पार्टी के नेता के रूप में ना, मुख्यमंत्री के रूप में ओइजा बइठल रहली. साल भर पहिले दीदी उत्तर चौबीस परगना में कुछ लोगन के “जय श्रीराम” बोलला पर गाड़ी रोकवा के लखेद देले रहली. त विक्टोरिया मेमोरियल में उनुकरा नाराज भइला से लोगन के आश्चर्य ना भइल. बाकिर लोग कहता कि भाषण के रूप में उनुका कुछ त बोलहीं के चाहत रहुए. एसे नेताजी के सम्मान होइत. बाकिर पश्चिम बंगाल में चुनाव के समय बा. एह तरह के प्रतिक्रिया दीदी के अल्पसंख्यक समुदाय के वोटरन के अच्छा लागी. त कुछ काम वोट खातिर कइल जाला, भले तनी नाटकीय होखो, भले तनी अटपटा लागे. बाकिर एक बात बंगाल के सब लोग कहता- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण बहुते संतुलित आ बेहतरीन रहुए. बिल्कुल साधि के बोलुअन. उनुकर बहुत प्रशंसा सुनाता. एहू के तारीफ होता कि प्रधानमंत्री घोषणा क दिहुअन कि अब नेताजी के जन्म दिन पराक्रम दिवस के रूप में मनावल जाई.



बंगाल के अनेक लोग कहता कि ममता बनर्जी जदि जय श्रीराम सुनि के उत्तेजित ना होइती त लोग उनुका के रिगाइत ना, चिढ़ाइत ना. ई जानते कि जय श्रीराम सुनि के दीदी के आगि लागि जाला, लोगन के रस मिले लागेला. त कुछ मजा लेबे वाला लोग ओहिजो पहुंचि के जय श्रीराम नारा लगा दिहुए. अब ओइजा त दीदी केहू के लखेदिती ना. त ऊ मौखिक विरोध करुई. स्वामी विवेकानंद आ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नांव हर नेता लेला. बाकिर ओह लोगन के उद्देश्य का रहे? देश के खातिर त्याग आ तपस्या. देश के सुरक्षित आ शिक्षित कइल. स्वामी विवेकानंद कहले बाड़े कि केहू के निंदा ना करेके चाहीं. अगर रउवां मदद करे खातिर हाथ बढ़ा सकेनी त ज़रुर बढाईं. अगर नइखीं बढ़ा सकत, त अपन हाथ जोड़ि लीं, अपना भाइयन के आसिरबाद दीं, आ ओकनी के ओकनिए के रास्ता पर जाए दीहीं. ईहो कहले बाड़े कि जइसन रउवा सोचबि, ओइसने बनि जाइब. खुद के कमजोर मानब त निर्बल आ ताकतवर मानब त सबल बनि जाइब. बस सोच के अंतर से ई चमत्कार हो जाई.
अगर राजनीति में स्वामी विवेकानंद से सीख लेबे के बा त सबसे पहिला सूत्र बा कि केहू के निंदा नइखे करेके. ताकतवर के मदद करेके बा. कमजोर आ लाचार के मदद खातिर हाथ बढ़वले रहे के बा. राउर कमवे बोल दी कि रउवां का हईं. कामे बोलेला. अब स्वामी विवेकानंद के देखीं. स्वामी जी रामकृष्ण मिशन के स्थापना 1 मई 1897 में कइले रहले. वेदांत के प्रचार- प्रसार आ मनुष्य के सेवा उद्देश्य रहे. दुनिया भर में रामकृष्ण मिशन के 205 गो शाखा बाड़ी सन. करोड़ो अनुयायी बाड़े. स्वामी विवेकानंद मनुष्य के चौतरफा विकास चाहत रहले. ऊ जानत रहले कि मनुष्य के शिक्षा मिली तबे ऊ वेदांत के समझि पाई. त उनुकर अनुयायी आ प्रशंसक केकरा के वोट दिहन सन? ई वोट बंटाई. पश्चिम बंगाल में दुइएगो मुख्य पार्टी बाड़ी सन. तृणमूल कांग्रेस आ भारतीय जनता पार्टी. विवेकानंद के हृदय में राखे वाला लोगन के वोट एही दूनो पार्टी में बंटा जाई.

अब देखीं नेताजी के. अंग्रेज़ सरकार नेताजी के 2 जुलाई 1940 के दिने देशद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार क लेले रहे. त 29 नवंबर 1940 के नेताजी जेल में अपना गिरफ़्तारी के विरोध में भूख हड़ताल शुरू क दिहले. उनकरा स्वास्थ्य में गिरावट आइल. एक सप्ताह बाद 5 दिसंबर के गवर्नर जॉन हरबर्ट का कइलस कि एगो एंबुलेंस में नेताजी के उनका घरे भेजवा दिहलस ताकि अंग्रेज़ सरकार पर ई आरोप ना लागे कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जेल में यातना से मृत्यु भइल बा. नेताजी के जेल से घरे त भेजवा दिहल गइल बाकिर उनुका पर कड़ा पहरा आ निगरानी रहे. उनुका घर पर पुलिस के 24 घंटा पहरा रहे. के आवता आ के जाता एकर जांच होखे. बाकिर एही कड़ाई में नेताजी मुसलिम भेष में घर से लाहौर भागि गइले आ उनुका घरे पहरा देबे वाला पुलिस के लोग जनबे ना कइल. नेताजी पेशावर आ अफगानिस्तान का रास्ता बर्लिन भागि गइले. कुछुए दिन बाद ऊ जापान होते हुए बर्मा पहुंचले आ ओइजा आजाद हिंद फौज के गठन कइले ताकि जापान के मदद से भारत के आज़ाद करावल जा सके. उनकर नारा रहे- तहन लोग हमरा के खून द, हम तहन लोग के आजादी देब. त नेताजी से सीख लेबे के बा कि जब देश सेवा के जुनून चढ़ेला त कौनो कठिनाई पिघल जाले. बस जुनून चाहीं. त नेता जी के प्रशंसक के संख्या अनगिनत बा. एहू प्रशंसकन के वोट तृणमूल कांग्रेस आ भारतीय जनता पार्टी में बंटाई.

त राजनीति में खाली केहू महान व्यक्ति के नांव लिहला आ सम्मान कइला का साथे महान व्यक्ति के उद्देश्य पूरा कइल भी बहुते जरूरी बा. राजनीति में आरोप- प्रत्यारोप बहुत पुरान परंपरा ह. अब देखीं ममता बनर्जी विक्टोरिया मेमोरियल वाली घटना का दू दिन बादे कहली कि भारतीय जनता पार्टी- देश जलाओ पार्टी ह. जय श्रीराम का बदला में ऊ नारा दिहली- हरे कृष्ण हरे हरे, तृणमूल घरे घरे. त अभी राजनीतिक लड़ाई बहुत तेज हो गइल बा. पिछला चुनाव में जब कांग्रेस पार्टी आ वाममोर्चा (लेफ्ट फ्रंट) में चुनावी समझौता भइल रहे त बहुते कांग्रेसी आ वामपंथी वोटर एह समझौता से बहुते नाराज भइल रहले सन. ओकनी के बैलट मशीन ईवीएम में नोटा दबवले सन. नोटा माने हम केहू के वोट नइखीं देत. त नोटा एह विधानसभा में भी प्रमुख स्थान पर रही. (लेखक विनय बिहारी सिंह जी वरिष्ठ स्तंभकार हैं.)
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