Bhojpuri में अश्लील गाना के विकल्प के जरूरत ही काहे पड़ताs?

भोजपुरी फिल्मन में नीमन गीत के बीच खराब गीत खोजलो पर ना मिले आ, एगो इहो बेरा बा कि भोजपुरी फिल्मन में फूहर गीतन के बीच बहुत मुश्किल से एकाध गो नीमन गीत सुने के मिल जाला. ध्यान से देखला पर लागेला कि ओह घरी खराब गाना के विकल्पे ना रहे. काहें ना रहे?

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बहुत क्रूर कालखंड से गुजरत बानी जा हमनी के. रोज केहू ना केहू अपना बीच से दुनिया छोड़ के जाता. सभे दहशत में बा. जे बेमार बा, ओकर त आउरो हार्ट बीट बढ़ल रहsता. कब केकर का हो जाई, कुछ नइखे पता. बहुत पहिले हम एगो शेर लिखले रहनी-

भावुक हो ई जिनगी त पतझार के पतई ह

ई काल्ह रही कहवाँ, केकरा ई खबर बाटे

बाकिर इहाँ त बगइचा के बगइचा साफ़ होता. मौत के अइसन तांडव हम त पहिले कबो ना देखले रहनी ह.
अइसना में डॉक्टर आ शुभचिंतक लोग कहsता कि सोशल मीडिया से तनी दूर हो जा आ कुछ बढ़िया गाना-बजाना सुनs. भोजपुरी प्रेम के वजह से भोजपुरी गाना खोजsतानी. सर्च में ऊपर से नीचे ले उटपटांगे आइटम लउकता. परिवार आ बाल-बच्चा साथे बा. सर्चो करे में डरे लागsता. कब अश्लील दृश्य आँख का सोझा आ जाय, नइखीं कह सकत.

अब पुरनका फिल्म के गाना सुने लागल बानी. उ सब गाना जवना के लेके हमनी के सीना चौड़ा करेनी जा. लेकिन मन में एगो टीस उठsता कि का भोजपुरी गीतन के सम्मान दिआवे खातिर हरमेसा 60 साल पीछे जाए के पड़ी? एगो कहावत बा, ‘बाबा हमार घीव खइलें आ हमार हाथ महकsता’ - कबले बाबा के जमाना वाला गीतन के चोंप पर भोजपुरिया सम्मान के शामियाना तनात रही?

आँख में पानी रहे पुरनका लोग के पास



उहो एगो बेरा रहे कि भोजपुरी फिल्मन में नीमन गीत के बीच खराब गीत खोजलो पर ना मिले आ, एगो इहो बेरा बा कि भोजपुरी फिल्मन में फूहर गीतन के बीच बहुत मुश्किल से एकाध गो नीमन गीत सुने के मिल जाला. गजब के उलट-फेर भइल बा ए चनेसर. ध्यान से देखला पर लागेला कि ओह घरी खराब गाना के विकल्पे ना रहे. काहें ना रहे? एकर जवाब खोजब त पता चली कि 60 के दशक में हिन्दी के फलत-फूलत इंडस्ट्री के समानांतर भोजपुरी सिनेमा के एगो इंडस्ट्री के रूप में खड़ा करे वाला लोग प्रबुद्ध रहे, दूरदर्शी रहे आ सही मायने में सच्चा कलाकार रहे. ओकरा समाज अउरी आवे वाला पीढ़ी खातिर नैतिक जिम्मेदारी के बोध रहे. उ नाजिर साहेब होखीं भा चित्रगुप्त, शैलेन्द्र, एस. एन. त्रिपाठी, लक्ष्मण शहाबादी भा अंजान होखीं, तबे आजुओ एक एक गाना लोगन के जुबान आ स्मृति में बा.

नयका दौर के सोच आ शब्द-संयोजन त देखीं

एकरा उलट भोजपुरी गीत-संगीत के चूल्हे-भाड़ में झोंके वाला अब के गायक-गीतकार-संगीतकार के शब्द संयोजन आ सोच देखीं. भतार, मेहर, सेज, चोली, लहंगा, ढोंढ़ी, सुहागरात, पलंग, बेडरूम में अउँजिया के भोजपुरी हाँफ रहल बा. गीत-संगीत के संसरी काहें टँगाइल बा, जदि एकर कारण खोजे जाएम त पता लागी कि ई त जवन एह बेरा गीत-संगीत के मठाधीश बनल बाड़ें उ सभ अश्लील कंटेन्ट के सड़ल-बजबजात एल्बम के दुनिया से भोजपुरी सिनेमा में आइल बाड़ें. सभे जानत बा कि भोजपुरी फिल्मन के निर्माण दू बेर ठप्प पड़ल. नब्बे के दशक में लगभग बंद रहे आ ई तीसरा दौर ह जवन पिछला दू दशक से चल रहल बा. त ठप्प पड़ल समय में अश्लील कंटेंट के छिंटाइल बिया अब बरगद बन गइल बा. यूट्यूब क्रांति के बाद त ई काम अउरी आसान हो गइल. कवनो रोक-टोक नइखे. जेकरा जवन मन तवन गावsता.

भोजपुरिये वाला लोग भोजपुरी के नाश कइल

जब तिसरका दौर चालू भइल त टेक्नीशियन त दोसरा भाषा के फिल्म इंडस्ट्री से अइलें लेकिन कलाकार में ज्यादातर एल्बम इंडस्ट्री के लोग सक्रिय हो गइल. जब पूरा एल्बम इंडस्ट्री एने शिफ्ट भइल त उ आपन उहे मानसिकता लेके आइल कि भईया फिल्म बनावे के बा आ रुपिया कमाए के बा त सब जायज बा. नया-नया रिकार्ड कंपनी खुलली सन आ ज्यादा से ज्यादा सेन्सेशन पैदा करे, रुपया कमाए के अंधा दौड़ चालू भइल त भोजपुरी सिनेमा आ गीत-संगीत के मर्यादा, नैतिकता अउरी दूरदर्शिता तेल बेचे चल गइल. भोजपुरी सिनेमा पर फूहड़ गाना गाके हिट भइल लोग के धीरे धीरे कब्जा जमे लागल आ ओइसने फिल्म, अल्बम के गीत-संगीत बने लागल. भोथरो गड़ासी अपने इओर खिंचेला. अइसने नाच आ आरकेसटा खातिर कैसेट निकाले वाला गायक गीतकार संगीतकार के मौका मिले लागल आ एगो ट्रेंड सेट हो गइल कि भाई फूहड़ गइबs तबे चलबs आ तबे फिलिम में हीरो भी बनबs, तबे गाना लिखहूँ के मिली, बनावहूँ के मिली आ गावहूँ के. एगो सीधा नियम बा कि मांग आपूर्ति के नियंत्रित करेला. नयका पीढ़ी के कलाकार भी एही तर्ज पर कैसेट से डिजिटल होत भोजपुरिया सिनेमा अउर एल्बम के क्षितिज पर खुलेआम दिमाग़ी मल-मूत्र त्यागल चालू कर देहलें आ, ई अपना सोना नियर संस्कृति पर सामूहिक अत्याचार अनवरत चलिए रहल बा.

का ए चनेसर कहिया ले चली ई अनेत ?

एकर हल का बा? ई एगो यक्ष प्रश्न बा, जेकर सभे अपना-अपना बुद्धि-विवेक से उत्तर खोज रहल बा. खूब कपार पिटला के बाद सरकार नया नियम लिआइल बिया कि अश्लील गावे, बनावे आ सुने वाला पर नकेल कसल जाई. देखीं ई केतना कारगर होता ?

कुछ लोग गू प ढेला फेंक के आपन नाम चमकावल चाहsता

कुछ लोग अश्लील गाना के विरोध खातिर समूह बनवले बा बाकिर ओह विरोध से अश्लील गानवा के प्रचार ढेर होता आ भाई लोग के दोकानो चलsता जवना खातिर दरअसल उ लोग संस्था कायम कइले बा. उ लोग सोशल मीडिया के योद्धा बन के दिन भर गरिया के भी क्रांति लिआ रहल बा. मिला-जुला के सभे लागल बा आ पूरा मनोयोग से लागल बा बाकिर आजुए एगो खबर आइल ह कि फलाना के गाना ‘बंगलिनिया’ एक दिन में 50 लाख व्यूज पा गइल बा. आहि दादा, ई का? हेतना विरोध होता ओकरा बादो मिलियन बिलियन व्यूज जा रहल बा. त देखत के बा? भूत-पिशाच आके व्यूजवा बढ़ावsतारन स का ए चनेसर? बाप रे बाप ! सभे लाठी पीटत बा आ सांप मराते नइखे.

तब...एकर का उपाय हो सकेला? का भोजपुरी में फूहड़ गीत गवात रही? हम पूछत बानी कि भोजपुरी में फूहड़ गीतन के विकल्पे काहें बा? काहें ना दर्शक के सामने खाली निमने गीत दिआव, ओही में से कवनो हिट होखी, कवनो औसत आ कवनो फ्लॉप. नीमन गीत से हमार मतलब खाली बोल से ना, बल्कि ओकर सुंदर संगीत, अच्छा गायन आ नीक फिल्मांकन से भी बा. अच्छा गीतकार, संगीतकार, गायक आ अभिनेता के काहें मौका नइखे दियात. अगर ओकरा पीछे ई बहाना बा कि बढ़िया चीज बेचाई ना त फेर ई बताईं कि जब रउआ दर्शक के सामने अच्छा आ अश्लील के दू गो विकल्पे ना रखब त उ एके गो देखी. अइसन त नइखे कि भोजपुरी के दर्शक के दिमाग़ में दिन भर यौनेच्छा ही रहेला, दिन भर उ भतार, मेहर पलंग, ढोंढी आ चोली में लुकाइल रहेला. महाराज, अश्लीलता के ऑप्शन हटा दीं फेर पुरनके टाइम लेखां सब अच्छे चली, ओही में हिट भा फ्लॉप होई.

खैर, व्यूज, लाइक, शेयर आ पइसा के गुणा-गणित आ भूलभुलैया में भुलाइल भोजपुरी गीत-संगीत आ सिनेमा के वर्तमान स्थिति पर रफी साहब के गावल गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो फिल्म के एगो गीत के साथे रउआ के छोड़ जात बानी कि सोनवा के पिंजरा में बंद भईल हाय राम चिरई के जियरा उदास… व्यूज आ कलेक्शन के सोना रूपी पिंजरा में फँसल भोजपुरी गीत संगीत के चिरई के जियरा साँचो उदास बा...आह!

( लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य और सिनेमा के जानकार हैं. )

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