Home /News /bhojpuri-news /

Bhojpuri: नया बच्चा के जन्म प गावल जाला सोहर- खेलवना

Bhojpuri: नया बच्चा के जन्म प गावल जाला सोहर- खेलवना

.

.

संतान के जन्म भईला पर गावे वाला लोकगीत के सोहर कहल जाला. एह गीतन में संतान के जन्म, उत्सव आ जन्म संबंधित कहानी के गावल जाला. सोहर माने होखेला सोहिला माने निक लागल. कृष्णदेव उपधिया लिखले बाड़न कि सोहर शब्द के व्युत्पत्ति संस्कृत के शोभन से भईल बा.

अधिक पढ़ें ...

संजय शाश्वत
जे सोहिला आ सोहल से होत आखिर में सोहर बन गइल. सोहर के कई जगहा मंगल गीत भी कहल जाला-
गावहु ए सखि गावहु , गाइ के सुनावहु हो .
सब सखि मिलि जुलि गावहु, आजु मंगल गीत हो .

गोस्वामी तुलसीदास भी रामचरितमानस में मंगल गीत गावे के उल्लेख कईले बानी-
गावहि मंगल मंजुल बानी .
सुनि कलरव कलकंठ लजानी ‘ ॥

संतान के जन्म भइला प पास-पड़ौस के मेहरारू लोग इकट्ठा होके नव प्रसूता के मनोरंजन आ संतान के मंगल कामना खाति गीत-गवनई करेला , इहे सोहर कहाला. जे छठी भा बरही भईला प बंद हो जाला.

सोहर के जदि प्रायोगिक माने आ अर्थ देखल जाउ त ई वंश के प्रगति के उत्सव ह. आ भारत एगो पितृसत्तात्मक देश ह. एहिजा वंश बढावेवाला पुत्र के मानल जाला हालाँकि अब ई कुल्ह धारणा टूटता. बाकि ई परंपरा से चलल आवत रहे एह से कहीं ना कहीं सोहर मूल रुप से लइका के जनम से जुड़ गइल बा .

सोहर के दू गो रुप होला , एगो पूर्व पीठीका , दुसरका उत्तर पीठीका .  पूर्व पीठीका में बच्चा के जनम से पहिले प्रसुता के ले के गीत गावल जाला. जेकरा मे पुत्र जन्म के लालसा रखे वाली मेहरारू, गर्भ के वेदना से व्याकुल मेहरारू, मंगल कामना में हाथ जोड़ैत सास आदि के वर्णन होखेला. जइसे-
सुपुलि खेलत तुहु ननदी
मोर पियारी ननदी रे
ए ननदी आपन भईया देइ न बोलाई
हम दर्द बेयाकुल रे.

उत्तरपीठिका में संतान जन्म के बाद, माता-पिता के आनंद, सास के खुसी, संतान के रोवाई आदि के वर्णन होखेला. जइसे-
जुग जुग जिअसु ललनवा
भवनवा के भाग जागल हो
ललना लाल होई हैं,
कुलवा के दीपक,
मनवा में आस जागल हो .

उत्तर पीठिका के खेलवना भी कहल जाला. खेलवना के संबंध खेलावे से बा . खेलवना शुद्ध रुप से लइका भा लइकी के भइला प ही गावल जाला . कभियो कभियो खेलवना जन्म के पहिरहु गवा जाला बाकिर शाब्दिक अर्थ भी समझल जाओ त लईका के तबही खेलावल जा सकेला जब ओकर जन्म हो जाए. तब महतारी, घर के बड़-बुजुर्ग से ले के टोला-मोहल्ला के बच्चा-बड़ सब लईका के खेलावेमें बाझल रहे ला. मने दुनो प्रकारके गीतन के विषय संतान जन्म ही ह.

सोहर के प्रधान विषय श्रृंगार ह. एगो लोकगीत में प्रसूता, संतान के जन्म से पहिले आपन मन के भाव कहतारी-
“सावन के सवनइया आंगन सेज डाली ले हो .
ए पिया फुलवा फुलेला करइलिया गमक मन भावेला लो ॥”

बाकिर एकरा में करुण रस आ वियोग-विरह रस के भी प्रचुर मात्रा रहेला . बांझ मेहरारू के अक्सरहा तिरस्कार के दंश झेले के परेला. यह दर्द के वर्णन निम्न पंक्तियन में कुछ अइसे भईल बा-
सासु कहेली बांझ ननद विनदावासी हे
आरे विधि जेकर बारी बियाही, से ही घर से निकालेले हो

सोहर गवावे के कुछ अऊरो रीति-रिवाज बा. समृद्ध घर मे पुत्र जन्म भईला प पंवरिया नचावे के प्रथा बा. ई लोग श्रीरामचंद्र जी के जन्म होखला के कथा नाच- गा के सुनावेलन. संतान के जन्म, उत्सव के के अवसर होखेला एहि से नाच- गान के ई प्रथा प्राचीन काल से चलत आ रहल बा. बाकिर अब ई प्रथा धीरे- धीरे कम होत जात बा.

भोजपुरी में सोहर के बहुत बड़हन क्षेत्र बा , एह विधा के व्यापकता अतना बा कि एह में गंगा गीत से ले के छठ गीत तक के छवंक रहेला . गंगाजी से बेटा मांगत , छठ माई से बेटा बेटी मांगत , अदितमल से बेटा मांगत, संझा पराती के कुछ गीत , गंगा गीत , छठ गीत , पिड़िया के गीतन में बहुत समानता मिलेला . एह विधा के व्यापकता खलिहा पुत्र जनम से नइखे बलुक , ओह से जुड़ल सामाजिक , आर्थिक , व्यवहारिक आ पारिवारिक जिनगी के बात सोहर के गीतन में मिलेल.

लोकगीत बनावत घड़ी लोक कवि छंद विधान प ध्यान ना देलन. एहि बात सोहर प लागू होखेला. बाकिर एकरा गावे में गेयता के कवनो बाधा न होखे काहे से कि गावे घरी मेहरारू लोग कहीं ह्रस्व के दीर्घ बना देवेला त कहीं दीर्घ के ह्रस्व बना देवेला. कहीं अक्षर के कमी भईल त अपना ओरी से अक्षर जोड़ देवेला लोग. एह गीतन में तुक भी ना होखे. सोहर असल मे लय प्रधान होखेला. लय से गावे के कारण ई कुल्ह गीत सुने में खूब निमन आ सरस लागेला.

(संजय शास्वत वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर