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Bhojpuri Spl:..जब इंदिरा गांधी के जेल से छोड़ावे खातिर भोला अउर देवेंदर पाड़े कर लेले प्लेन हाईजैक!

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आजाद भारत के इतिहास में 20 दिसंबर के तारीख खास रहलि बिया. एही दिने 1978 में जइसन घटना घटल, दोबारा ओइसन ना भइल.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 22, 2021, 6:19 PM IST
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आजाद भारत के इतिहास में 20 दिसंबर के तारीख खास रहलि बिया. एही दिने 1978 में जइसन घटना घटल, दोबारा ओइसन ना भइल. ओह घरी देस में घरेलू सेवा खातिर एकही सरकारी विमान सेवा रहे, जवन इंडियन एयरलाइन्स के नाम से जानल जात रहे. त घटना ई भइल कि लखनऊ से दिल्ली जाए वाला विमान जवना के नंबर रहे आईसी-410 आपाना ठीके समय से उड़ि गइल. दिल्ली से लखनऊ के हवाई जहाज के दूरी पैंतालिसे-पचासे मिनट के बा. ठंढा मौसम में एने जहाज उड़ि के आसमान के चीरल शुरू कइलस, आ यात्री लोग सुस्ताए लागल लोग. केहू-केहू झपकियो लेत रहे. बीच-बीच में लकदक साड़ी में एयर होस्टेस लोग केहू के कान में ठूंसे वाला रूई देत रहली लोग त केहू के टॉफी, केहू-केहू पानियो मांगल.

आसमान में उड़त विमान में जइसन जिनगी होखे के चाहीं, ओइसने नजारा रहे, तले अचानक जइसे यात्री आ विमान कर्मचारी लोग के जीव सूखि गइल. यात्रिए में से दूगो लोग उठले, आ हवाई जहाज के हाईजैक करे के घोषणा कइ दिहले. दूनो धमकी दिहले, केहू आपाना जगहि से हिली त उनुका के गोली मारि दिहल जाई. एगो अपहरणकर्ता पिस्तौल लेके यात्रियन पर तानि दिहले. विमान में डर के माहौल बनि गइल, विमान में सवार मेहरारू का बाच्चा रोवे लागल लोग. जब ले विमान के कर्मचारी लोग कुछु समझिते, तब ले दूसरका जाना हाथ में बम लेके खड़ा हो गइले आ सबके आपाना जगहि पर बइठे रहे के चेतावनी देबे लगले. उहो धमकी दिहले, अगर केहू चाल्हाकी कइल त विमान के उ उड़ा दिहें आ आपाना हाथ में रखल बम देखा दिहले.

कुछुए देर में देश आ दुनिया के पाता चलि गइल कि लखनऊ से दिल्ली जाए वाला विमान के अपहरण हो गइल बा. जेकर रिश्तेदार-नातेदार विमान में सवार रहे, ओकरा माथ पर चिंता के लकीर पड़ि गइल, लोगन के डर आ आशंका के मारे बुरा हाल रहे. ओह घरि देश में जनता पार्टी के सरकार रहे आ प्रधानमंत्री रहले मोरार जी भाई देसाई. उत्तरो प्रदेश में जनते पार्टी के शासन रहे आ आजमगढ़ के रहे वाला रामनरेश यादव मुख्यमंत्री रहले. अपहर्ता लोगन के मांग पर विमान बनारस में उतारल गइल.



अपहर्ता लोगन से बात शुरू भइल, दूनों जना आपन मांग रखले, जवना के बदला में ऊ लोग विमान के यात्री लोगन के छोड़े के शर्त रखले रहे..
उहन लोग के पहिलका मांग रहे, इंदिरा गांधी के जेल से छोड़ि दिहल जाउ.
उहन लोगन के दोसरकी मांग रहे कि संजय गांधी और इंदिरा गांधी के खिलाफ जाताना केस चलत बा, ऊ सब वापिस लिहल जाउ.
ओह लोग के तीसरका मांग रहे कि केंद्र के जनता सरकार इस्तीफा दे दे.

एह मांगन के बाद देश के लागे लागल कि दूनो अपहर्ता जरूर कांग्रेसी होइहें स, ना त इंदिरा गांधी के समर्थक. देश ठीके सोचत रहे, दूनों अपहर्ता युवा कांग्रेस में काम करत रहे लोग. एगो के नाम रहे भोला पाड़े आ दूसर जाना रहले देवेंदर पाड़े. भोला पाड़े बलिया जिला के मुनछपरा गांव के रहे वाला त देवेंदर पाड़े, सुल्तानपुर जिला के. दूनों जाना के त एकहू मांग पूरा ना भइल, बाकिर अफसर लोग दूनों जाना के रामनरेश यादव से बात करा दिहल लोग. ओकरा बाद दूनों अपहर्ता आत्मसमर्पण कइ दिहले. जब पुलिस अफसर लोग उहन लोग के तलाशी लिहले त गजबे जानकारी मिलल. दूनों के पास असली हथियार ना रहे. दूनों जाना के पासे जवन पिस्तौल आ बम रहे, असल में ऊ बच्चन के खेलौना रहे. आ ओहि के दूनों जाना हथियार के रूप दे देले रहले. दूनों जाना के जेल भेजाहीं के रहे आ ऊ लोग भेजा गइलें.

ई संजोग रहे कि सालेभर बाद पहिले केंद्र आ बाद में उत्तर प्रदेश में जनता पार्टी के सरकार गिरि गइल. 1980 में उत्तर प्रदेश विधान सभा के चुनाव के पहिले केंद्र में इंदिरा गांधी के सरकार आ गइल, आ विमान अपहरण के आरोपी दूनो युवा कांग्रेसियों पर से मुकदमा उठा लियाइल. जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव भइल त दूनों जाना के कांग्रेस टिकटो दिहलसि. भोला पाड़े के गांव ओइसे त बलिया जिला के बांसडीह विधानसभा में पड़त रहे, बाकिर उनुका के कांग्रेस टिकट दिहलसि दुआबा से. दुआबा विधानसभा अब बैरिया नाम से जानल जाला. एही तरी देवेंद्र पाड़े के टिकट मिलल सुल्तानपुर से आ दूनों जाना चुनाव जीति के विधानसभा पहुंच गइले.

1980 के इंदिरा लहर में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कानपुर से सुमनलता दीक्षित भी कांग्रेस के विधायक बनल रहली. पुरूब में बाम्हन लोगन के लोग आमतौर पर बाबा कहेला, चाहे उमिर केतनो होखे, त भोला पाड़े भी भोला बाबा के नाम से अइसन मसहूर भइले कि अब ले भोले बाबा कहाले. ई बात दोसर बा कि 1985 के विधानसभा चुनाव में मिस्टर क्लीन राजीव गांधी उनुकर टिकट काटि दिहले, ओकरा बाद भोला बाबा सलेमपुर से लोकसभा के चुनाव लड़ले, 1990 में विधानसभा के भी चुनाव लड़ले, बाकिर जीति दोबारा मयस्सर ना भइल. कांग्रेस के केंद्रीय कमेटी में सचिव बनावल गइले आ अब लखनऊ में जिनगि काटत बाड़े. देवेंद्र पाड़े त राजनीतिए छोड़ि दिहले, पाता ना अब का करतारे.

अस्सी के दशक में जब पंजाब में आतंकवाद बढ़त रहे, अमृतसर से इंडियन एयर लाइन्स के एगो विमान के खालिस्तानी आतंकी अपहरण कई लिहले आ पाकिस्तान लेके भागि गइले. बाकिर पाकिस्तान ओह विमान के उतरे ना दिहलसि, त फेरू ऊ विमान वापिस अमृतसरे आइल.. उहवां इंदिरा गांधी के आदेश पर कमांडो कार्रवाई में ओकर अपहर्ता मारि दिहल गइले स. एह के बाद भिंडरवाला समेत खालिस्तानी आतंकी सवाल उठवले स कि अपहर्ता ओइसहीं राजनीतिक अपहर्ता रहले हा स, जइसन भोला आ देवेंदर पाड़े रहले.

भिंडरवाला एह बात के सवाल उठवलसि कि आखिर ओकरा आदमिन के काहें मार दिहल गइल..आ तोख में भोला आउर देवेंदर पाड़े के ही रखलसि.. 1978 से अब तक ले गंगा-जमुना में काताना पानी बहि गइल, बाकिर जब-जब कवनो विमान के अपहरण होला, ई घटना जरूर यादि कइल जाले. हाल में जब अमेरिका के कैपिटल बिल्डिंग पर हमला भइल रहे त कांग्रेस ओकरा खिलाफ ट्वीट कइलसि त ट्रोलर ओकरा विरोध में 1978 के ई घटना के खूब यादि दियवले. रहल बात बलिया आ सुल्तानपुर के, दूनों जगह लोग ना त भोला पाड़े के अपराधी मानेला, ना देवेंदर के. (लेखक उमेश चतुर्वेदी वरिष्ठ पत्रकार हैं.)
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