Bhojpuri: जब राज्यपाल के गाड़ी के पीछा करे खातिर लालू जादव कहले- और चांपो एक्सिलेटर!

लालू जादव (Lalu Prasad Yadav) के राजनीत में आगा बढ़े के एगो इहो कारण रहे कि उनकर सूचना तंत्र बहुत मजबूत रहे. कहां का हो रहल बा, हर बात के उनका खबर मिल जात रहे. एही बीच उनका खबर मिमल कि राज्यपाल यूनुस सलीम उनका के मुखमंतरी के शपथ दिलावे के बदले दिल्ली जात बाड़े. अतना सुनला के बाद लालू जादव के एंड़ी के लहर कपार पs चढ़ गइल. ऊ डराइभर से फटाफट से गाड़ी निकाले के राज्यपाल के गाड़ी के पीछा करे के कहले.

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पटना के डाकबंगला चौउराहा पs जाम लागल रहे. रोजगार अउर बिधि-बेवस्था के मुद्दा पर राजद के जुलूस निकल रहे. आवाजाही बंद रहे. नीतीश सरकार के खिलाफ नारेबाजी होत रहे. पुलिस जुलूस के रोक देले रहे. लेकिन जब राजद के नेता बैरिकेटिंग तूर के आग बढ़े के कोशिश कइले तs पुलिस लाठीचार्ज कर देलस. जबाब में राजद नेता भी रोड़ेबाजी करले लगले. जान बचावे खातिर लोग जेने-तेने भागे लगले. जटाशंकर, शशिशेखर अउर अवनीश भाग के जयपरकास भवन के हाता में पहुंचले. जटाशंकर कहले, कतना अचजर के बात बा कि आज जे लाठी खा रहल बा अउर जे लाठी मार रहल बा, ओह दूनो पक्ष के नेता (लालू-नीतीश) जेपी आंदोलन से ही निकलल बाड़े. अगर जेपी आंदोलन ना भइल रहित तs लालू जी अउर नीतीश जी आज सरकारी नौकरी से रिटायर भइला के बाद घरे बइठल रहिते. लेकिन दूनो जना मुखमंतरी बनले. शशिशेखर कहले, लेकिन लालूजी सीनियर नेता लोगन के पछाड़ के कइसे मुखंतरी बन गइल रहन ? अवनीश कहले, लालू जी ओह घरी सांसद रहन, लेकिन ऊ कइसे बिधायक दल के नेता चुनइले अउर कइसे मुखमंतरी बनले, ओकर कहानी बहुत रोमांचक बा.

सीएम पद खातिर चाल
शशिशेखर अवनीश से पूछले, लेकिन तूं कइसे ई कहानी जानत बाड़s? अवनीश कहले, संकर्षण ठाकुर के किताब बंधु बिहारी में ई कहानी पढ़ले रहीं. 1990 के बिधानसभा चुनाव के बाद बिहार में जनता दल के सरकार बने के रहे. बिधायक दल के नेता बने खातिर लालू जादव अउर रामसुंदर दास में जोरआजमाइश चलत रहे. ओह घरी केन्द्र में वीपी सिंह परधानमंतरी रहन. देवीलाल उप परधानमंतरी रहन. लेकिन भीतरे-भीतर वीपी सिंह अउर देवीलाल में घनघोर लड़ाई चलत रहे. चनरसेखर भी बीपी सिंह के तनिको ना देखल चाहत रहन. लालू जादव के माथा पs देवीलाल के हाथ रहे. बीपी सिंह रामसुंदर दास के मुखमंतरी बनावल चाहत रहन. फौरवड बिधायक लोग के भोट रामसुंदर दास के मिले के उमेद रहे. तब लालू जादव चनरसेखर से मिल के मदद के गोहार लगावले. फौरवड बिधायक के भोट काटे खातिर चनरसेखर रघुनाथ झा के खाड़ा कर दले. एह चाल से बिधायक दल के नेता के चुनाव में रघुनाथ झा रामसुंदर दास के भोट काट लेहले. लालू जादव तीन भोट से बिधायक दल के नेता के चुनाव जीत लेहले. लेकिन असल खेल एकरा बाद शुरु भइल.

लालू जादव के राह में अड़ंगा
जटाशंकर पूछले, अगर लालूजी चुनाव जितिए गइले तs एकरा में खेला के बात कहां से आ गइल ? तब अवनीश कहले, बिधायक दल के नेता के चुनाव खातिर केन्द्र से जनता दल के नेता पर्यवेक्षक के रूप में बिहार आइल रहन. एकरा में अजीत सिंह, सुरेनदर मोहन अउर जार्ज फरनांडीस बीपी सिंह के बिसेस दूत रहन. लालू जादव के जितावे खातिर रघुनाथ के खाड़ा कइला के चाल से बीपी सिंह के खेमा तमतमा गइल. तब अजीत सिंह चाल के जबाब चाल से देवे के सोंचले. ओह घरी बिहार के राज्यपाल मोहम्मद यूनुस सलीम रहन. यूनुस सलीम लोकदल के पुरान नेता रहन. जब चउधरी चरन सिंह लोकदल के अध्यक्ष रहन तब यूनुस सलीम उपाध्यक्ष रहन. यूनुस सलीम चरण सिंह के बहुत इज्जत करत रहन. अजीत सिंह राज्यपाल यूनुस सलीम से कहले कि जब ले केन्द्र सरकार विधायक दल के नेता के चुनाव पs मोहर ना मार देवे तब ले ऊ लालू जादव के शपथ गरहन खितिर नेवता मत देस. अजीत सिंह परधानमंतरी बीपी सिंह के दूत रहन. उनका से अजीत सिंह के बात उठावल ना बनल. लेकिन दोसरा देने नियम के भी सवाल रहे. तब राज्यपाल यूनुस सलीम सोचले कि अगर ऊ एही बीच दिल्ली चल जास तs एह दुबिधा से छुटकारा मिल सकेला.

जब राज्यपाल के गाड़ी के पीछा कइले लालू जादव
शशिशेखर पूछले, एकर मतलब बीपी सिंह गुट लालू जादव के कवनो बिधि से मुखमंतरी ना बनल देल चाहत रहे ? तब अवनीश कहले, बात तs इहे रहे लेकिन लालू जादव के जोड़तोड़ के कवनो जबाब ना रहे. लालू जादव के राजनीत में आगा बढ़े के एगो इहो कारण रहे कि उनकर सूचना तंत्र बहुत मजबूत रहे. कहां का हो रहल बा, हर बात के उनका खबर मिल जात रहे. एही बीच उनका खबर मिमल कि राज्यपाल यूनुस सलीम उनका के मुखमंतरी के शपथ दिलावे के बदले दिल्ली जात बाड़े. अतना सुनला के बाद लालू जादव के एंड़ी के लहर कपार पs चढ़ गइल. ऊ डराइभर से फटाफट से गाड़ी निकाले के राज्यपाल के गाड़ी के पीछा करे के कहले. लालू जादव के गाड़ी हवाई आड्डा देने सरपट भागे लागल. लालू जादव आपन डराइभर से खीस में कहस, एक्सिलेटर दबाओ, अउर जोर से दबाओ, कइसहूं राज्यपाल के गाड़ी को धर लेना है. दिल्ली नहीं जाने देना है. चुनाव जीतल बिधायक दल के नेता को सीएम पद का शपथ दिलाने के बदले दिल्ली क्यों भाग रहे राज्यपाल ? लालू जादव के बात सुन के डराइभर गाड़ी के स्पीड बढ़वत रह गइल लेकिन बात ना बनल. लालू जादव जब से हवाई अड्डा पहुंचले तब ले राज्यपाल के जहाज हवा में उड़ गइल रहे. लालू जादव के खीस अउर बढ़ गइल.

लालू जादव के रोके के फेल भइल चाल
बनल काम बिगड़त देख के लालू जादव अगिया बैताल हो गइले. घरे अइला के बाद ऊ सीधे देवीलाल के फोन कइले, का ताऊ रउआ राज में इहे होई ? बिधायक लोग हमरा के सीएम चुनले बाड़े लेकिन अजीत सिंह के सिखवला में राज्यपाल दिल्ली भाग गइले. अजीत सिंह के नाम सुनते देवीलाल भड़क गइले. लोकदल के राजनीत में देवीलाल बहुत सीनियर नेता रहन. उनका ई बात बेलकुल ना बरदास ना भइल कि चरण सिंह के नौसुआ बेटा कइसे अतना बड़ फैसला कर लेलस. देवीलाल के चरण सिंह से पुरान खुन्नस भी रहे. तब अजीत सिंह के बाजी पलटे खातिर देवीलाल, यूनुस सलीम के फोन कइले. यूनुस सलीम के लोककदल के समय से देवीलाल से भी बहुत नजदीकी रहे. देवीलाल भारत के उपपरधानमंतरी भी रहन. ऊ यूनुस सलीम के फोन कइले, आप जल्द से जल्द पटना जाएं और लालू यादव को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाएं. अब राज्यपाल यूनुस सलीम के सामने कवनो उपाय ना रह गइल. ऊ पटना लौटले. ऐह तरे लालू जादव मुखमंतरी पद के शपथ लेले रहन. लेकिन अब जब समय बदल गइल तs उहे लालू जादव आज पाटी के हाल देख के बेहाल बाड़े. अवनीश के बात खतम भइल तs डाक बंगल चउरहा के बबाल खतम हो गइल रहे. एकरा बाद तीनो संघतिया डेरा देने चल देले. (डिस्क्लेमर- लेखक अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ स्तंभकार हैं.)

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