Bhojpuri: जब पार्टी से वफादारी खातिर पुत्र के खिलाफ चुनाव प्रचार कइलन कमलापति

पुराने जमाने में कई नेता अलग तरह क रहलन. बुराई ओनहूं में रहल, लेकिन एतना बुरा नाहीं रहलन. केतना त पार्टी अउर अपने राजनीतिक सिद्धांत के आगे परिवार के भी दरकिनार कइ देहलन, चाहे सामने आपन सगा सपूत ही काहे न होय. कांग्रेस क दिग्गज नेता, स्वतंत्रता सेनानी, उत्तर प्रदेश क पूर्व मुख्यमंत्री अउर पूर्व रेलमंत्री कमलापति त्रिपाठी अइसनय एक नेता रहलन.

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  • Last Updated: April 23, 2021, 3:22 PM IST
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आज के जमाने में नेता लोग कपड़ा की नाईं पार्टी बदलयलन. सबेरे जवने पार्टी में हयन, संझा के भी ओहमें रहियय, एकर कवनो गारंटी नाहीं हौ. राजनीति अब धंधा बनि गयल हौ, अउर धंधा क एकमात्र मकसद मुनाफा होला. मुनाफा में वफादारी अउर सिद्धांत ताखे पर रखि देहल जाला. लेकिन पुराने जमाने में कई नेता अलग तरह क रहलन. बुराई ओनहूं में रहल, लेकिन एतना बुरा नाहीं रहलन. केतना त पार्टी अउर अपने राजनीतिक सिद्धांत के आगे परिवार के भी दरकिनार कइ देहलन, चाहे सामने आपन सगा सपूत ही काहे न होय. कांग्रेस क दिग्गज नेता, स्वतंत्रता सेनानी, उत्तर प्रदेश क पूर्व मुख्यमंत्री अउर पूर्व रेलमंत्री कमलापति त्रिपाठी अइसनय एक नेता रहलन.

कमलापति आजीवन कांग्रेसी रहलन अउर नेहरू गांधी परिवार के प्रति अपने वफादारी से कभौ पीछे नाहीं हटलन. वफादारी अउर राजनीतिक सिद्धांत के उ हमेशा सबसे ऊपर रखलन. कमलापति अपने आचरण अउर सिद्धांत क अनूठा उदाहरण तब पेश कइलन, जब एक बार अपने पुत्र मायापति त्रिपाठी के ही खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में जमि के चुनाव प्रचार कइलन.

कमलापति त्रिपाठी के तीन लड़िका रहलन. सबसे बड़ा लोकपति त्रिपाठी, दूसरका मायापति त्रिपाठी अउर सबसे छोट मंगलापति त्रिपाठी. लोकपति त्रिपाठी अपने पिता के संरक्षण में रहि के राजनीति में करियर बनउलन अउर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहलन. लोकपति मुख्यमंत्री भी बनय के कतार में रहलन, लेकिन गोटी सही नाहीं बइठल त मुराद पूरी नाहीं होइ पइलस. मायापति त्रिपाठी एक बीमा अधिकारी के रूप में आपन करियर शुरू कइलन. जबकि मंगलापति कारोबार में कदम रखलन.

अब बात मायापति क. मायापति क पढ़ाई-लिखाई पहिले काशी हिंदू विश्वविद्यालय में, फिर लखनऊ विश्वविद्यालय में भइल, अउर उ लखनऊ के ही आपन कर्मभूमि बनाइ लेहलन. कमलापति के जवन सरकारी बंगला मिलल रहल, ओही में उ रहय अउर सन 1956-57 में ओन्हय हिंदुस्तान जनरल इंश्योरेंस कंपनी में बीमा अधिकारी क नौकरी मिलि गइल. सन 1975 में उ नेशनल इंश्योरेंस कंपनी क डिविजनल मैनेजर बनि गइलन. मायापति हलांकि 1960 के बाद से धीरे-धीरे राजनीति में सक्रिय होवय लगल रहलन अउर कांग्रेस से जुड़ि गयल रहलन. किसान-मजदूर क समस्या अउर ओनके बदे शासन-प्रशासन से लड़ाई ओनकर पसंदीदा विषय रहल. देश के किसानन अउर मजदूरन के संगठित करय बदे उ अखिल भारतीय किसान मजदूर वाहिनी नाम क एक ठे स्वतंत्र संगठन भी बनउलन.
मायापति त्रिपाठी स्पष्टवादी रहलन, खरा-खरा बोलय अउर सिद्धांत से समझौता न करय. सरकार क विरोध करय से भी पीछे न रहय. कुल मिलाइ के राजनीति के तिकड़म में उ फिट नाहीं रहलन, जवने के नाते पार्टी में लोगन से ओनकर पटरी न बइठि पावय अउर अंततः उ पार्टी राजनीति में सफल नाहीं होइ पइलन. गोरखपुर से एमएलसी क चुनाव लड़लन हारि गइलन. सन 1984 के आम चुनाव में लखनऊ लोकसभा सीट से मैदान में उतरि गइलन, जहां से कांग्रेस पार्टी क अधिकृत उम्मीदवार शीला कौल रहलिन. शीला कौल कांग्रेस क दिग्गज नेता के साथ ही देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू क सरहज रहलिन.

बनारस क दिग्गज कांग्रेसी नेता कमलापति महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू अउर इंदिरा गांधी के साथ काम कइ चुकल रहलन अउर फिर राजीव गांधी के साथ भी काम कइलन. कांग्रेस जब 1969 में दुइ फाड़ होइ गइल अउर कुमारस्वामी कामराज यानी के. कामराज के नेतृत्व वाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (ओ) अउर इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आर) में बंटि गइल, तब भी कमलापति इंदिरा गांधी क ही साथ देहले रहलन. बाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आर) बदलि के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई) होइ गइल. आर क मतलब रिक्विसिशनिस्ट रहल, अउर आई क मतलब इंदिरा. बाद में जब कांग्रेस (ओ) क जनता पार्टी में विलय होइ गयल तब कांग्रेस (आई) पूरी तरह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस होइ गइल.

नेहरू गांधी परिवार क वफादार सिपाही कमलापति क लड़िका मायापति अब ओही परिवार क सबसे खास उम्मीदवार शीला कौल के खिलाफ चुनाव मैदान में ताल ठोकत रहलन. पार्टी में एह बात के लेइके हड़कंप मचि गयल. कमलापति के सामने पुत्र अउर पार्टी में से एक के चुनय क विकल्प रहल. पार्टी के भीतर खुसुर-फुसुर होवय लगल कि कमलापति के इशारे पर ही मायापति चुनाव मैदान में उतरल हयन. बहुत लोगन के अंदेशा रहल कि कमलापति अपने लड़िका के पक्ष में प्रचार कइ सकयलन. अगर उ अइसन करतन तब शीला कौल के सामने मुश्किल होइ सकत रहल. सबकर नजर अब कमलापति के अगले कदम पर रहल.



अंत में कमलापति पार्टी के चुनलन अउर शीला कौल के पक्ष में प्रचार करय क घोषणा कइलन. कमलापति लखनऊ गइलन अउर कई दिना तक उहां रहि के मायापति के खिलाफ शीला कौल के पक्ष में कई जनसभा कइलन. कमलापति के प्रचार कइले से पूरा माहौल अइसन बदलल कि मायापति हवा होइ गइलन अउर ओन्हय मात्र 2390 वोट मिलल, ओनकर जमानत जब्त होइ गइल. शीला कौल 169260 वोट पइलिन अउर चुनाव जीति गइलिन. कमलापति क इ कदम भारतीय राजनीति के इतिहास में पार्टी के प्रति वफादारी अउर राजनीतिक सिद्धांत के प्रति दृढ़ता क अपने आम में एक मिसाल हौ. आज के नेतन के कमलापति से सीखय के चाही. (लेखक सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)
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