Bhojpuri: जब कमलापति के चिट्ठी से मचल रहल कांग्रेस में बवाल

कांग्रेस के भीतर अउर बाहर बस एकय चर्चा रहल कि अब का होई. तमाम कांग्रेसी सकते में रहलन कि नेहरू-गांधी परिवार क वफादर बनारसी पंडित राजीव गांधी के खिलाफ अइसन चिट्ठी भी लिखि सकयला. का राजीव इ हरकत बर्दाश्त कइ लेइहय.

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कांग्रेस देश क सबसे पुरानी पार्टी हौ. लेकिन एह समय एकर दिन अच्छा नाहीं चलत हौ. कांग्रेस में पहिले भी कई दइयां उतार-चढ़ाव आइ चुकल हौ, लेकिन उतार क इ दौर एतना लंबा खिंचत हौ कि पार्टी के भीतर विरोध क अखुआ फूटय लगल हौ. कांग्रेस लगातार दुइ आम चुनाव हारि गइल. 2019 में पार्टी के हरले के बाद राहुल गांधी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देइ देहलन अउर ओकरे बाद से पार्टी कार्यवाहक अध्यक्ष के भरोसे हौ. लेकिन कई विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के हरले के बाद अध्यक्ष क चुनाव अउर संगठानात्मक चुनाव करावय बदे पार्टी क 23 नेता गोलबंद होइ गइलन अउर कार्यवाहक अध्यक्ष सोनिया गांधी के पास एक ठे चिट्ठी भेजि देहलन. चिट्ठी के बाद से कांग्रेस में माहौल गरम हौ. असंतुष्ट नेता रहि रहि के जहर उगिलल करयलन.

ठीक अइसय बवाल कांग्रेस में ओह समय मचल रहल, जब बुजुर्ग कांग्रेसी नेता कमलापति त्रिपाठी मई 1986 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ चिट्ठी लिखले रहलन. हलांकि उ बवाल कार्यकारिणी के एक बैठक के बाद ठंढा होइ गयल रहल. चिट्ठी में कमलापति राजीव के कार्यप्रणाली अउर नेतृत्व क्षमता पर तीखा सवाल उठाइले रहलन. ओह समय पार्टी सत्ता में रहल, अउर राजीव गांधी प्रधानमंत्री के साथ ही पार्टी क अध्यक्ष भी रहलन. जबकि कमलापति कार्यकारी अध्यक्ष रहलन. ओनकर चार पन्ना क चिट्ठी जब राजीव गांधी के पास पहुंचल तब पहिले उ ओनसे फोन पर बात कइलन. फिर मानव संसाधन विकास मंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के ओनके पास भेजलन, ओनकर शिकायत सुनय बदे. अंत में राजीव गांधी आपन राजस्थान दौरा बीच में छोड़ि के दिल्ली लउटि अइलन. ओकरे बाद जवन भयल उ कांग्रेस पार्टी के इतिहास क एक अनोखा अध्याय हौ.

कमलापति क चिट्ठी चूंकि मीडिया में लीक होइ गइल रहल, जवने के नाते कांग्रेस के भीतर अउर बाहर बस एकय चर्चा रहल कि अब का होई. तमाम कांग्रेसी सकते में रहलन कि नेहरू-गांधी परिवार क वफादर बनारसी पंडित राजीव गांधी के खिलाफ अइसन चिट्ठी भी लिखि सकयला. का राजीव इ हरकत बर्दाश्त कइ लेइहय. तमाम लोगन के आशंका रहल कि कमलापति क अब कांग्रेस से विदाई तय हौ, काहें से कि ओकरे पहिले अइसनय मामला में वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी क सरकार अउर पार्टी दूनों जगह से विदाई होइ चुकल रहल. लेकिन राजीव क कमलापति के फोन करब अउर फिर नरसिम्हा राव के मिलय बदे भेजब, अइसन घटना रहल, जवने से संदेश गयल कि राजीव कमलापति के दबाव में आइ गयल हयन.

लेकिन राजीव के दिल्ली पहुंचले के बाद जवन घटनाक्रम सामने आयल, ओहसे स्पष्ट होइ गयल कि कांग्रेस नेतृत्व असंतुष्टन के छुट्टा छोड़य के मूड में बिल्कुल नाहीं हौ. दिल्ली लउटले के बाद राजीव गांधी पहिले अपने वफादारन से असंतुष्टन के खिलाफ कार्रवाई क मांग उठवइलन. ओकरे बाद कांग्रेस कार्यकारिणी क दुइ जून के आपात बैठक बोलावल गयल, जवने में खाली एक मुददा यानी कमलापति के चिट्ठी पर चर्चा क एजेंडा रहल.
कमलापति राजीव गांधी के चिट्ठी में लिखले रहलन कि - कांग्रेस क लोग पार्टी में हर स्तर पर गिरावट से चिंतित अउर परेशान हयन अउर तू अउर तोहार तथाकथित सिपहसलार लोग पार्टी के जवने तरह से चलावत हयन, ओहसे हम सब हैरान हई. हमरे कहय क मतलब इ हौ कि कांग्रेस क जनाधार तेजी से गिरत हौ अउर तू चारों ओरी से चमचन से घिरल हउवा, जबकि इहय लोग इंदिरा गांधी के धोखा देहले रहलन, ओनसे नफरत भी करय. एकरे अलावा तू पंजाब अउर असम समस्या से निपटय में भी हड़बड़ी कइला, जवने के नाते समस्या सुलझय के बदले अउर उलझि गइल.

कमलापति एकरे अलावा चिट्ठी में लिखले रहलन कि सरकार समाज के संपन्न वर्ग के कल्याण बदे खास तौर से चिंतित देखात हौ, अउर आपके माता जी क गरीब समर्थक नीति अब इतिहास बनि गयल हौ.

प्रधानमंत्री राजीव गांधी राजस्थान से लौटतय अपने आवास पर एक ठे बैठक बोलउलन, जवने में अर्जुन सिंह, वी.पी. सिंह अउर पी.वी. नरसिम्हा राव सहित पार्टी क वरिष्ठ नेता शामिल भइलन. बैठक में निर्णय भयल कि चिट्ठी पर चर्चा बदे दुइ जून के कांग्रेस कार्यकारिणी क बैठक बोलाइ जाय. कुल मिलाइ के कमलापति के अपमानित करय क रणनीति बनावल गइल. बैठक बदे सबके त निमंत्रण पहिलय भेजि देहल गयल, लेकिन कमलापति अंतिम समय में नेवतल गइलन. कमलापति क बड़का लड़िका लोकपति त्रिपाठी अउर मझिलका लड़िका मायापति त्रिपाठी अपने पिता के पहिलय सचेत कइ देहले रहलन. अंत में कमलापति चिट्ठी बदे माफी मंगलन. मामला एही ठिअन खतम होइ गयल अउर उ पार्टी से निकालल नाहीं गइलन.



सूत्रन के मुताबिक, कार्यकारिणी के बैठक में अर्जुन सिंह अउर राजीव गांधी त कुछ नाहीं बोलले रहलन. लेकिन सीताराम केसरी सीधे कमलापति के ओरी मुंह कइ के कहलन कि अगर पार्टी नेतृत्व के चुनौती देवय वाली कवनो भी आवाज के बर्दाश्त कयल गयल त आगे चलि के इ पार्टी बदे बहुत भारी पड़ी. भगवत झा आजाद असंतुष्टन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई क मांग कइलन. राजीव गांधी केरल के मुख्यमंत्री के. करुणाकरण जइसन इंदिरा गांधी के वफादारन से एक प्रस्ताव पेश करउलन, जवने में अइसने लोगन क निंदा कयल गयल, जे इंदिरा क नाम लेइके सत्ता हथियावय चाहत रहल. कमलापति के कदम पर सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित भयल. वरिष्ठ नेतन क भारी दबाव रहल, फिर भी राजीव गांधी कमलापति के पार्टी से नाहीं निकललन. राजीव सांप भी मरि जाय अउर लाठी भी न टूटय वाली रणनीति अपनउलन. एक तरफ उ कमलापति के ओनकर औकात बताइ के असंतुष्टन के संदेश देहलन कि पार्टी अउर सरकार क असली बाॅस ओनही हयन. अउर दूसरे तरफ बुजुर्ग नेता के खिलाफ निष्कासन जइसन कार्रवाई न कइ के उ आपन उदार छवि भी पेश कइलन.

बैठक के दौरान कार्यकारिणी क सदस्य लोग कमलापति से चिट्ठी वापस लेवय बदे कहलन, लेकिन कमलापति अइसन करय से मना कइ देहलन. उ कहलन कि हम चिट्ठी अपने मन से सोच-विचारि के लिखले हई अउर चिट्ठी में जवन लिखले रहे, ओहपर पार्टी गौर भी कइलस.

कमलापति के रुख से जब साफ होइ गयल कि उ चिट्ठी वापस न लेइहय, तब ओन्हय ओह प्रस्ताव क हिस्सा बनावल गयल, जवने में ओनके चिट्ठी के हर बिंदु के खारिज कयल गयल रहल. एह तरह से उ खुद से अपना निंदा कइलन. इ अपने आप में ओनकर बड़ा अपमान रहल.

लेकिन कमलापति जब प्रेस के सामने अइलन तब उ फिर से बनारसी अंदाज में रहलन. उ कहलन कि कार्यकारिणी के कार्यवाही से उ भले ही संतुष्ट हयन, लेकिन अगर जरूरत पड़ी त भविष्य में अइसन चिट्ठी फिर लिखिहय. एह घटना के बाद से कमलापति कांग्रेस में दरकिनार कइ देहल गइलन अउर धीरे-धीरे उ एकदम अकेला पड़ि गइलन. उपेक्षा, अपमान अउर अकेलापन के बीच एक दइया उ दुखी मन से कहले रहलन कि पहिले कांग्रेस क सरकार रहत रहल, अब सरकार क कांग्रेस हौ. (लेखक सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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