Bhojpuri: जब 26 साल के पप्पू जादव से चाइलेंज में हार गइल रहन लालू जी

पप्पू जादव के दबंग कहल जाला, बाहुबली कहल जाला. कइअक गो किरिमिनल केसो में नांव रहे. उमिर कैद के सजाय भइल. बरी भी हो गइले. लेकिन ऊ शुरूए से जुझारू नेता रहन. लालू जादव जइसन नेता के चाइलेंज कर के बिधायक और एमपी के अलेक्शन जीतल रहन. एकर कहानी सुने के बा तs चलs लखन चा के मड़ई में.

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रघुनंदन भोरे तरकारी किने चलले तs पीछा से अवाज आइल, ऐ राघो ! रुक्कs! जब ऊ पलट के देखले तs भवेश भइया मुंह में अंगौछी बन्हले लपकत आवत रहन. भीरी अइले तs भवेश भइया कहले, नेम्मो-कंकरी जरूरक किनिहs. एह घरी इहे फैदा करी. तरकारी किना गइल. रस्ता में भवेश भइया कहले, देख लs रघुनंदन, कोरोना में भी राजनीत तूफान मरले बा. पप्पू जादव अबहीं ना सांसद बाड़े ना बिधायक लेकिन अकेलेहीं हलचल मचवले बाड़े.

एम्बुलेंस ढांक के राखे के मामिला अइसन गरमाइल कि भाजपा सांसद राजीव परताप रुडी के मोसकिल बढ़ गइल. पप्पू जादव सही कइले कि गलती, एह बात पs बहस हो सकेला लेकिन लोग के मन में तs ई सवाल जरूर आ गइल कि कोरोना महामारी में अतना एम्बुलेंस तिरपाल से तोप के काहे राखल गइल. रघुनंदन कहले, पप्पू जादव के दबंग कहल जाला, बाहुबली कहल जाला. कइअक गो किरिमिनल केसो में नांव रहे. उमिर कैद के सजाय भइल. बरी भी हो गइले. लेकिन ऊ शुरूए से जुझारू नेता रहन. लालू जादव जइसन नेता के चाइलेंज कर के बिधायक और एमपी के अलेक्शन जीतल रहन. एकर कहानी सुने के बा तs चलs लखन चा के मड़ई में.

पप्पू जादव के लालू जी से मेल

भवेश भइया के सवाल पs लखन चा कहले, हमरा नजर में पप्पू जादव के दू रूप बा. पहिला, दबंग अउर बरियारी करे वला नेता. दोसर, पबलिक के दुख तकलीफ में मदद करे वला नेता. ऊ एमपी-एम्मेले भले मत होखस लेकिन जनता के बीच आमद-रफत हरमेसा रहेला. उनकर गतिबिधि के केतना अदिमी राजनीतिक ढकोसला भी कहेला. लेकिन एक बात जरूर बा कि ऊ कबो-कबो तहलका भी मचा देले. जइसे अबही एम्बुलेंस पs बबाल मचल बा. पप्पू जादव शुरूए से लड़े-भिड़े वला नेता रहन. ऊ लालू जी से तब जुड़ल रहन जब ऊ कौलेज में पढ़त रहन. 1988 में जब लालू जी बिरोधी दल के नेता बने खातिर जोड़-तोड़ करत रहन तs ओहघरी पप्पू जादव भी उनकर मदद कइले रहन.1988 में जब कर्पूरी ठाकुर जी देहांत भइल तs नेता बिरोधी दल के चुनाव के सवाल आ गइल. लालू जी, के अलावा मुंशी लाल राय, अनूप लाल जादव भी ई पद पावे खातिर गुना भाग में लगल रहन. ओह घरी पप्पू जादव मधेपुरा के छात्र नेता रहन. बाइस-तेइस बरिस उमिर रहे. लालू जी के मदद खातिर पप्पू जादव मधेपुरा से पटना आइल रहन. लालू जी के पक्ष में बहुत जादा विधायक ना रहन. लेकिन जर-जोगाड़ से लालू जी के जीते लायक समरथन जुट गइल.
पप्पू जादव पs पहिला केस

लखन चा कहले, पप्पू जादव एक बेर इंटरभियू में कहले रहन कि लालू जी के जितावे में उनकर भी सहजोग रहे. लेकिन लालू जी के जितला के अगिला दिन ही बड़हन धमाका हो गइल. पटना के अखबार में खबर छप गइल कि कांगरेस नेता शिवचनदर झा के हत्या खातिर मधेपुरा से पप्पू जादव नांव के एगो बड़का किरिमनल आइल बा. पप्पू जादव भोरे-भोर जब ई खबर पढ़ले तs दिमाग सन्न रह गइल. ओह घरी उनका खिलाफ आज ले कवनो केस मोकदमा ना भइल रहे. एह तरे पहिला मोकदमा ठोका गइल. पुलिस गिरफ्तारी खातिर छापा मारे लागल. गिरफ्तारी से बांचे खातिर ऊ कुछ दिन लइकन साथे होस्टल में लुकाइल रहले. फेन कलकता भाग गइले. जब ऊ ना पकड़इले तs पुलिस कुर्की-जपती में उनका घर के खिड़की-केंवाड़ी उखाड़ ले गइल. ई सब होत हवात 1990 के बिधानसभा चुनाव आ गइल. ओह घरी लालू जी सांसद रहन अउर टिकट बांटे में उनकर बहुत चलती रहे. तब ले पप्पू जादव के उमिर 25 साल हो गइल रहे. छात्र नेता के रूप में पप्पू जादव के मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा में बहुत नांव हो गइल रहे. छवि भी दबंग रहे. धाक देख के पप्पू जादव भी चुनाव लड़े के मन बनवले.

लालू जी के पहिला चाइलेंज देले पप्पू जादव



रघुनंदन पूछले, तह का भइल ? लखन चा कहले, पप्पू जादव टिकट के आस में लालू जी भी पहुंचले. 1988 के सहजोग के इयाद दिया के जनता दल से टिकट के मांग कइले. लेकिन लालू जी टिकट दियावे से इनकार कर देले. तब पप्पू जादव लालू जी के चाइलेंज कर देले कि ऊ जरूर चुनाव लड़िहें अउर जीत के भी देखइहें. मधेपुरा जिले के सिंहेश्वर बिधानसभा सीट से ऊ निरदलीय परचा भर देले. इहां से जनता दल के टिकट मिलल रहे सियाराम प्रसाद जादव के. लालू जी अपना पसंद के कंडिडेट उतरले रहन. कहां 25 साल के लइका पप्पू जादव अउर कहां लालू जी अइसन बरियार नेता. कवनो तुलना ना रहे. लालू जी सियाराम जादव के जितावे खातिर पूरा ताकत लगा देले. खूब प्रचार भइल. लेकिन पप्पू जादव के ताकत के अंदाजा लगावे में लालू जी फेल हो गइले. पप्पू जादव निरदलीयो खाड़ा भइला के बाद करीब 20 हजार भोट से चुनाव जीत गइले. 1990 में लालू जी मुखमंतरी बनले तs जरूर लेकिन बहुमत हासिल ना रहे. सरकार चलावे खातिर उनका पप्पू जादव के भी समर्थन के दरकार रहे. पुरान बात भुला के पप्पू जादव भी लालू जी के साथे आ गइले.

लालू जी के पप्पू जादव के दोसरका चाइलेंज

भवेश भइया सवाल कइले, का लालू जी अउर पप्पू जादव के मेल भइल ? लखन चा जवाब देले. पप्पू जादव एक बेर कहले रहन, 1990 के दौरान ऊ नौजवान जादव नेता के रूप बहुत तेजी से उभरत रहन लेकिन ई बात लालू जी के पसंद ना रहे. 1991 में लोकसभा के चुनाव आइल तs ऊ एक बेर फेन लालू जी से टिकट के मांग कइले. ऊ पूर्णिया से चुनाव लड़ल चाहत रहन. लालू जी फेन जनता दल के टिकट देवे से इंकार कर देले. लालू जी के ई रवइया से अनराज पप्पू जादव बगावत कर देले. 26 साल के पप्पू जादव पूर्णिया लोकसभा सीट से निर्दलीय नौमनेशन कर देले. ऊ लालू जी से कह देले कि पूर्णिया में जनता दल से चाहे जेकरा टिकट मिले लेकिन जीत उनके होई. पप्पू जादव के अलावा इहां से भाजपा के जनार्दन प्रसाद जादव, सीपीआइ के अजीत सरकार अउर कांगरेस से उदय सिंह खाड़ा रहन. 1991 के लोकसभा चुनाव में मंडल-कमंडल के हावा रहे. पूर्णिया में चुनाव के दिन बारह-बजत बजत बूथ लूट अउर हिंसा के आरोप लगे लागल. ओह घरी पूर्णिया के कलक्टर रहन एसएस बर्मा. बहुत कड़क अफसर रहन. ऊ शिकायत के जांच कइला के बाद करीब 300 बूथ पs गड़बड़ी के बात चुनाव आयोग के भेज देले. टीएन शेषन के जमाना रहे. ओही दिन सांझ के पूर्णिया के चुनाव रद्द कर दिहल गइल.

कानूनी लड़ाई में चार साल बिना एमपी के रहल पूर्णिया

लखन चा के कहानी अब अंतिम पड़ाव पs पहुंच गइल रहे. चुनाव के बाद जब काउंटिंग भइल तs पूर्णिया को भोट ना गिनाइल. ई मामला अदालत में पहुंच गइल. चार साल कानूनी लड़ाई चलल. तब ले पूर्णिया बिना सांसद के रहल. 1995 में अदालत पूर्णिया में दोबारा चुनाव करावे के फैसला देलस. तब ले लोकसभा के कार्जकाल करीब एक्के साल बांचल रहे. लेकिन कोर्ट अपना आदेश में ई शर्त लगा देलस कि ई चुनाव में कंडिडेट उहे रहिहें जे 1991 में खाड़ा भइल रहन. 1995 में दोहरिया के चुनाव भइल. लालू जी के बिरोध के बादो पप्पू जादव ई चुनाव जीत गइले. एतने ना 1996 में जब लोकसभा के चुनाव भइल तs पप्पू जादव अबकी बेर समाजवादी पार्टी के टिकट पs पूर्णिया से जीत के तहलका मचा देले. एक समय रहे जब बिहार में पप्पू जादव के तूती बोलत रहे. लेकिन सब दिन एक समान ना होखे. आज उनका खातिर एमपी के कहे, एमएलए चुनाव जीतल भी मोसकिल हो गइल बा. (लेखक अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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