Bhojpuri: जब लालू यादव जज साहब से कहले- हुजूर बेल दे दीहीं, मिलल जवाब-हाथी प चढ़ के शहर घूमे खातिर?

एक बार कोर्ट में लालू दोषी करार दिहल जा चुकल रहले. अब सजा के ऐलान होखल बाकी रहे. पेशी के समय लालू जज साहब से गुहार लगवले- हुजूर, बेल दे दिहल जाय. तब जज साहब पलट के कहलें- तहरा के बेल एह खातिर दे दिहल जाय कि तू हाथी प चढ़के पूरा शहर घूमss.

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  • Last Updated: April 20, 2021, 2:08 PM IST
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माधुरी कुमारी

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद सुप्रीमो लालू यादव फेर चर्चा में बाड़े. ऊ चारा घोटाला में करीब साढ़े तीन साल के जेल के सजा काट रहल बाड़े. अब उनका के झारखंड हाईकोर्ट से बेल (जमानत) मिल गइल बा. ऐह से लालू के बेल से ही जुड़ल एगो घटना के बतावल प्रासंगिक बा. अइसे त लालू कवनो चीज के इवेंट (बड़ आयोजन) बना देबे में महारथ राखेले. बात के बतंगड़ बना ओकरा के अपना पक्ष में कर लेबे के कला में भी लालू सिद्धहस्त हवें.

लालू कए बार जेल जा चुकल बाड़े. अनेक बार उनका बेल भी मिलल बा. बाकी हर बार ऊ जेल जाए से लेके ओहिजा से छूटला के बड़ इवेंट बना देत रहल बाड़े. जेल जइहें त पूरा तामझाम देखागत अउर बेल पर अइहें त स्वागत-सत्कार भी ओहिसहीं बड़ पैमाना पर. लालू अइसन देखावत रहल बाड़े कि जेल जाए से या ओहिजा से आवे से उनका प कवनो फरक ना पड़ेला. उनका समर्थक लोगन के इ सब अच्छा लागेगा . बाकी कई अइसन लोग भी बाड़े जेकरा ई सब पसंद ना ह. हां, त बात लालू के जमानत पर सुनवाई के एगो घटना के. चारा घोटला के देवघर कोषागार मामला के सुनवाई सीबीआई के विशेष जज शिवपाल सिंह के अदालत में होत रहे. कोर्ट में लालू दोषी करार दिहल जा चुकल रहले. अब सजा के ऐलान होखल बाकी रहे. पेशी के समय लालू जज साहब से गुहार लगवले- हुजूर, बेल दे दिहल जाय. तब जज साहब पलट के कहलें- तहरा के बेल एह खातिर दे दिहल जाय कि तू हाथी प चढ़के पूरा शहर घूमss.

जमानत के भी देखे लायक प्रदर्शन बना देत रहले लालू
जज साहब आगे कहलें- तू जमानत के भी प्रदर्शन के चीज बना देले बाड़अ. जज साहब के एतना कहला प लालू चुप हो गइल रहले. बात ओह समय के ह जब चारा घोटाला मामला में लालू यादव पटना के बेउर जेल में बंद रहले. बेल मिलला के बाद जब ऊ 9 जनवरी 1999 के जेल से बाहर निकलले त हाथी पर बइठ के अपना घरे गइल रहले. हजारों समर्थक लालू के बेल मिलला के खुशी में नाचत-गावत हाथी के साथे चलत रहलन. खूब नाराबाजी होत रहल. पटना के सड़कन पर देखे लायक जश्न होत रहे. लागत रहे कि लालू जेल से ना बल्कि कवनो युद्ध जीत के आ रहल बाड़े.

विरोधी लोगलन के देखावल चाहत रहले आपना दम

बेल मिलला के बाद लालू जेल से निकलले त हाथी प चढ़ के एह खातिर चलले जवना से उनकर विरोधी लोग भी एह ताकत के देख लेसु जा. लालू ई संदेश दिहल चाहत रहले कि जेल जाए से उनकर ताकत घटल नइखे. केहू उनकर (लालू के) बाल बांका भी ना क सकेला. एह जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन से लालू आपन समर्थकन के भी संदेश देबे में सफल रहले कि उनकर दमखम पहिले जइसने कायम बा. ओह समय बिहार के मुख्यमंत्री के कुर्सी पर लालू के पत्नी राबड़ी देवी विराजमान रहली. प्रशासन पर लालू के मजबूत पकड़ रहे. एक तरह से उनका इशारा प ही राजपाट चलत रहे. इहे कारन रहे कि पटना जिला प्रशासन लालू के हाथी वाला जुलूस के मामला में कवनो कार्रवाई ना कइलस.



कोर्ट में पेश होखे गइल रहले गरीब रथ पर सवार होके

बात 2002 के ह. चारा घोटाला के एगो मामला में रांची कोर्ट में सुनवाई चलत रहे. लालू यादव के एह मामला में रांची के कोर्ट में पेश होखे के रहे. एह पेशी के भी लालू एगो बड़ इवेंट बना देले. उ नजारा भी बहुत दिलचस्प रहे. लालू यादव गरीब रथ पर सवार हो के पटना से रांची गइल रहले. उनका रथ के पीछे एक हजार से ज्यादा चार चक्कावाली गाड़ी चलत रहली स. जवना रास्ता से लालू के ई विशाल काफिला गुजरत रहे ओहिजा कुछ समय तक अइसन धूल उड़त रहे कि कुछ देखाइए ना देत रहे. उनकर काफिला देखे सड़क पर आइल लोग धूल के उड़ला पर एने-ओने हो जात रहलें. एह तरह से रंग बनावत व ताकत देखावत लालू अपना पूरा लाव लश्कर से साथ कोर्ट में पेश होखे रांची पहुंचले. सुनवाई के बाद कोर्ट लालू के न्यायिक हिरासत में भेज देले रहे. (लेखिका माधुरी कुमार पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)
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