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जब लालू जी गवले, लागल झुलनिया के धाक्का बलम कलकात्ता पहुंच गये

जब लालू जी गवले, लागल झुलनिया के धाक्का बलम कलकात्ता पहुंच गये

लालू यादव के भोजपुरी प्रेम जगजाहिर बा. लागल झुलनिया के धाक्का से लेके कए गो गाना भी उ गुनगुनात रहलें.

लालू यादव के भोजपुरी प्रेम जगजाहिर बा. लागल झुलनिया के धाक्का से लेके कए गो गाना भी उ गुनगुनात रहलें.

भोजपुरी क्षेत्र में लोकगीत के बहुते महत्व बा. एकरा से कोई अछूता नइखे. लालू यादव त कए बार भोजपुरी गाना गुनगुनात रहलें.

कन्हैया चा के लइका के बियाह रहे। दूपहरिये से बरियात जाए के तइयारी होत रहे। उमाशंकर अउर मुकेश कहले कि हमनी के उमेश भइया के कार से चले के। उमेश भइया के नाम सुन के हमहूं खुश हो गइनी। उनका भिरी खिस्सा के खजाना बा। एक से एक कहानी। ना राजा ना रानी, खांटी राजनीत वला। उनकर अलमारी किताब से भरल बा। जब देखs तब अखबारे, किताब में मुड़ी गड़वले रहेले। उमेश भइया के साथे कहीं जाये के मतलब रहे रस्ता भर के अनमाना। उनका कहानी में कब रस्ता खत्म हो जाई, बुझैइबे ना करे। किरिन डूबे के पहिले बरियात के गाड़ी खुले लागल। हमनियो के उमेश भइया के कार में बइठनी जा। उमेश भइया कार चलावत रहन। हम उनका साथे आगा बइठल रहीं। उमाशंकर अउर मुकेश पिछिला सीट पs रहन।

लागल झुलनिया के धाक्का...
ओह दिन लगन बरियार रहे। रस्ता में कइअक गो बरात के गाड़ी मिलल। आगा एगो गाड़ी पs गाना बाजत रहे, लागल झुलनिया के धाक्का बलम कलकत्ता पहुंच गये... एक दू मिनट के बाद जब हमनी के गाड़ी के पास मिल गइल तs उमेश भइया कहले, ई मशहूर लोकगीत सुन के लालूजी की इयाद आ गइल। तs हम कहनी, ई लोकगीत से भला लालू जी के का संबंध बा ? उमेश भइया हंस के कहले, लालू जी के लोकगीत-संगीत से बहुल लगाव रहल बा। उनका भासन में भोजपुरिया कहाउत अउर गीत भरल रहेला। 2017 में लालू जी अखिलेश जादव के परचार करे खातिर यूपी गइल रहन। एक जगे भासन देत-देत अचके में लालू जी गावे लगले, लागल लागल झुलनिया के धाक्का बलम कलकत्ता पहुंच गये... लालू जी के कहे के मतलब रहे कि अखिलेश जादव चुनाव में मोदी जी के अइसन धाक्का मरिहें कि उ बहुत दूर फेंका जाइहें।

लालू जी के देखादेखी दोसरो लोग गावे लागल
रोड पs गाड़ी के रेला बढ़ गइल तs उमेश भइया चुप लगा गइले। जब रस्ता फांफर मिलल तs उनकर कहानी फेन शुरू भइल। लालू जी ई लोगगीत के चुनावी रंग में अइसन रंगले कि उनका देखा-देखी दोसरो लोग अइसहीं गावे लागल। लालू जी के नकल करे वला लोग बिहारो चुनाव में ई गीत गावले। छोटा लालू के नाम से मशहूर नेता 2015 अउर 2019 के चुनाव में भीड़ जुटावे खातिर खूब ई गीत गवले। लेकिन ई लोकगीत के असली मरम बेरोजगारी से जुड़ल बा। जब बियाह के बाद दुलिहन ससुरार आवत बाड़ी तs उ अपना मरद के ना कमवला पs ताना मारी तारी। ई ताना सुन के मरद कमाये खातिर कलकत्ता चल जात बाड़े। ई लोकगीत में बेरोजगारी अउर बिरह के बेदना बा। लेकिन कई लोग एकरा के हंसी मजाक अउर रास -रंग से जोड़ देला। जइसे 1971 में एगो फिलिम आइल रहे जौहर महमूद इन हौंगकौंग। एह फिलिम में भी ई लोकगीत के हिन्दी गाना बना के शामिल कइल गइल रहे। आशा भोसले के गावल गीत के बोल रहे- लागा लागा झुलनिया के धाक्का बलम कलकत्ता पहुंच गये।

लईकांई से लोकगीत से लगाव
कार सरपट भागत रहे। उमेश भइया तनिका चुप भइले तs मुकेश कहले, लालू जी अइसन नेता के गीत-गवनई से कइसे लगाव हो गइल ? तs उमेश भइया कहले ई बात के समझे खातिर तहरा लालू जी के किताब- गोपालगंज से रायसीना पढ़े के परी। ई सुन के उमाशंकर कहले, का भइया, अब हमनी के कहां किताब बढ़े जाइब जा, तूंही सुना द कहानी। उमेश भइया कहले, ई किताब में लालू जी कहले बाड़े कि उनकर जीवन मामूली ढंग से शुरू भइल रहे। उनका घर के पीछा ब्रह्म बाबा के अस्थान रहे। उनका गांव के एगो काका अहिजे सोरठी बिरजाभार (भोजपुरी प्रेम लोककथा) गावत रहन। लालू जी लइकाईं में बड़ी चाव से ई लोकगीत सुनत रहन। लालू जी के ओह घरी चैता, बिरहा, होली, सोरठी सुने में बड़ा मन लागत रहे। लालू जी जब मुखमंतरी बन गइले तबो उनकर लोकगीत के प्रति प्रेम बनल रहल। मुखमंतरी आवास में उ कई बेर चैता गववले रहन।

लालू जी भिखारी ठाकुर के प्रशंसक
उमेश भइया के कहानी आगा बढ़ल। लालू जी रायबहादुर भिखारी ठाकुर के भी बड़ा प्रशंसक रहन। बिहारी लोकसंस्कृति के आगा बढ़ावे में भिखारी ठाकुर लमहर जोगदान बा। सामाजिक सुधार पs लिखल उनकर नाटर आजो झोकझोर देला। भिखारी ठाकुर के नाटक मंडली के एगो बड़ कलाकार रहन रामचनदर मांझी। उनका 92 साल के उमिर में 2018 में संगीत नाटक अकादमी के पुरस्कार मिलल रहे। एक बेर लालू जी रामचन्दर मांझी से कहले रहन, आप जब तक जीएं, भिखारी ठाकुर के जिंदा रखें। 2017 में रामचनदर मांझी जवाहर लाल नेहरू विश्वलिद्यालय में भिखारी ठाकुर के इयाद में कार्यक्रम कइले रहन। 92 साल के उमिर में रामचनदर मांझी के अभिनय देख के जेएनयू के शिक्षक अउर छात्र अचरज में पड़ गइल रहे लोग। लालू जी आपन लोकसंस्कृति के ज्ञान के राजनीत में अइसन प्रयोग करत रहन कि सुने वला के हंसी छूट जात रहे।

Tags: Bhojpuri News, News in Bhojpuri, UP, उत्तर प्रदेश, बिहार, यूपी

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