Bhojpuri Special: जब दारू पs रोक लागल तs सरकार गिरा देले माफिया!

बिहार में एह घरी तs शराबबंदी पs पक्ष अउर विपक्ष में घमासान मचल बा. लगत बा कि एकरा से बड़ कवनो मुद्दे नइखे. पहिला बेर तs नशखोरी रोके खातिर बिहार में एतना कड़ाई भइल बा, लेकिन ओकरो पs राजनीत तेज हो गइल बा. बिपक्ष के नेता तेजस्वी जादव के कहनाम बा कि नीतीश सरकार के शराबबंदी फेल हो गइल बा.

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  • Last Updated: March 12, 2021, 5:29 PM IST
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बिहार दिवस (22 मार्च) मनावे के तइयारी होत रहे. आयोजन समिति के बइठक में बिहार के पुरानका गौरव पs चरचा भइल. जेपी आंदोलन के मशहूर नेता कलानाथ कमल, लेखक धरमदेव राय अउर समाजसेवी रंगबहादुर आपन-आपन बिचार रखले. मीटिंग खतम भइल तs रंगबहादुर कहले बिहार में एह घरी तs शराबबंदी पs पक्ष अउर विपक्ष में घमासान मचल बा. लगत बा कि एकरा से बड़ कवनो मुद्दे नइखे. पहिला बेर तs नशखोरी रोके खातिर बिहार में एतना कड़ाई भइल बा, लेकिन ओकरो पs राजनीत तेज हो गइल बा.

बिपक्ष के नेता तेजस्वी जादव के कहनाम बा कि नीतीश सरकार के शराबबंदी फेल हो गइल बा. उनका मोताबिक, शराबबंदी लागू भइला के बाद बिहार में लगभग 50 लाख लीट शराब आ चुकल बा. उनकर आरोप बा कि बिहार में शराब के नजाइज धंधा 20 हजार करोड़ तक ले पहुंच गइल बा. कलानाथ कमल कहले, शराबबंदी खाली कानून से लागू ना होई. एकरा खातिर हर अदिमी के अपना मन में सोचे के पड़ी. शराब से धन और शरीर दूनो के नोकसान बा. पीयला-बेंचला पs जेल जाये के खतरा बा. एकरा बादो अगर शराब के धंधा चल रहल बा तs एकरा खातिर के दोसी के बा ? शराब माफिया में तs अइसन ताकत बा कि ऊ सरकार के भी गिरा सकेला.

शराब लॉबी गिरवले रहे मोरारजी सरकार

कलानाथ कहले, अगर मोरारजी देसाई के सरकार पांच साल चल गइल रहित तs आज से 45 साल पहिलहीं देश में शराबंदी लागू हो गइल रहित. लेकिन शराब माफिया उनकर सरकार के चले ना देले. नीतीशो जी बिधानसभा चुनाव के समय कहले रहन कि शराब माफिया उनका के हरावल चाहत रहन. हारत हार बंचले भी. असल में शराब के धंधा में रोपेया के अइसन बरसात बा कि एकरा पs रोक के तुरंते बिरोध होखे लागे ला. कुछ नेता अउर अफसर के मेल से माफिया सरकार के डांवडोल करे लागे ले. मोरारजी देसाई बहुत कड़क प्रधानमंत्री रहन. शराब के बेलकुल खिलाफ रहन. 1978 में ऊ शराबबंदी लागू कइले. ऊ जानत रहन कि शराबबंदी अगर एक बेर पूरा देस में लागू होई तs बबाल मच जाई. एह से ऊ घोषण कउले कि पहिला चरण में देश भर के एक चउथाई सरकारी शराब के दोकान बंद कइल जाई. लेकिन जइसहीं एकर एलान भइल, बिरोध हेखे लागल.
शराब माफिया गरलवले रहन मोरारजी सरकार ?

कलानाथ के बात जारी रहे. पूर्व सांसद अउर बरिष्ठ समाजवादी नेता रामजीवन सिंह एक बेर शराब अउर समाज के बिचारगोष्ठी में कहले रहन, 1978 में मोरारजी सरकार चरणबद्ध रूप से शराबबंदी के एलान कइले रहे. एह एलान से से ‘लीकर सिंडिकेट’ में खलबली मच गइल रहे. बड़का-बड़का शराब माफिया मोरारजी सरकार के गिरावे खातिर साजिश रचे लगले. आखिरकार मोरराजी सरकार दूए साल में गिर गइल. अइसे तs बिबाद जनसंघ के नेता के दोहरी सदस्यता (पार्टी अउर संघ) पs शुरू भइल रहे लेकिन एह बिबाद के हवा देवे में शराब लॉबी के भी हाथ रहे. राजनारायण दोहरी सदस्यता के अइसन बिरोध करे लगले कि मोरारजी सरकार डंवाडोल हो गइ. चरण सिंह के परधानमंतरी बने के लालसा रहे. शराब लॉबी चाहत रहे कि मोरारजी सरकार कइसहूं गिर जाव जवना से कि शराबबंदी लागू ना हो सके. मोरारजी देसाई नियम के बहुत पक्का रहन. कतनो बड़ नेता होखस ऊ नियम से कवनो समझौता ना करत रहन.

सपना रहल अधूरा



कलानाथ मोरारजी देसाई के कड़ियल मिजाज के कहानी सुनवले. पूर्व सांसद अउर मंतरी रामजीवन बाबू के मोताबिक, एक बेर कर्पूरी ठाकुर जी उनका साथे (रामजीवन बाबू) परधानमंतरी मोरारजी देसाई से मिले खातिर गइल रहीं. पूर्व सांसद हुकुमदेव नारायण जी भी साथे रहीं. मोलकात सांझ 6 बजे के 5 मिनट पs तय रहे. मोरारजी देसाई समय पs अपना चेम्बर में बइठल रहीं. कर्पूरी जी ऊहां पहुंचले तs समय हो गइल रहे 6 बज के 7 मिनट. तब मोरारजी देसाई कहले, “आप दो मिनट लेट आये हैं. इसलिए अब मुलाकात कल सुबह 9 बज कर 30 मिनट पर होगी.” मोरारजी देसाई के सख्त रवैया से नेता लोग भी घबरात रहे. जनता पार्टी के अधिका नेता मोरारजी देसाई से मुक्ति में ही आपन भलाई समझले. सरकार गिर गइल. चरण सिंह परधानमंतरी बनले. शराबबंदी के सपना अधूरा रह गइल.

हरियाणा में कइसे फेल भइल शराबबंदी ?

कलानाथ के बात सुन के धरमदेव राय कहले, अइसने कहानी बंसीलाल के बा. बंसीलाल इमरजेंसी में बिबादित नेता रहन. लेकिन कांग्रेस से अलगा भइला के बाद ऊ जनसरोकार के राजनीत कइले. 1996 के हरियाणा बिधानसभा चुनाव में बंसीलाल हरियाणा बिकास पार्टी के बैनर पs मैदान में कूदल रहन. भाजपा साथे समझौता कइले रहन. चुनाव में ऊ घोषाणा कइले रहन कि अगर सरकार बनी तs शराबबंदी लागू कइल जाई. शराब से तबाह घर-परिवार के लोग बंसीलाल के भरपूर समर्थन देले. सरकार बन गइल तs ऊ छव महीने के भीतरे शराबबंदी लागू कर देले. लेकिन सरकार में उनकर बिरोध शुरू हो गइल. मंतरी अअर अफसर कहे लगले कि शराबबंदी से 1300 करोड़ रोपेया के नोकसान हो गइल. शराब पs रोक के बाद हरियाणा में अगर-बगल राज्य से तस्करी होखे लागल. हालत अइसन खराब हो गइल कि माफिया स्कूल के लइकन से शराब के तस्करी करावे लगले. जेकरा भिरी साधन रहे ऊ पंजाब अउग दिल्ली जा के पीये लागल. घर के औरत त परेशान हो गइली सन. पहिलहूं से स्थिति खराब होखे लागल. एकरा बाद शराबबंदी के अइसन बिरोध होखे लागल कि बंशीलाल डेरा गइले. सरकार बचावे खातिर 21 महीना बाद ऊ शराब के फिरी कर देले. दारू फेन बेरोकटोक बेंचाये लागल.

....तब का कानून खराब हो गइल?

बिहार में भी हरियाणा जइसन माहौल बनावे के कोशिश हो रहल बा. कांगरेस के नेता कहत बाड़न कि शराब के दाम तीन गुना बढ़ा के बेंचे के मंजूरी दिहल जाव. दारू महंगा हो जाई तs केहू ना पीही. लेकिन ई का माने वला बात बा? जब पीये वला गहना-गुरिया, खेत-बधाऱ बेचे खातिर तइयार बा तs ओकरा पइसा के कवनो कमी होई ? ई तs घर के नास करे वला बात हो जाई. बिरोधी दल चाहे जवन कहे लेकिन नीतीश जी मोरारजी देसाई अइसन नियम पर अड़ल बाड़े. ऊ कह देले बाड़े कि शराबबंदी से कवनो समझौता ना होई. बिहार सरकार करोड़ो रोपेया के दारू जप्त कइलस, केतना दरोगा-पुलिस के सस्पेंड कइलस. तबहूयों दारू बंद ना भइल . अगर लोग कानून के पालन ना करस तs का कानून के खराब कहल जाई ? कलानाथ के सवाल पs धरमदेव राय अउर रंगबहादुर हुंकारी में मुड़ी डोलावे लागले. (लेखक अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ स्तंभकार हैं.)
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