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Bhojpuri Spl: जब मोदी जी के लोर में सराबोर राजनीत हो गइल निरमल

आज ले किताबे में पढ़ले रहीं कि बिरोधी भइला के बादो जवाहर लाल नेहरू (Jawahar Lal Nehru) संसद में अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) के बड़ाई कइले रहन. लेकिन परसों तs अपना आंखें से देखनी कि कटुता के कोना में मिठास कइसे छिपल रहेला. राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) अउर कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद (Gulam Nabi Azad) के ढर-ढर बहत लोर दुरलभ दृश्य रहे.

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पटना के गांधी घाट. गंगा जी के कलकल बहत धार बुझाये कि कान में मिसरी घोरत होखे. सीढ़ी पs बइठ के चार संघतिया बतिआवत रहन. रोहित कहले, आज ले किताबे में पढ़ले रहीं कि बिरोधी भइला के बादो जवाहर लाल नेहरू संसद में अटल बिहारी वाजपेयी के बड़ाई कइले रहन. लेकिन परसों तs अपना आंखें से देखनी कि कटुता के कोना में मिठास कइसे छिपल रहेला. राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अउर कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद के ढर-ढर बहत लोर दुरलभ दृश्य रहे. राहुल कहले, जब आंख के लोर में मन सराबोर हो जाला तs सभ मइल धोआ जाला. मोहित कहले, भावना के बेग नदी के धार से भी तेज होला. जब उमड़ जाई तs रोकले ना रोकाई. नेता लोग एकरा से कइसे अछूता रह सकेला. कुंदन तनी सोच के कहले, हमरा बिचार से गुलाम नबी आजाद के भाषण मौजूदा समय में ऐतिहासिक मानल जाई. तोर-मोर के जमाना में कांग्रेस नेता के मुंह से वाजपेयी जी के बड़ाई अनमोल बोल रहे.

इंदिरा गांधी के नजर में अटल जी
कुंदन, गुलाम नबी अउर वाजपेयी जी वला प्रसंग सुनावे लगले. गुलाम नबी आजाद संसद में बतवले कि पहिले के राजनीत में बिरोध के बीच भी कइसन अपनापन रहे. 1980 में इंदिरा गांधी दोबारा सत्ता में लौट आइल रही. जनता पार्टी टूट-फूट के छितरा गइल रहे. जनसंघ के जगह पs भारतीय जनता पार्टी बन गइल रहे. 1980 के लोकसभा चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी नयी दिल्ली सीट से जीतल रहन. इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री रही. उनकर राजनीतिक सचिव रहन माखनलाल फोतेदार. फोतेदार कवनो समस्या के चुटकी में हल कर देत रहन एह से उनका चाणक्य कहल जात रहे. ओह घरी गुलाम नबी आजाद युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहन. गुलाम नबी के संजय गांधी से बहुत दोस्तियारी रहे. उ जब-तब संजय गांधी से मिले खातिर पीएम हाउस जात रहन. माखन लाल फोतेदार कसमीरे के रहे वला रहन एह से गुलाम नबी के बहुत मानत रहन. गुलाम नबी अपना भाषण में कहले, “मैं इंदिरा जी की वो बात कभी भूल नहीं सकता, वे मुझे और फोतेदार जी को बताती थीं कि आप लोग जरा अटल जी के सम्पर्क में रहा करो. हमेशा कुछ सीखने का मौका मिलेगा.”

बिरोध में भी अपनापन
कुंदन अपना लय में बोलत रहन. मोरारजी सरकार में अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री रहन. चरण सिंह गृह मंत्री रहन. कहल जाला कि चरण सिंह के राजनीतिक रंजिश में इंदिरा गांधी के जेल भेजल गइल रहे. ओह घरी जनता पार्टी अउर कांग्रेस में नफरत के भाव रहे. लेकिन एकरा बाद भी इंदिरा गांधी के नजर में अटल बिहारी वाजपेयी को ओहदा बहुत ऊंचा रहे. इंदिरा गांधी वाजपेयी जी के राजनीति के ज्ञाता मानत रही. जइसे कि जवाहर लाल नेहरू मानत रहन. गुलाम नबी ई बात भी बातवले कि उनका वाजपेयी जी से केतना सीखे के मिलल. 1991 से 1996 तक केन्द्र में नरसिम्हा राव के सरकार रहे. गुलाम नबी के मोताबिक, नरसिम्हा राव के सरकार अल्पमत के सरकार रहे. कवनो गठबंधन के सहजोग से भी बहुमत ना रहे. गुलाम नबी ओह घरी संसदीय कार्य मंत्री रहन. अटल बिहारी वाजपेयी विपक्ष के नेता रहन.

तनिका गरम, तनिका नरम
रोहित के सवाल पs कुंदन कहले, अटल जी अइसन मजबूत नेता के सामने अल्पमत के सरकार कबो डंवाडोल हो सकत रहे. संसदीय कार्यमंत्री होखे के नाते सदन के सुचारू रूप से चलावे के जिम्मेवारी गुलाम नबी पs रहे. एह मोसकिल समय में गुलाम नबी के अटल जी बहुत सहयोग कइले. ऊ अटल जी से सीखले कि कइसे कवनो समस्या के हल निकालल जा सकेला. बिपक्ष के भी बात रहे अउर सरकार के भी बात रहे, गुलाम नबी ई मंतर अटल जी से ही सीखले रहन. अटल जी के सहजोग से सरकार पांच साल तक चलल. भला बताईं कि कवन विरोधी नेता कमजोर सरकार के गिरावे के बदले चलावे के बात सोंची ? ई बाजपेयी जी जइसन नेता ही कर सकत रहे. बाजपेयी जी के ई सीख गुलाम नबी के तब काम आइल जब ऊ 2014 में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष बनले. तनिका गरम, तनिका नरम के नीति अपनवले. सदन में एक-दू दिन बिरोध ओकरा बाद डिसकसन. एकरा वजह से कांग्रेस आपन बात भी कह देवे अउर बिल भी पास हो जाए. राजनीति में हरमेसा झगड़ा ना कइल जा सकेला.

दू लफज मीठ बोलल भी गुनाह बा ?
राहुल कहले, गुलाम नबी के तs तनिको भरोसा ना रहे कि प्रधानमंत्री नरेनदर मोदी उनकर अतना बढ़-चढ़ के तारीफ करिहें. आज के दौर में कवनो नेता शायदे आपन कट्टर विरोधी के अइसन तारीफ करत होई. मोहित सवाल पूछले, का नरेन्द्र मोदी के तारीफ से गुलाम नबी के मोसकिल भी हो सकेला ? तs राहुल कहले, ई सवाल गुलाम नबी से पूछल जा चुकल बा. दरअसल नरेनदर मोदी अपना भाषण में मजाक कइले कि उनकर तारीफ से हो सकेला कि गुलाम नबी के ग्रुप-23 के प्रतिक्रिया भी झेले के पड़ जाय. ग्रुप-23 कांग्रेस के ऊ असंतुष्ट गुट हs जे पार्टी में बड़ बदलाव खातिर सोनिया गांधी के चिट्ठी लिखले रहे. गुलाम नबी के एह सवाल के जबाब देले, ई तs कांग्रेस खातिर फकर के बात बा कि प्रधानमंत्री ओकर नेता के तारीफ कइले, ओकरा के सलाम कइले. कांग्रेस पार्टी में सभे समझदार बा. केहू लइका अइसन मुंह फुलावे वला नइखे. दरअसल ई सवाल एह से पूछल जा रहल बा काहे कि राजनीति में सोच के दायरा बहुत सिकुड़ गइल बा. अगर सत्ता पक्ष अउर विपक्ष के नेता मिलस-बतियावस चाहे एक-दोसरा के बड़ाई करस तs लोग इहे समझे लागे ला कि जरूर कवनो खिचड़ी पाक रहल बा. नेता का इंसान ना हवें ? इनका मन में कवनो भाव नइखे ? अगर दू लफज मीठ बोल देले तs एकरो में राजनीत बा ? राहुल के बात पs सभ कोई चुप लगा गइल. (लेखक अशोक कुमार शर्मा जी वरिष्ठ स्तंभकार हैं.)

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