Bhojpuri: जब तूफान में उड़ गइल रहे ट्रेन तs खूब भइल रहे राजनीति, पढ़ीं पूरा मामला

आज से 40 साल पहिले बिहार में अइसन तूफान आइल रहे कि चलत टरेन उड़िया के नदी में गिर गइल रहे. ई घटना के अइसे तs कइएक गो बजह रहे लेकिन आंधी-पानी भी ओकरा में परमुख रहे. ई घटना में करीब 300 लोग मारल गइल रहन. ओह घरी बिहार अउर केन्द्र में कांग्रेस के राज रहे लेकिन तबहुंओ खूब राजनीत भइल रहे.

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अबहीं सभ जगह चकरवाती तूफान यास के चर्चा हो रहल बा. तूफान अउर बेरहम बरखा से कई जगह तबाही भी मचल बा. चकरवाती तूफान हरमेसा परलय मचा के जाला. कोरोना महामारी के बीच ई एगो नाया आफत आ गइल. आज से 40 साल पहिले बिहार में अइसन तूफान आइल रहे कि चलत टरेन उड़िया के नदी में गिर गइल रहे. ई घटना के अइसे तs कइएक गो बजह रहे लेकिन आंधी-पानी भी ओकरा में परमुख रहे. ई घटना में करीब 300 लोग मारल गइल रहन. ओह घरी बिहार अउर केन्द्र में कांग्रेस के राज रहे लेकिन तबहुंओ खूब राजनीत भइल रहे.

40 साल पहले आया था बेरहम तूफान

तारीख-6 जून 1981, समय- करीब 5-6 बजे सांझ. मोकामा- बिहार के खगड़िया जिला के बदलापुर स्टेशन. मानसी सहरसा रेल लाइन पs पसिंजर टरेन छुकछुक कर के भागल जात रहे. ओह दिन बुझाये कि आसमान फाट गइल बा. घनघोर पानी. अइसन बरखा पड़त रहे कि कुछ देखल मोसकिल रहे. तूफान भी ओतने तेज. केतना बड़का फेंड़ उखड़ के फेंका गइले. एही बीच बदला घाट अउर धमारा घाट स्टेशन के बीच बनल रेलपुल 51 पर टरेन पहुंचल. तूफान अतना तेज रहे कि जातरी लोग टरेन के खिड़की दरवाज बंद कर देले रहन. अभी टरेन पुले पs रहे कि बोगी में बइठल लोग के जोर से दू तीन बेर झटका लागल. एकरा बाद टरेन के सात बोगी पुल के रेलिंग तूर के नीचे बागमती नदी में समा गइल. आन्ही-पानी में केहू के कुछ ना बुझाइल. चीख पुकार मच गइल. सरकारी आंकड़ा के मोताबिक तीन सौ 12 लोग मारल गइल रहन. लेकिन घटना के देखे वला लोकल लोग के कहनाम रहे कि करीब आठ सौ लोग मारल गइल रहन. ओहघरी बिहार के मुखमंतरी रहन जगरनाथ मिसिर अउर रेल मंतरी रहन केदार पांडेय. दूनो कांग्रेसी नेता बिहार के रहे वला रहन. लेकिन एकरा बादो एह दुखद घटना पs उनका लोग में खूब राजनीत भइल रहे.

ट्रेन उड़ गइल तूफान में !
टरेन के डराइभर अउर फायरमैन के कहनाम रहे कि टरेन तूफान के झोंका में उड़ के नदी में गिर गइल रहे. चूंकि खिड़की, दरवाज बंद रहे एह से टरने पs तूफान के दवाब अतना बढ़ गइल कि बोगी नदी में फेंका गइल. लोकल रेलवे पुलिस के जांच में रेल लाइन पर एगो किसान अउर बैल के कटल शरीर मिलल रहे. कुछ लोग के कहनाम रहे कि जब ट्रेन पुल पs आइल ओही घरी के एगो बैल रेल लाइन पर आ गइल. किसान भी ओकरा के हांके खातिर रेल लाइन पs दउड़ गइले. ई देख के टरेन के डराइभर इमजजेंसी बरेक मार देले. इमरजेंसी बरेक मारला के चलते बोगी में अतना जोर से झटका लागल कि सात बोगी कपलिंग तूर के नदी में जा गिरल. एह घटना के जांच रेलवे के सेफ्टी कमिशनर एस एस मूर्ति कइले रहन. लेकिन उ कवनो नतीजा पs ना पहुंचले. बाद में इहे मान गइल कि किसान अउर बैल के देख के डराइभर के इमजरजेंसी बरेक लगवे के पड़ल. ओह घरी तूफान अउर बरखा बहुत तेज रहे. रेल लाइन पs ठीक से देखाई ना पड़त रहे. बरेक के झटका अउर तूफान के झोंका से टरेन के बोगी पानी में फेंका गइल.

दुख के घड़ी में भी राजनीत

बदलापुर स्टेशन के रेल हादसा बहुत भयंकर दुरघटना रहे. केतना अदिमी के जान गइल एकरा पs बिबाद होखे लागल. मुखमंतरी जगरनाथ मिसिर अउर रेल मंतरी केदार पांडे एक्के पाटी के रहन अउर बिहार के रहन लेकिन तब्बो दूनो अदिमी एक दोसरा के बिरोधी रहन. 1972 में जब केदार पांडे बिहार के मुखमंतरी रहन तs जगरनाथ मिसिल के पहिला बेर मंतरी बने के मौका मिलल रहे. लेकिन बिहार कांगरेस के दांवपेंच में केदार पांडे के 15 महीना बाद ही मुकमंतरी पद से हटे के पड़ल. 24 मंतरी उनका खिलाफ बगावत कर देले रहन. ओही घरी से दूनो अदिमी में छत्तीस के आंकड़ा बन गइल रहे. बगमती नदी में गिरल रेल बोगी से लाश निकाले के खातिर नेभी के गोताखोर बोलावल गइल रहे. छव दिन में 246 डेड बडी निकलल रहे. एकरा बाद रेलवे लाश खोजे के कम रोक देहस. मुखमंतरी जगरनाथ मिसिर एकर बिरोध कर देले. ऊ परधानमंतरी इंद्रा गांधी के चिट्ठी लिख के गोहार लगवले कि लाश खोजे के अभियान जारी राखे के आदेश दिहल जाव. नदी में गिरल बोगी में अभी भी बहुत लाश बा. नेभी के गोताखोर फेन नदी में घुसले तs 22 लाश अउर मिलल. मरे वला के सरकारी आंकड़ा 268 पहुच गइल.



मौत के संख्या पs बिबाद

जगरनाथ मिसरा के गांव बलुआ बजार पहिले सहरसा जिला में रहे. ओह घरी सुपौल अउर सहरसा एक्के जिला रहे. लोग के कहनाम रहे कि मरे वला अधिकतर अदिमी सहरसा जिला के ही रहन एह से जगरनाथ मिसिल एह मामला में बहुत सतर्क रहन. मौत के संख्या अउर मुआवजा के सवाल पs रेलवे अउर बिहार सरकार में बिबाद हो गइल. रेलबे के मोताबिक सात बोगी में एक बोगी पारसल के रहे. एक अउर बोगी गार्ड अउर पारसल के रहे. बांचल पांच बोगी में जातरी के कुल क्षमता 312 रहे. मतलब ई कि रेलवे 312 आदिमी के मरे के बात ही कबूल कइल चाहत रहे. जब कि घटना के गवाह लोग के कहनाम रहे कि एकरा से बहुत अधिक संख्या में लोग मार गइल रहन. करीब आठ सौ अदिमी के मारे जाये के अनुमान लगावल गइले रहे. घटना बहुत दुखद रहे लेकिन तब्बो रेल मंतरी केदार पांडे अउर मुखमंतरी जगरनाथ मिसिर में खूब रजनीत भइल रहे. (लेखक अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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