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Bhojpuri: जब भारत के दू पूर्व PM अदावत भूला के बतियावे लगले भोजपुरी में

Bhojpuri: जब भारत के दू पूर्व PM अदावत भूला के बतियावे लगले भोजपुरी में

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लालू यादव फेन चर्चा में बाड़े. जब-जब उनकर नांव आयी, भोजपुरी के महिमा के जरूर गवाई. उनकर राजनीतिक उठान में भोजपुरी के बहुत बड़ जोगदान बा. ईहे भासा बोल के ऊ जनता के दिल पs राज कइले. भोजपुरी के चलते ही ऊ पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के नजदीक अइले.

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अगर 1990 में चंद्रशेखर मदद ना कइले रहिते तs लालू यादव मुखमंतरी ना बनल रहिते. भोजपुरी में बहुत भावनात्मक शक्ति बा. एकर भाव से प्रगाढ़ रिश्ता बने में तनिको देर ना लागे. भोजपुरी में अतना मिठास बा कि कबो-कबो कड़ुआहट भी बेअसर हो जाला. जइसे 2004 में भारत के दू पूर्व प्रधानमंत्री जब पुरान राजनीतिक अदावत भूला के बइठले तs भोजपुरी में दिल खोल के बतिअवले.

भोजपुरी प्रेमी पूर्व प्रधानमंत्री

बलिया के इबराहिम पट्टी के बसिंदा चंद्रशेखर. जे बनले तs पाटी के अध्यक्ष ना तs सीधे परधानमंतरी. मंतरी पद कबो ना कबूल कइले. उनका भोजपुरी से अगाध प्रेम रहे. अगर ऊ जान जास कि सामने वला अदिमी भोजपुरी जाने ला तs ऊ बेहिचक आपना भासा में बात करे लागस. जनता पाटी के खड़ा करेवला लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) भी भोजपुरी भासी रहन. दूनो जना अगल बगल गांव के ही रहे वला रहन. चंद्रशेखर के जब भी जेपी से मोलकात होखे ऊ भोजपुरी में ही बात करत रहन. भोजपुरिया समाज से आवे वला पूर्व अधिकारी अजीत दुबे एगो प्रसंग के जिक्र कइले बाड़े. “1977 के चुनाव के रिजल्ट निकल गइल रहे. जनता पाटी के बहुमत मिल गइलल रहे. मुम्बई के जसलोक हौसपिटल में जेपी के इलाज चलत रहे. उनका के हवाई जहाज से दिल्ली ले आल गइल रहे. जनता पाटी के सांसद उनकर आगवानी खातिर हवाई अड्डा पहुंचल रहन. भारी बीड़ रहे. अजीत दुबे बलिया के हरिहरपुर के रहे वला रहन. ऊ चंद्रशेखर के जवारी रहन. एह से ऊ अजीत दुबे के पहचानत रहन. ओह घरी अजीत दुबे दिल्ली हवाई अड्डा पs जूनियर औफिसर रहन. जब जेपी हवाई जहाज से उतरले तs चंद्रेशखर अजित दुबे के परिचय करवले, ई अजीत दुबे बाड़े… अपने जिला के रहे वला हवन. ई बात सुन के जेपी मुसकुराये लगले.”

राजनीत में भोजपुरी के भाव

भोजपुरी प्रेम के चलते ही चंद्रशेखर लालू यादव के बहुत मानत रहन. लालू यादव के गांव फुलवरिया पहिले पुरनका छपरा जिला में रहे. छपरा अउर बलिया में बहुत पहिले से गोतियारो चलत आ रहल बा. बीच में बस गंगा जी के धार बा. एह पार छपरा ओह पार बलिया. 1977 में जब लालू यादव पहिला बेर सांसद बनले तs ओह घहरी जनता पाटी के अध्यक्ष चंद्रशेखर ही रहन. लालू यादव के ठेठ भोजपुरिया अंदाज समाजवादी चंद्रेशेखर के भावे लागल. 1990 के बिहार बिधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हार हो गइल. 324 सीट में से जनता दल के 120 पs जीत मिलल रहे. बिधायक दल के नेता के चुनाव के सवाल आइल. तब जनता दल में गुटबाजी चरम पs रहे. देवीलाल, वीपी सिंह अउर चंद्रशेखर के तीन गुट रहे. चंद्रेशखर अउर वी पी सिंह में घनघोर मनमोटाव रहे. देवीलाल भी वीपी सिंह के बिरोधी बन गइल रहन. लेकिन वीपी सिंह भारत के परधानमंतरी रहन. उनकर अनदेखी आसान ना रहे. अइसन हालात के बीच बिहार के भावी मुखमंतरी के चुनाव होखे वला रहे. बिधायक दल के नेता बने खातिर रामसुंदर दास अउर लालू यादव दावा पेश कइले. रामसुंदर दास प्रधानमंत्री वीपी सिंह के कंडिडेट रहन. लालू यादव के माथा पs देवीलाल के हाथ रहे.

भोजपुरी में बात भइल अउर तइयार हो गइल CM बनने की राह

1990 में बिधायक दल के नेता के चुनाव आसान ना रहे. शुरू में लालू यादव आपन जीत आसान समझत रहन. लेकिन रामसुंदर दास पूर्व मुखमंतरी रहन. उनकर सहज शैली से बहुत बिधायक प्रभावित भी रहन. रामसुंदर दास के मजबूत स्थिति होत देख लालू यादव के आपन जीत के प्रति शंका होखे लागल. 7 मार्च 1990 के रात रहे. चर्चा के मोताबिक, लालू यादव चंद्रशेखर के फोन कइले. दुआ-सलाम के बाद खांटी भोजपुरी में संवाद शुरू भइल. लालू यादव कहले, बाबू साहेब (चंद्रशेखर) ! अब रउए पs सभ निरभर बा, अगर कुछ ना करब तs बिहार में वीपी सिंह के अदिमी मुखमंतरी बन जाई. कहल जाला कि वीपी सिंह के नांव सुनते चंद्रशेखर के पारा हाई हो गइल. तब वीपी सिंह के राजनीत फेल करे खातिर चंद्रशेखर आपन नजदीकी बिधायक रघुनाथ झा के तीसरा दावेदार के रूप में खाड़ा करे के कह देले. 8 मार्च 1990 के बिधायक दल के नेता के चुनाव शुरू भइल. जनता दल के 120 नवनिरवाचित बिधायक, पांच एमएलसी अउर दू जनता पाटी में शामिल निरदलीय बिधायक भोटिंग खातिर जुटले. बक्सा में नांव के परची डाल के चुनाव भइल. रघुनाथ झा के 12, रामसुंदर दास के 56 अउर लालू यादव के 59 भोट मिलल. रघुनाथ झा रामसुंदर दास के मिले वला 12 सवर्ण बिधायक के भोट काट ले ले जवना से लालू यादव बिधायक दल के नेता चुना गइले. अगर चंद्रशेखर ई मदद ना कइले रहिते तs लालू यादव बिहार के मुखमंतरी ना बनल रहिते.

दू पूर्व PM के भोजपुरी में बतकही

एक समय इहो आइल जब वीपी सिंह अउर चंद्रशेखर बीतल बात बिसार के एक दोसरा के नजदीक अइले. वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन ई दू पूर्व प्रधानमंतरी के भोजपुरी में बतकही के बड़ा रोचक बरनन कइले बाड़े. “माहौल क्या है?” उनकर रिपोर्टिंग के चरचित अंदाज रहल बा. राजीव रंजन जवन बतवले बाड़े ओकर मोताबिक कहानी कुछ अइसे शुरू होत बा. 2004 लोकसभा चुनाव के रिजल्ट अभी निकले के शुरू ही भइले रहे. रुझान से साफ होके लागल कि अब वाजपेयी सरकार के हार होखे वला बा. एही बीच चंद्रशेखर वीपी सिंह के आवास पs पहुंचले. वीपी सिंह 1989 में परधानमंतरी बनल रहन जब कि चंद्रशेखर 1990 में. चंद्रेशेखर अउर वीपी सिंह में बात होखे लागल. अइसन संजोग बनल कि राजीव रंजन भी ऊहां मौजूद रहन. वीपी सिंह जब बइठका में अइले तब चंद्रेशेखर देने देख के भोजपुरी में कहले, तबियत ठीक बा ? ओह घरी चंद्रशेखर अउर वीपी सिंह के तबियत खराब चलत रहे. वीपी सिंह के ब्लड कैंसर के पता चल गइल रहे. चंद्रेशेखर के कैंसर के अभी पता ना चलल रहे. वीपी सिंह के बात सुन के चंद्रशेखर कहले, हमरा तहार हाल के पूछे के चाहीं तs तूं हमार हालचाल पूछ रहल बाड़s !

…तs लालू यादव अइसे बनल रहन रेल मंतरी

एकरा बाद दूनो पूर्व परधानमंतरी चुनाव रिजल्ट पs भोजपुरी में डिसकसन करे लगले. वीपी सिंह- देखलs ! हमरा अंदाजा रहे कि इहे होई (वाजपेयी सरकार के हार). चंद्रेशेखर- असल में जब नायडू (चंद्रबाबू) के रिजल्ट आवे लागल तब बूझा गइल कि अब ना आ पाई मामला. अब तूं जा के सोनिया से मिलs. फोन मत करs, सीधे मिलs. लालू तs ना मानी. मानहूं के ना चाहीं. लालू के 24 सांसद जीतल बाड़े. लेकिन तूं कहबs ऊ (रामविलास पासवान) मान जइहें . उनका के दू मंत्रालय देके के मनावल जा सकेला. वीपी सिंह- देखत हईं, हमहूं तs कहिए सकता बानी. चंद्रशेखर- ना ना, देखे के कवनो बात नइखे, बाद में ठीक ना होई. मिले खातिर जा. करीब चार पांच मिनट बतकही भइल के बाद चंद्रशेखर उहां से निकल गइले. तब वीपी सिंह सोनिया गांधी के निवास पs जाए के तइयारी करे लगले. दरअसर 2004 में यूपीए के जीत के बाद रेल मंत्री बने खातिर लालू यादव अउर रामविलास पासवान में ठन गइल रहे. बाद में लालू यादव रेल मंत्री बनले. जब कि रामविलास पासवान के इस्पात अउर उर्वरक मंत्रालय दिहल गइल. भारत के दू पूर्व प्रधानमंतरी के भोजपुरी में बात करे के ई दुरलभ प्रसंग बा.

(अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News

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