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Bhojpuri Spl: गैर बंगाली मतदातन क ऊंट कवन करवट बइठी, जानीं बंगाल चुनाव क हाल

1998 में कांग्रेस से टूट के तृणमूल कांग्रेस बनला के बादो गैर बंगाली विशेषकर बिहारी पूर्वांचली समाज के लोग कांग्रेस क साथे बनल रहलें. 1998, 1999 अउर 2004 क लोकसभा चुनाव बंगाल में भाजपा के साथे लड़ला के बादो दूनों दलन के गैर बंगाली समाज का साथ न मिल पाइल.

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ए साल होवे वाला बंगाल चुनाव में गैर बंगाली विशेष कर बिहारी अउर पूर्वांचली वोटरन क झुकाव केकरा ओर रही ? इ सवाल अभिये से बंगाल क लोगन के माथा में घूम रहल ह. 2019 क लोकसभा चुनाव में भाजपा के मजबूत भइला के पीछे कई गो कारणन में से एगो इहो मानल जात ह कि बिहारी अउर पूर्वांचली हिंदू समाज के लोग भाजपाई प्रत्याशियन के आपन वोट डालन. जबकि बंगाल में भाजपा के मजबूत भइला से पहिले बिहारी अउर पूर्वांचली हिंदू समाज के लोग पहिले कांग्रेस अउर बाद में तृणमूल कांग्रेस क वोटबैंक कहलात रहे. बलुक वामपंथी राजकाज में लगभग समूचा गैर बंगाली समाज के ही कांग्रेस क वोट बैंक मानल जात रहे. बाद में इ वोट बैंक कांग्रेस से टूट के बनल तृणमूल कांग्रेस क पाला में चल गइल. वइसे 1990 से देशभर में भाजपा क उभार क असर बंगालो पर पड़ल जब गैर बंगाली समाज में से मारवाड़ी, गुजराती, सिंधी अउर थोड़ बहुत पंजाबी समाज के लोगन का लगाव भाजपा की ओर बढ़ल. लेकिन तबो बिहारी- पूर्वांचली भाई लोग कांग्रेस बा तृणमूल कांग्रेस क ही वोट बैंक बनल रहल.

1998 में कांग्रेस से टूट के तृणमूल कांग्रेस बनला के बादो गैर बंगाली विशेषकर बिहारी पूर्वांचली समाज के लोग कांग्रेस क साथे बनल रहलें. 1998, 1999 अउर 2004 क लोकसभा चुनाव बंगाल में भाजपा के साथे लड़ला के बादो दूनों दलन के गैर बंगाली समाज का साथ न मिल पाइल. एमे भाजपा के चलता थोड़ बहुत मारवाड़ी, गुजराती अउर सिंधी, पंजाबी समाज क वोट इ गंठबंधन के मिलल लेकिन एतना ना रहे कि वाम मोर्चा सरकार के बड़ झटका दे पावें. एकर सबसे बड़ कारण इ रहे कि कांग्रेस से अलग होइला बा भाजपा के साथे चुनाव लड़ला के बादो तृणमूल कांग्रेस, बिहारी पूर्वांचली वोट के अपना साथे कर पावे में कामयाब ना भइल. कांग्रेस क बिहारी पूर्वांचली हिंदू समाज क वोट बैंक न सरकला के चलते ना त तृणमूल भाजपा गंठबंधन ही मजबूत हो पाइल आ नाही वाम मोर्चा कमजोर हो पाइल.

2007 में पूर्वी मिदनापुर क नंदीग्राम में भूमि बचाओ आंदोलन में पुलिस गोली से कई लोगन के मारे जाए अउर ओकरा बाद होइल सिंगुर आंदोलन में ममता बनर्जी क वाम मोर्चा के खिलाफ मोर्चा खोले के चलते तृणमूल कांग्रेस क दबदबा बंगाल क राजनीति में बढ़े लागल. 2009 क लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथे चुनाव लड़ला क लाभ भी ममता क मिलल अउर केंद्र क मनमोहन सिंह सरकार में रेल मंत्री भी बनलीं. एकरा बाद 2011 क विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथे लड़िके 34 साल क वाम मोरचा सरकार के उखाड़ फेंकलीं. बंगाल क सत्ता पर कबजा जमौले के बादे आस्ते आस्ते ममता क तृणमूल कांग्रेस मजबूत होत गइल अउर कांग्रेस कमजोर पड़े लागल. फिर दूनों दलन क साथो केंद्र अउर परदेस में बारी बारी से छूट गइल. एही के चलता कांग्रेस क बिहारी पूर्वांचली वोट बैंक भी तृणमूल क पाला में चल गइल. 2016 क विधानसभा चुनाव में त वाम दलन अउर कांग्रेस क महाजोट भइला के बादो इ वोट बैंक तृणमूल के साथे रहल अउर ममता क दल भारी बहुमत से अकेले सरकार बना ले गइल. कहल जाला कि 2016 क चुनाव में भाजपा भीतरे भीतरे तृणमूल कांग्रेस क ही साथ देलस जेसे कि कांग्रेस के सहारे वाम दल दोबारा बंगाल क सत्ता पर काबिज हो पावे.

लेकिन 2019 क चुनाव में भाजपा एतना जोर लगाउस कि ममता से सीधे दू दू हाथ करे क स्थिति में आ गइल. केंद्र क मोदी सरकार क मजबूती क चलता असम अउर त्रिपुरा में सरकार बनावें क लाभ भी ओके 2019 के चुनाव में बंगाल में मिलल अउर उ 42 में से 18 सीट जीत गइल. इ 18 सीटन में कलकत्ता से सटल उत्तर 24 परगना जिला क बैरकपुर अउर हुगली जिला क हुगली सीट भाजपा क जीत खातिर ज्यादा महती वाला ह. हुगली नदी ( लोकल में गंगा नदी ) क दूनों ओर बसल कल करखाना वाला इ इलाकन में काफी मातरा में बिहारी पूर्वांचली लोग बसल हउअन. जूट मिल अउर दूसर छोट कारखानन में मेहनत मजूरी करें वाले समाज के लोग कई सालन से इहां रच बस गइल हउअन. कल कारखानन में मजूरी के अलावे छोट मोट दुकान दौरी भी इ समाज के लोगन क रोजी रोटी क जरिया बन गइल ह.

वाम मोरचा क शासन में भी बिहारी पूर्वांचली खास करिके यहां क हिंदू समाज क लोग कांग्रेस के ही वोट डालत रहलें. बाद में इ सब तृणमूल कांग्रेस के वोट डाले लगलें. एकरा अलावे इहा बसल बिहार पूर्वांचल क मुस्लिम समाज के लोग जरूर पहिले कांग्रेस अउर वाम दलन में बंटल रहलं लेकिन तृणमूल कांग्रेस क सरकार बनला के बाद उहो तृणमूल क पाला में चल गइलें. उनके आजो तृणमूल के साथे मानल जाला लेकिन 2019 क चुनाव में बिहार- पूर्वांचल के हिंदू समाज क लोगन के भाजपा क पाला में जाए के चलता ही बैरकपुर अउर हुगली सीट पर भाजपा क कबजा हो पाइल. अब 2016 क विधानसभा चुनाव में इ इलाका क विधानसभा सीटन में केतना भाजपा जीत पाई इ त देखे वाली बात होई काहे से कि दूनों चुनाव क गुना गणित अलगा होले ला. वइसे बिहारी पूर्वांचली समाज क अपना पाला में रखे खातिर तृणमूल कांग्रेस की ओर से लिट्टी चोखा क पार्टी भी कइल जा रहल बा.

ई चुनाव में गौर करें वाली बात इहो होई कि कलकत्ता अउर आसपास क इलाका में भाजपा क प्रदर्शन विधानसभा में कइसन होई. एसे कि इ इलाकन में भी पूर्वांचली अउर बिहारी के अलाव दोसर गैर बंगाली वोट भी खूबे ह. विशेष करिके मारवाड़ी, गुजराती, सिंधी अउर पंजाबी वोट. जेकर लाभ 2019 क लोकसभा चुनाव में भाजपा के बैरकपुर अउर हुगली के छोड़कर कोलकाता अउर ओसे सटल शहरी इलाकन में नाही मिलल. कोलकाता क बिजनस में इहे समाज विशेषकर मारवाड़ी समाज क बहुते जादा पकड़ ह. लेकिन कहल जाला कि कोलकाता क सोसाइटन में रहे वाला मारवाड़ी अउर दोसर बिजनस वर्ग क लोग वोट क दिना घरे में पड़ल रहेला. अइसन में जय श्रीराम क नारा ए बार इनका सबके वोट देवे खातिर केतना परभाव डाल पावे ला इ त भाजपा क चुनावी रेजल्टे से पता चल पाई. (लेखक सुशील कुमार सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

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