Bhojpuri Special: नेटफ्लिक्स, प्राइम जइसन OTT प्लेटफार्म पर भोजपुरी काहें गायब बा?

आखिर काहें ओटीटी प्लेटफार्म पर भोजपुरी के नामो-निशान नइखे?

आखिर काहें ओटीटी प्लेटफार्म पर भोजपुरी के नामो-निशान नइखे?

अंग्रेजी के बाद हिन्दी, तमिल, तेलुगु भाषा के फिलिम, वेब सीरीज सभ OTT पर दिखाई देत बा, लेकिन भोजपुरी के नामो-निशान एह प्लेटफार्म पर काहें गायब बा. ई एगो बहुत बड़ा सवाल बा... पढ़ीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 18, 2021, 11:56 AM IST
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जब कोरोना के चलते सगरो दुनिया लॉकडाउन में रहल ह त लोग मनोरंजन के कई गो साधन उपराजल. लोग अपना परिवार के बीच ढेर समय बितावल ह, इंडोर गेम खेलल ह, खल-खल के पकवान बना के खाइल ह, घर के हर एक कोना से परिचित भइल ह, पुरान दोस्त-इयार के इयाद कइल ह, योग-ध्यान कइल ह. एकरा अलावा मनोरंजन के एगो साधन जवन शुरुए से मानव जाति के प्रिय रहल बा, एह क्वॉरन्टाइन काल में ओकर उपयोगिता भी बड़ा महसूस भइल ह.

आदिकाल में लोग नृत्य, भाव भंगिमा के साथ नाटक-नौटंकी करे, गीत गावे...सभ्यता विकसित भइल, त स्टेज बने लागल, प्रोसेनियम थिएटर के दौर आइल, रंगीन पर्दा, सजल धजल चरित्र, चकमक लाइट के युग आइल. जब विज्ञान अउर तरक्की कइलस त कहानी चित्र में ढलके सिनेमा बन गइल आ लोग पर्दा पर फिलिम देखे लागल, तनिका अउर विकास भइल त घरे घरे टीवी आ गइल आ मनोरंजन अब घरहीं में होखे लागल. टेक्नॉलजी हमेशा अपना के माँजत रहेले, रूप बदलत रहेले. टीवी आउर छोट भइल आ मोबाईल में समा गइल. अब मनोरंजन हाथ में आ गइल बा, सभ के पाकिट में आ गइल बा आ एह लॉकडाउन में लोग मोबाईले पर सबसे ज्यादा फिल्म, सीरियल, सीरीज, कॉमेडी वीडियो देखल बा.

जइसे चारों ओर निराशा, बेमारी आ मौत रहल ह, ओइसे अगर मनोरंजन के साधन ना रहित त इंसान पगला जाइत. दूरदर्शन के बड़ा धन्यवाद देबे के चाहीं कि रामायण अउरी महाभारत के पुनः प्रसारण कर के सभके अंदर दुबारा आशा आ जिजीविषा पैदा कर देलस. सिनेमा हॉल बंद रहल ह, त अइसन समय ओकर विकल्प के रूप में ओटीटी प्लेटफॉर्म आइल ह. ओटीटी के मतलब ही होला, ओवर द टॉप माने ओवर द इंटरनेट. यानि वेब के ऊपर अइसन सेवा जवन ऑन डिमांड कंटेन्ट देबे. एकरा के आसान भाषा में कहल जाव त, रउआ फिल्म देखे जाईं त उहे फिल्म देख सकब जवन सिनेमा हॉल में लागल होई. टीवी पर कवनो सीरियल भा फिल्म देखब त उहे देखब जवन चैनल चला रहल होई. जबकि ओटीटी एकर एकदम उलट बा. रउआ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपना मन से जवन देखे के चाहीं देख सकेलीं, उहो अपना सुविधा के हिसाब से, कहीं भी, कभी भी. रउआ व्यक्तिगत चॉइस के हिसाब से कंटेन्ट मिलेला। जेंगा मन करे ओंगा देखीं, अकेले, दुकेले भा भीड़ के साथे. ना रउआ कवनो चैनल के टाइम टेबल फॉलो करे के बा, ना सिनेमा हाल के शो टाइम के वेट करे के बा.

ओटीटी के शुरुआती दौर में विमियो, यूट्यूब, नेटफलिक्स आइल. बाद में जब इंटरनेट के उपभोक्ता बढलें त अउर भी कई गो नया स्ट्रीमिंग वेबसाईट अस्तित्व में आइल बाकिर भारत में ऑनलाइन स्ट्रीमिंग आ ओह पर भारतीय भाषा के कंटेन्ट धड़ल्ले से पड़ल तब चालू भइल ह जब भारत में सस्ता डेटा के कारण इंटरनेट क्रांति आइल ह आ एकरा पीछे औरी केहू के ना रिलायंस जिओ के हाथ बा. जब 2016 में रिलायंस सभकरा खातिर फोरजी इंटरनेट डाटा निःशुल्क कइलस, त ओकरा बाद ऑनलाइन स्ट्रीमिंग साइट आ एंटरटैनमेंट सामग्री के बाढ़ आ गइल.
विदेशी कंपनी कुल के देख के देसी कंपनी भी डिजिटल में भविष्य तलाशे लागल आ मनोरंजन जगत के अधिकांश चैनल आपन डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च कइलस आ साथ में लॉन्च भइल वेब-सीरीज बनावे के कान्सेप्ट. हालांकि निश्चित एपिसोड वाला सीरियल बनावे के सिलसिला बहुत पुरान बा. दूरदर्शन के शुरुआती दिन से ही निर्धारित एपिसोड के सीरीज बनत रहे लेकिन बाद में हम लोग, खिचड़ी, शक्तिमान, चंद्रकांता जइसन सीरियल के अपार सफलता के बाद कई कई साल चले वाला सीरियल बने लागल.

भारत पूरा विश्व भर में मनोरंजन के सबसे बड़ बाजार ह, इहाँ फिल्म, सीरियल, नाटक के बहुत क्रेज बा, जेकरा के भुनावे में सभ भाषा के इंडस्ट्री लागल बा, देश विदेश के ओटीटी कंपनी लागल बाड़ी सन. सभे लागल बा आ बढ़िया कंटेन्ट बन रहल बा, बोल्ड सीन वाला मसाला भी परोसाता लेकिन भोजपुरी के अइसन दुर्भाग्य बा कि ऊ अपना नयका युग के सिनेमा लेखां ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी पिछड़ गइल बा.

अगर रउआ सस्ता डेटा के क्रांति अइला के बाद वाला चार साल में देखीं त संउसे चँवर में एगो ढेला लेखां निरहुआ आ आम्रपाली दुबे अभिनीत एगो सीरीज ‘हीरो वर्दी वाला’ लउकता. हालांकि उहो सीरीज आल्ट बालाजी के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आइल जवन मूलतः हिन्दी कंटेन्ट अपलोड करेला आ ओकर दर्शक हिन्दी पट्टी वाला ढेर बाड़ें. ऊ सीरीज फ्लॉप रहल आ भोजपुरी फिल्मन वाला ढर्रा पर बनल रहे. एही से केहू के खास प्रभावित ना कर पवलस.



हालांकि यूट्यूब आ कुछ एक सॉफ्ट पॉर्न परोसे वाला ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कुछ भोजपुरी सीरीज बाड़ी सन लेकिन ओकनी के नाम ले लिखल पाप जइसन बुझाता, त ओकरा बारे में का लिखल जाव...जाए दीं, छोड़ीं. होईचोई एगो बंगाली भाषा के ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म ह, जे पर अच्छा बुरा हर तरह के बंगाली फिल्म सीरीज रिलीज होला. ओकर एगो अइसने कामुकता परोसे वाला सीरीज के भोजपुरी में डब कर के ‘भौजी के दीवाने’ नाम से एमएक्स प्लेयर पर अपलोड कइल गइल बा. एकर जिक्र एह से भइल ह काहे कि ओह प्लेटफॉर्म पर एक से एक विचारोत्तेजक सीरीज आ बंगाली फिल्म बाड़ी सन लेकिन भोजपुरी में ई कचड़े काहे डब भइल ह. एकरा माने कंटेन्ट बनावे वाला निर्माता, चैनल, ओटीटी, प्रायोजक, कलाकार सभे पहिलहीं से सोच के बइठल बा कि भोजपुरी भाषी त खाली कामुके सीन देखेला, ऊ खाली ठरके मिटावे के मनोरंजन बुझेला.

सिनेमाहॉल वाला सिनेमा के हाल त ई बा कि मेहरारू आ लइका-फइका देखल छोड़िये देलन सन. पढ़ल-लिखल आ संभ्रांत लोग भी नाहिये जाला. कम से कम ओटीटी पर सबका पसंद के अउर स्वाभिमान आ सम्मान के सिनेमा बने काहे कि एह प्लेटफोर्म पर लइका, बूढ़, जवान, मरद-मेहरारू सभकर पहुँच बा. पहिलहीं अइसन मत घिनवा द लोग कि इहो प्लेटफार्मवा नशा जाव. बाकी जे बा, से बड़ले बा...अब ई मत कहिहs लोग कि सिनेमा व्यवसाय खातिर ह, समाज सुधारे खातिर ना. त व्यवसाय में कहाँ लिखल बा कि कामुके फिल्म बनावs?!

(लेखक मनोज भावुक भोजपुरी सिनेमा के जानकार हईं. )
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