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Bhojpuri: मकर संक्रांति के नहान बाद काला तिल अउर गुड़ क काहें कयल जाला दान? जानीं

Bhojpuri: मकर संक्रांति के नहान बाद काला तिल अउर गुड़ क काहें कयल जाला दान? जानीं

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मकर संक्रांति हिंदू धरम क बहुत महत्व वाला तेवहार हौ. खासतौर से उत्तर भारत में एकर बहुत मान हौ. नहान अउर दान के एह तेवहारे के दिना लोग सबेरय नदी, कुंड, तलाब के पवित्र पानी में नहाइ के सुरुज भगवान के अर्घ देलन, अउर काला तिल, गुड़, काली उरुद, चाउर, नमक, घी, सब्जी क दान करयलन. खुद भी तिल-गुड़ क लड्डू परसाद के रूप में खालन. मकर संक्रांति एह साल दुइ दिना 14 अउर 15 जनवरी के हौ.

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सुरुज देवता जब धनु राशि से निकलि के मकर राशि में प्रवेश करयलन, तब ओही के मकर संक्रांति कहल जाला. सुरुज दक्षिणायन से उत्तरायण होइ जालन. एही दिना से दिन तिल बराबर बढ़य लगयला. सुरुज क उत्तरायण होब बहुत शुभ मानल जाला, अउर मांगलिक काम जइसे शादी-बियाह, गृहप्रवेश आदि शुरू होइ जालन. मकर संक्रांति अकसर दुइ दिना होइ जाला. अलग-अलग पत्रा में संक्रांति क अलग-अलग समय रहले के नाते अइसन होला. एह साल भी संक्रांति दुइ दिना 14 अउर 15 फरवरी के मनाइ जाई. मार्तंड शताब्दी पंचाग के अनुसार, सुरुज 14 जनवरी के दुपहरे बाद 2.43 बजे उत्तरायण होइहय. इ पंचांग के मानय वाले 14 जनवरी के ही मकर संक्रांति मनइहय. लेकिन पूर्वांचल में मकर संक्रांति 15 जनवरी के मनाइ जाई. पूर्वांचल में काशी से निकलय वाला ऋषिकेष पंचांग क जादा मान हौ. काशी वासी पंडित कमलेश नारायण मिश्र क कहना हौ कि ऋषिकेष पंचांग में सुरुज के 14 जनवरी के रात 8.34 बजे उत्तरायण होवय क समय लिखल हौ. स्नान-दान क तेवहार चूंकि उदयकाल में होला, एह के नाते मकर संक्रांति 15 जनवरी के मनाइ जाई.

पूर्वी उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति पर बिटिया-पतोहुन के खिचड़ी भेजय क भी परंपरा रहल. लाई-चूरा, तिलवा, ढुंढा, नया चाउर, उरदी क दाल, मुरई, मिठाई, फल, सब्जी, नया कपड़ा कुल सजाइ के लोग लेइ जाइ के पहुंचावय, अउर एही के साथे शुभता क शुरुआत होइ जाय. लेकिन खिचड़ी भेजय वाली इ परंपरा अब आज के जुग में खतम भइल जात हौ. न केहूं के घरे ढंुढा बनता, न तिलवा. बजारे से बनल बनावल तिलवा-ढुंढा अउर गजक खरीदल जात हयन. लेकिन काला तिल अउर गुड़ क महत्व मकर संक्रांति पर अपने जगह बरकरार हौ.

काला तिल अउर गुड़ के पीछे धार्मिक अउर वैज्ञानिक दूनों कारण हौ. काला तिल शनि भगवान के अउर गुड़ सुरुज देवता के प्रिय हौ. तिल सफेद अउर लाल भी होला, लेकिन काला तिल क खास महत्व हौ. मान्यता हौ कि काला तिल अउर गुड़ क लड्डू चढ़इले, दान कइले अउर परसाद के रूप में खइले से सुरुज देवता अउर शनि देवता दूनों खुश होइ जालन. मकर संक्रांति के अलावा भी कवनो पूजा-पाठ अनुष्ठान में नवग्रह पूजा में काला तिल जरूर चढ़ावल जाला.

सुरुज अउर शनि के काला तिल से खुश होवय के पीछे, खासतौर से मकर संक्रांति के दिन, एक ठे पौराणिक कथा हौ. सुरुज देवता क दुइ ठे महरारू रहलिन -छाया अउर संज्ञा. छाया से शनि पैदा भइलन, संज्ञा से जमराज. शनि क रंग-रूप करिया रहल, एह के नाते सुरुज के शक होइ गयल कि इ ओनकर लड़िका नाहीं हौ, छाया ओनके साथे दगा कइले हइन. उ छाया अउर शनि के अपने से अलग कइ देहलन. अलगाव के दुख में छाया अउर शनि सुरुज के श्राप देइ देहलन, ओन्हय कोढ़ होइ गयल. सुरुज जब कोढ़ी होइ के तड़पड़ाए लगलन त दूसरके लड़िका जमराज के बहुत दुख भयल. उ तपस्या कइ के पिता के कोढ़ से छुटकारा देवइलन. ठीक भइले के बाद सुरुज के गुस्सा आयल, उ छाया अउर शनि के घरे के ओरी घूइरि के देखलन, अउर घर ’कुंभ’ जरि के भसम होइ गयल. घर जरले से माई-बेटवा दूनों बहुत दिक्कत में आइ गइलन. जमराज के दूनों के दुख से पीड़ा भइल. उ सुरुज से विनती कइलन कि शनि अउर छाया के माफ कइ देयं. सुरुज छाया अउर शनि के घरे गइलन. उहां सबकुछ भसम होइ गयल रहल. घरे में खाली तिल बचल रहल, उहो करिया होइ गयल रहल. शनि ओही काला तिल से अपने पिता सुरुज क सत्कार कइलन. एह सत्कार से सुरुज बहुत खुश भइलन अउर शनि-छाया के रहय बदे ’मकर’ नावे क नया घर देइ देहलन. महरारू-बेटवा के साथे खुद उहां गइलन. सुरुज के आशीर्वाद से घर धन-धान से भरि गयल. ओही समय उ कहलन कि जब-जब उ शनि के घरे या मकर में प्रवेश करिहय, घर धन-धान से भरि जाई. अउर एह दिना जे भी सुरुज के काला तिल अउर गुड़ चढ़ाई, पूजा करी, ओकर कुल दुख दूर होइ जाई. सुरुज अउर शनि दूनों क कृपा प्राप्त होई. तबय से मकर संक्रांति शुरू भयल, अउर लोग काला तिल, गुड़ चढ़ाइ के, दान कइ के, परसाद के रूप में खाइ के मंगलकामना करयलन.

धरम के अलावा तिल अउर गुड़ क वैज्ञानिक महत्व भी हौ. तिल में, खासतौर से काला तिल में आयुर्वेद के छह रस में से चार रस मौजूद रहयला. दूनों क तासीर गरम होला. ठंढी के मौसम में तिल-गुड़ क लड्डू खइले से गठिया, कमरदर्द, कफ, पित्त में अराम मिलयला, हड्डी मजबूत होला. ठंढी में दिन छोट होला, धूप कम होला, लोग जादातर घरे में लुकायल-छिपायल रहयलन. धूप न मिलले से विटामिन डी नाहीं मिलत त हड्डी कमजोर होइ जाला. अइसने में तिल-गुड़ खइले से हड्डी के मजबूती बदे जरूरी पोषक तत्व शरीरी के मिलि जाला.

(सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri News, Happy Makar Sankranti, Makar Sankranti

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