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Bhojpuri में पढ़ीं अउर जानीं, आखिर काहें भगवान शिव के सोहाला सावन

आज सावन के पहिला सोमारी ह. चारों ओर हर हर महादेव क नारा, अउर माथे पर भभूत लगइले भक्तन क भीड़, जइसे धरती पर सरग उतरि आयल होय. मानल जाला कि सावन में महादेव क पूजा, जलाभिषेक कइले से बाबा क विशेष कृपा प्राप्त होला, पुन्य मिलयला.

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भूत भावन भोलेनाथ के जेतना भी चीज प्रिय हयन, ओहमें सावन महीना भी प्रमुख रूप से शामिल हौ. सनातन धरम में सावन क महीना पूरी तरह से भगवान शिव के समर्पित हौ. शिव पुराण में लिखल हौ कि भगवान शिव अउर माई पार्वती पूरे सावन भर धरती पर, खास कइके अपने हाथे क बसावल नगरी काशी में वास करयलन. एह के नाते काशी में सावन में भक्तन क बहुत भीड़ रहयला. देशभर से भक्त लोग सावन में बाबा के दर्शन खातिर काशी पहुंचयलन. जवने के नाते काशी में सावन क अलगय नजारा देखय के मिलयला. चारों ओर हर हर महादेव क नारा, अउर माथे पर भभूत लगइले भक्तन क भीड़, जइसे धरती पर सरग उतरि आयल होय. सबेरे मंदिर क केवाड़ खुलय से पहिलय भक्त लोग बाबा के दर्शन बदे लाइल में लगि जालन, अउर इ सिलसिला राती के आरती तक चलल करयला. मानल जाला कि सावन में महादेव क पूजा, जलाभिषेक कइले से बाबा क विशेष कृपा प्राप्त होला, पुन्य मिलयला. इहय कारण हौ कि सावन में, खास कइके सोमवार के दिना हर शिवालय भक्तन से पटल रहलयन. सावन 25 जुलाई रविवार से शुरू भइल रहे अउर 22 अगस्त रविवार तक रही.

कोरोना के नाते एह साल कांवर यात्रा पर रोक लगल हौ. बाबा क दर्शन-पूजन भी खास एहतियात के तहत होत हौ. भक्त लोग गर्भगृह में जाइके बाबा के जल न चढ़ाइ पइहय, बल्कि दुआरी से ही झांकी दर्शन करय क बंदोबस्त हौ. दुअरियय पर एक ठे पात्र बनल हौ अउर ओही में जल अर्पित कयल जात हौ. इ जल गर्भगृह में शिवलिंग के उप्पर गिरावय क व्यवस्था हौ. एकरे अलावा एह साल सावन में हर सोमवार के बाबा क 24 घंटा दर्शन होई. अबही तक खाली शिवरात्रि के अइसन होत रहल. मंदिर प्रशासन भक्तन क होवय वाली भीड़ के कारण इ निर्णय लेहले हौ. साल के बाकी महीना में भी सोमवार के दिना बाबा विश्वनाथ के दर्शन बदे भीड़ उमड़ल रहयला, सावन क सोमवार त पूछा मत, भक्तन क संख्या लाखन में होला. मंदिर प्रशासन क अनुमान हौ कि सोमवार के 24 घंटा मंदिर खुलले से एक दिना में कम से कम पांच लाख भक्त लोग आसानी से दर्शन कइ लेइहय.

भगवान शिव के सावन महीना बहुत सोहाला. एकरे पीछे पुराण में एक ठे कथा हौ. कथा में सनत कुमार भगवान शिव से पूछयलन कि ओन्हय सावन क महीना काहे प्रिय हौ? तब भगवान शिव बतावयलन कि जब देवी सती अपने पिता दक्ष के घरे योगशक्ति से आपन देह छोड़ि देहलिन, ओकरे पहिलय उ महादेव के हर जनम में पति के रूप में पावय क प्रण कइले रहलिन. अगले जनम में सती हिमालयराज के घरे पार्वती के रूप में पैदा भइलिन. महादेव के पति के रूप में पावय बदे पार्वती सावन महीना में अन्न, जल छोड़ि के निराहारी अउर निर्जला रहि के कठोर तपस्या कइलिन. महादेव पार्वती के तपस्या से प्रसन्न भइलन अउर प्रकट होइ के ओनसे सावन में ही बियाह कइलन. एह के नाते भगवान शिव के सावन बहुत प्रिय हौ.

भगवान शिव के सावन प्रिय होवय क एक दूसर कारण भी हौ. पुराण के अनुसार, समुद्र मंथन सावन महीना में ही भयल रहल. समुद्र मंथन से जब विष निकलल तब चारों ओर हाहाकार मचि गयल. संसार के विष से बचावय बदे भगवान शिव पूरा विष स्वयं पी गइलन. विष पीयले से ओनकर नटई में नीर पड़ि गइल. ओही के बाद से उ नीलकंठ होइ गइलन. विष के प्रभाव से भगवान शिव थोड़ा मूर्छित भी होइ गयल रहलन. देवी-देवता लोग महादेव पर विष क असर कम करय बदे तरह-तरह क उपाय कइलन. भगवान शिव के जल, दूध, धतूरा, शहद, बेलपत्र आदि समान अर्पित करय लगलन. एह कुल से भगवान शिव के बहुत अराम मिलल अउर उ देवतन पर बहुत खुश भइलन. तबय से इ कुल समान भगवान शिव के चढ़ावय क परंपरा शुरू भयल. सावन में जलाभिषेक क परंपरा भी तबय से शुरू भयल हौ. जलाभिषेक के दौरान भोलेनाथ के इहय कुल समान अर्पित कयल जाला. जलाभिषेक से बाबा बहुत प्रसन्न होलन.

शिव के सावन प्रिय होवय क एक तीसरा कारण भी हौ. सावन महीना में ही भगवान शिव धरती पर अवतरित होइ के अपने ससुरारी गयल रहलन. ससुरारी में ओनकर जलाभिषेक कइ के धूमधाम से स्वागत कयल गयल रहल. मानल जाला कि अबही भी हर सावन में महादेव अपने ससुरारी जालन. एह के नाते भी भक्त लोग सावन में भोलेनाथ के भक्ती में डूबल रहलयन, ओनकर जलाभिषेक करयलन, अउर पूजा-पाठ करयलन.

शिव के सावन प्रिय होवय क एक अउर कथा प्रचलित हौ. कथा के अनुसार, मरकंडू ऋषि क लड़िका मारकंडेय लंबी उमर पावय बदे सावन महीना में घोर तपस्या कइले रहलन. ओनके तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न भइलन अउर ओन्हय वरदान देहलन. तपस्या से मारकंडेय के अइसन-अइसन मंत्र क शक्ति मिलि गइल कि ओनके आगे जमराज भी नतमस्तक होइ गइलन. (सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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