भोजपुरी विशेष -भाजपा-जदयू के लड्डू लड़ी तs का बुनिया मिली राजद के?

बिहार में सत्ताधारी गठबंधन में तनाव के चर्चा पर आरजेडी सक्रिय हो गइल बा.

बिहार में सत्ताधारी गठबंधन में तनाव के चर्चा पर आरजेडी सक्रिय हो गइल बा.

बिहार में बीजेपी अउरी नीतीश कुमार के जेडीयू के बीच तनाव के चर्चा होता. तेजस्वी के नेतृत्व में आरजेडी का एकर कवनो फायदा उठा पाई?

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 30, 2020, 1:49 PM IST
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का नीतीश कुमार एक बेर फेन जनता के फैसला पलट दिहें ? का 2020 में 2017 के कहानी दोहरावल जाई ? माहौल तs ओइसने बन रहल बा. अरुणाचल के असर से नीतीश कुमार के मन भाजपा से खाट्टा हो गइल बा. उनकर मुख्यमंत्री पद से भी मन उचट गइल बा. नीतीश ईहां तक कह चुकल बाड़े कि भाजपा जेकरा के चाहे मुख्यमंत्री बना सकेला. मतलब नीतीश अब भाजपा के अउर एहसान लेवे खातिर तइयार नइखन. नीतीश कुमार असहज बाड़े. ऊ जब-जब असहज होखे ले, कवनो ना कवनो धमाका जरूर होखे ला. जदयू के नेता खुलेआम भाजपा के कोस रहल बाड़े. लड्डू लड़ी तs बुनिया झरी. दू लड्डू में लड़ाई से खुश राजद बुनिया खाये खातिर छिपा-लोटा मांज के तइयार बा. का तेजस्वी के दाल गली ?

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का कहनाम बा जदयू के ?
का जदयू में अतना अनराजी बा कि भाजपा से नाता टूट जाई ? आगा का होई ई तs अभी मालूम नइखे लेकिन जदयू, राजद के नेवता नामंजूर कर देले बा. तेजस्वी के मुख्यमंत्री बनवला के बदले नीतीश के पीएम उम्मीदवार बनावे के प्रस्ताव खारिज हो गइल बा. जदयू के कहनाम बा कि ओकर भाजपा से कुछ बिबाद जरूर बा लेकिन अतना नइखे कि सरकार गिर जाए. ई सरकार पांच साल चली. राजद के 2025 तक सबुर करहीं के पड़ी. हार से बेचैन राजद कुर्सी खातिर छटपटा रहल बा. लेकिन जदयू कवनो झांसा में ना आई. राजद के लोग झूठमूठ के जदयू बिधायक में टूट के अफवाह फैला रहल बाड़े. लेकिन बिलाई के भाग से छींका ना टूटी.
कौन राह चलिहें नीतीश कुमार ?


अरुणाचल में जदयू विधायक के भाजपा में मिलावे से नीतीश कुमार नाखुश बाड़े. जदयू के नयका अध्यक्ष आरसी पी सिंह घुमा फिरा के कहले कि भाजपा, जदयू के पीठ में छुरा घोंपले बा. तs का ऊ भाजपा के सबक सीखावे खातिर राजद के समर्थन दे सकेले ? लेकिन 2017 अउर अब में अंतर ई बा कि अगर सत्ता के पलटी होत बा तs मुख्यमंत्री के कुर्सी नीतीश कुमार के ना भेंटाई. हर हाल में तेजस्वी के ही मुख्यमंत्री बनावे के परी. का ई बात नीतीश कुमार को मंजूर होखी ? अब तक के राजनीति से तs इहे बात सामने आइल बा कि नीतीश कुमार बिहार में केहू के अधीनता सवीकार ना कर सकेले. आपन अलहदा राजनीति खातिर ही नीतीश कुमार लालू जादव से अलग भइल रहन. 2017 में लालू जादव के दखलंदाजी से ही उबिया के ऊ भाजपा के साथे गइल रहन. तs का ऊ फेन उहे गलती करिहें ? अगर नीतीश कुमार 2020 में पलटी मरिहें तs उनकर राजनीत मटियामेट हो जाई. केहू उनका पs भरोसा ना करी. केहू उनका के चुनावी चेहरा माने के पहिले सौ बेर सोंची. जब इहे पूंजी लुटा जाई तs नीतीश भीरी बांची का ? भाजपा नीतीश के इहे मजबूरी के फैदा उठा रहल बा.

बढ़ गइल बा भाजपा के टोका टोकी ?
राजद के नेता श्याम रजक के दावा बा कि जदयू के 17 बिधायक पाला बदले खातिर तइयार बाड़े, लेकिन 26 लोग के इंतजार हो रहल बा जवना से कि दल बदल कानून लागू ना हो सके. जदयू के नेता श्याम रजक के दावा के भरमावे वला बेयान कह के खारिज कर देले बाड़े. लेकिन भाजपा और जदयू में कुछ अइसन अनबन बा जवना से राजनीत कवनो करवट बइठ सकेला. 2020 के चुनाव के पहिले बिहार में भाजपा, नीतीश कुमार के मन मोताबिक चलत रहे. लेकिन अब स्थिति बदल गइल बा. भाजपा के दखल अउर टोका टोकी बढ़ गइल बा. मंत्रिमंडल बिस्तार के ममिला एही से टर रहल बा काहे से कि भाजपा के नेता अधिका हिस्सा मांग रहल बाड़े. पहिले भाजपा के मंत्री के विभागीय सचिव नीतीश कुमार तय करत रहन. अब भाजपाई मंत्री अपना मन के सचिव अउर प्रधान सचिव राखल चाहत बाड़े. 2013 में नंदकिशोर जादव बिधानसबा में आरोप लगवले रहन कि नीतीश कुमार सचिव के जरिये भाजपा के मंत्री लोगन पs नजर राखत रहन. लेकिन अब राजनीतिक गलियारा में ईहे चरचा बा कि नीतीश कुमार के पावर कम हो रहल बा. एही से नीतीश कुमार असहज हो गइल बाड़े.

का 2021 में मध्यावधि चुनाव होई ?
मानल जा रहल बा कि नीतीश कुमार भाजपा के मुंहतोड़ जबाब देवे खातिर ही आर सीपी सिंह के अध्यक्ष बनवले बाड़े. नीतीश कम बोले वला लेहाजी नेता हवें. लेकिन आरसीपी सिंह बेधड़ाके बात बोले ले. जइसे नीतीश के काट में भाजपा सुशील मोदी के बिहार से हटवलस वइसहीं नीतीश भाजपा के काबू में राखे खातिर आरसीपी सिंह के आगा कर देले. आरसीपी सिंह के जदयू के चाणक्य मानल जाला. अब भाजपा से टकराव अउर बढ़ सकेला. लव जेहाद कानून के मुद्दा पs भाजपा-जदयू में भिडंत हो सकेला. अगर बिबाद बढ़ जाई तs का नीतीश सरकार गिर सकेला ? नीतीश कुमार एक सीमा के बाद समझौता न कर सकेले ? अगर सरकार गिरी तs एकर दोषा भाजपा के माथे जाई. तब नीतीश आरोप लगा सकेले कि भाजपा अपना सहजोगी दल के साथे हमेशा धोखा करेले. जदयू भी शिवसेना जइसन भाजपा के घेर सकेला. फरवरी 2005 में रामविलास पासवान के जिद के चलते अक्टूबर में मध्य़ावधि चुनाव करावे के पड़ल रहे. अगर भाजपा से अलगा होखे के नौबत आइए जाई तs नीतीश राजद के समर्थन देवे से बेहतर चुनाव में जाए खातिर सोच सकेले. तेजस्वी जादव कहियो रहल बाड़े कि 2021 में मध्यावधि चुनाव हो सकेला. आगा के राम जानस, लेकिन अबहीं तs बिहार के राजनीत में बबंडर उठल बा.

( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं.)
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