Bhojpuri Special: का एहू बार ‘बहरी’ मदद से जीत जाई तृणमूल? जानीं का बा हालात

बंगाल में चहू ओर महाजोट क दमदार परचार क चलिते मुकाबला जोरदार लगत रहे लेकिन जब रेजल्ट आइल त तृणमूल कांग्रेस 2011 के चुनाव से भी अधिका सीट आइल उहो अकेले लड़ के जबकि पिछला चुनाव में उ कांग्रेस के साथे मिल के लड़ल रहे.

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बंगाल के बहरी लोगन के इ जान के अचरज होई कि पिछला विधानसभा चुनाव में ममता दीदी क पार्टी क बंपर जीत में कांग्रेसी अउर भाजपाई लोगन क भी सहजोग रहे. हो सकेला कि इ सहजोग के बिना भी तृणमूल केहू तरह सरकार बना ले जात लेकिन भीतरे भीतर मिलल इ दूनों दलन के सहयोग से ममता भारी बहुमत से दोबारा सरकार बना ले गइलीं. पिछला चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ कांग्रेस अउर वामपंथी दलन क महाजोट बनन रहे. शारदा घोटला अउर नारदा स्टिंग से बदनामी झेल रहल ममता सरकार क मुकाबला तब पहली बार बनल कांग्रेस अउर वामपंथी दलन क एगो मजबूत महाजोट से रहे. बंगाल में चहू ओर महाजोट क दमदार परचार क चलिते मुकाबला जोरदार लगत रहे लेकिन जब रेजल्ट आइल त तृणमूल कांग्रेस 2011 के चुनाव से भी अधिका सीट आइल उहो अकेले लड़ के जबकि पिछला चुनाव में उ कांग्रेस के साथे मिल के लड़ल रहे.

2016 क चुनाव में कांग्रेस अउर वामपंथी दल लगभग बराबर बराबर सीट पर लड़ल रहे लेकिन चुनावी परिणाम में कांग्रेस क 44 विधायक जीत गइलें अउर वामपंथी दलन क 32 विधायक ही जीत पवलें. समर्पित कैडरन के चलिते मजबूत संगठन वाला वामपंथी दलन क स्थिति जमीनी स्तर पर कांग्रेस से बहुते अधिका ठोस मानन जात रहे. दोसरा ओर तृणमूल बनला के बाद देर सबेर बड़ नेतन के ममता दीदी क पार्टी चल जाए से कांग्रेस की स्थिति हर स्तर पर कमजोर हो गइल रहे. अइसन में कांग्रेस क अधिका विधायक कइसे जीत गइलें. इ सवाल क जवाब चुनावी परिणाम क विश्लेषण कइला के बाद जीत हार क असली साच के तौर पर सामने आ गइल. बंगाल क राजनीत क नाड़ी टोये वालन क कहनाम रहे कि जमीनी स्तर पर महाजोट क स्थिति बहुते मजबूत रहे लेकिन दूनो पक्ष के कार्यकर्ता उ मजबूती से मतदान नाही कइलें, विशेषकर कांग्रेस क कार्यकर्ता.

पहिला बार मिल के चुनाव लड़े वाले वामपंथी दल त आपन लोगन क वोट कांग्रेस उम्मीदवारन के पक्ष में ट्रांसफर करा ले गइलें लेकिन कांग्रेस आपन लोगन क वोटन वामपंथी उम्मीदवारन क खाता में नाही डलवा पाइल जेकर नुकसान महाजोट के उठावे क पड़ल. कहे क माने इ कि जऔन महाजोट कागजी अउर परचार के तौर पर भी मजबूत दिखाई पड़त रहे उ मतदान के दिन कमजोर पड़ गइल. जानकार बतावें ल कि कांग्रेस क नेता आपन कार्यकर्ता के समूचा तौर पर इ ना समझा पउलों कि वामपंथियन के साथ मिल हम लोग सरकार बना सकि लां. मन में इ संशय के चलिते कांग्रेसी वामपंथियन क पक्ष बढ़ चढ़ि के वोट नाही डललें. एकरा अलावे बंगाल के आम कांग्रेसियन के मन में 34 साल क वामपंथी राज क भय भी रहे कि कहीं फेरो से उहे लाल झंडा वाला राज ना आ जाए बंगाल में. कहे क माने इ कि तृणमूल बनला के बाद कमजोर हो गइले कांग्रेसी भी वामपंथी राज के भुलाए न भूल पावत रहलें.

ठीक एही तरह क खेला 2019 क लोकसभा चुनाव में यूपी में भी होइल रहे. सपा बसपा क गंठबंधन त कागजी तौर पर बहुते मजबूत मानन जात रहे लेकिन मतदान क दिना सपाई त बसपा के पक्ष में बढ़ चढ़िके वोट डललें लेकिन बसपाई सपा उम्मीदवारन के उम्मीद लेखा मतदान ना कइलें नतीजा इ होइल कि बसपा क त 10 सांसद जीत गइलें लेकिन सपा क झोरी में खाली पांचे सीट आइल. ठीक 2016 क बंगाल चुनाव लेखा जहां वामपंथी त गंठबंधन धर्म निभाउलें लेकिन कांग्रेसी कार्यकर्ता मतदान के दिना पलट गइलें. उ चुनाव में कांग्रेसिये नाही भाजपा भी खेला कर गइल. कहे क त भाजपा भी चुनाव लड़त रहे लेकिन जानकारन क कहनाम ह कि वामपंथियन क अगुवाई में महाजोट चुनाव न जीत पावें इहे खातिर अधिका सीटन पर उनकर वोट तृणमूल क उम्मीदवारन के पड़ल. एकर पीछे भाजपा क सोच इ रहे बंगाल में वामपंथी सरकार क वापसी के बाद कैडर आधारित इ दलन के भविष्य में हरावल तृणमूल कांग्रेस के हरावे से अधिका भारी पड़ी.
कहल जाला कि भाजपा क इहे सोच 2017 क पंजाब विधानसभा चुनाव में भी देखाई पड़ल. जब उनकर कार्यकर्ता आम आदमी पार्टी के हरावे खातिर कांग्रेस के पक्ष में चुपचाप मतदान कइलें. जेकरा चलते उहवां कांग्रेस क सरकार बन पाइल नाही त चुनाव से पहिले होइल सब चुनावी सर्वेक्षण क आकलन रहे कि पंजाब में आम आदमी पार्टी क सरकार बनी. लेकिन चुनावी परिणाम में बाजी पलट गइल. बंगाल में त भाजपा 2019 क लोकसभा चुनाव में बढ़िया प्रदर्शन के साथे इ बार के चुनाव में तृणमूल के आगा मुख्य मुकाबला में खड़ा ह अइसन में 2016 विधानसभा चुनाव जइसन ओके जितावे क सहयोग क त सवाले नाही ह पर कांग्रेस के बारे में इ बात नाही कहल जा सकेला. कहे क त बंगाल क कांग्रेसी नेता तृणमूल अउर भाजपा दूनों के हरावे क बात कह रहल हउअन् लेकिन जमीनी स्तर पर सचाई एसे अलगे ह.

वामपंथी दलन अउर कांग्रेस क महाजोट के साथे फुरफुरा शरीफ क मुखिया अब्बास सिद्दकी क पार्टी के जुड़ले से मानल इ जात ह कि मुस्लिम वोटन के बंटले क नुकसान तृणमूल के होई लेकिन बंगाल क राजनीति क जानकारन क कहनाम ह कि मुस्लिम बहुल उत्तरी बंगाल में जहां महाजोट ज्यादा मजबूत ह उहवां मुसलमानन क वोट उनकर साथे गइले क भी तृणमूल के कौअनो विशेष नुकसान ना होई काहे से कि महाजोट क मुकाबला में तृणमूल उहवां पहिले से ही कमजोर ह बलुक महाजोट क मजबूती क नुकसान उहवां क सीटन पर भाजपा के ही होई. 2019 क लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अउर वामपंथी दलन के अलिगा अलिगा लड़ले क लाभ भाजपा के होइल. उ चुनाव में वामपंथी हिंदू वोट भी भाजपा क खाता में चल गइल रहे. ए बार तृणमूल के उम्मीद ह कि ओकर कमजोर गढ़ में महाजोट के फेरो मजबूत होइला से भाजपा ही कमजोर होई. अउर मध्य अउर दक्षिणी बंगाल में जहवां महाजोट कमजोर ह उहवां मुसलमानन क वोट तृणमूल के ही पड़ी. (लेखक सुशील कुमार सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं.)
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