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Bhojpuri में पढ़ें मलिकाइन के पाती: बिहार में शराबबंदी के बादो दारू से मरत बा लोग, गलती केकर?

हड़बड़ी में कवनो काम के फल नीमन ना मिलेला. नीतीशो कुमार हड़बड़ी में दारूबंदी क दिहले. एकरा बादो दारू बंद ना भइल. बिहार में महुराइल दारू पी के मरे वाला कई गो कांड हो गइली सन. नीतीशजी दारूबंदी के लेके जेतने तनेन हो तारे, ओतने उनका पर टूटे के खतरा बढ़ल जाता.

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पांव लागीं मलिकार. विसवास बा, रउरा नीके होखब. हमनियो के काली माई के किरपा से नीके-निरोग बानी सन. ए मलिकार, रउरा जरी त बिहार में दारू पीयला से 16 आदमी के मुअला के खबर पहुंचिये गइल होई. रउरा त जनबे करीले मलिकार कि हमरा त कवनो खबर पांड़े बाबा से ही मिल पावेला. चार-पांच दिन पहिले उहां के बतावत रहुवीं कि फेर बिहार में दारू पीयला से 16 आदमी मर गइले. चार-पांच आदमी आन्हर हो गइल बाड़े.

जान तानी मलिकार, कहे खातिर बिहार में दारूबंदी भइल बा, बाकिर बेचात-बिकात सगरो बा. हमरा त बुझाता मलिकार कि नीतीश जी के इरादा त नीमन रहे, बाकिर हड़बड़ी क दिहले. एह हड़बड़ी में कानून बना के अउरी तनेन हो गइले. ढेर तनेन भइलो ठीक ना होला. टूट जाये के खतरा हरदम बनल रहेला. आन्हीं-तूफान में बड़ बड़ गाछ उखड़ जाला, बाकिर झाड़ी-लत्तर कबो उखड़ल कहीं देखले-सुनले बानी मलिकार. रउरा त जानते होखब कि हवा के संगे लत्तर-झाड़ लचकत-झुकत रहेला. गाछ-बिरिछ तनेन खड़ा रहेला. एही से ऊ उखड़ जाला. एही से कहल गइल बा कि ढेर तनेनो भइल ठीक ना होखे.

अबकी बेतिया में दारू पीयला से लोग मुअल बा. पांड़े बाबा ओह दिन फजीरे दुआर पर जुटल लोग के सुनावत रहुवीं. ओही दिन हमरा मालूम भइल कि उहां का माथा में त मोटरी भर दारू पुरान भरल बा. दारू पियला से कहवां-कहवां बिहार में पांच साल में लोग मुअल बा, उहां के सगरी मुंहजबानी इयाद बा. नवादा, गोपालगंज, बेतिया धयिले उहां के कई गो जिला गिना गउवीं. थोक से मुअल लोग के संख्या सैकड़ा में बतावत रहुवीं. कहत रहुवीं कि दारू पीये भा बेचे वाला कई हजार लोग जेल गइल. अबहियो कहीं-कहीं लोग के धरइला-पकड़इला के खबर रोजे सुनात रहेला.

पांड़े बाबा कवनो खबरिया एतना बढ़िया से समझाई ले मलिकार कि माथा में तहे तह बइठत जाला. उहां का कहत रहुवीं कि नीतीश कुमार दारूबंदी वाला काम त ठीक कइले, बाकिर हड़बड़ी क दिहले. कानून बनला भर से कुछऊ नइखे होखे वाला. खूनखराबा रोके खातिर भी त कानून बनले बा, बाकिर कहां केहू रोक पावत बा. इहे हाल बिहार में दारूबंदी कानून के भी हो गइल बा. ना दारू पीये वाला मानत बाड़े आ ना बेचे वाला. उहां के बतावत रहुवीं कि पहिले पांच कोस में दारू के तीन गो लाइसेंसी दोकान रहल हा. दारूबंदी के बाद अब एकगांव में तीन-चार गो दोकान खुल गइल बाड़ी सन. फोल क दिहला पर बेचे वाला घरे पहुंचा जा तारे सन. पांच के दस भले लागत बा, बाकिर लोग पीयल नइखे छोड़त.

हमार नानी कहस मलिकार, जवन लखुत धरा जाला, ऊ जल्दी ना छूटे. दारू, ताड़ी, बीड़ी, सिगरेट भा कवनो किसिम के नशा धरा गइला पर बिरले केहू से छूटेला. केतने नशेड़ी धन-संपत त एह नशाखोरी में गंवइबे करीले, देह-जान तगंवा देले. रउरा त जानते होखब, कन्हौली वाला फूफा अपना जिनिगी में सगरी खेत-बारी बेच के पी गइले. अबही साठो के उमिर ना भइल होई, एह दुनिया से चलियो गइले. केतना तकलीफ फुआ के उठावे के परल हा, ऊ अगरी-कगरी आ हीत-नेवतरही सभे जानत बा. ई कहीं कि बाद में लड़िकवा बड़ भइले हां सनत कमा-धमा के घर के हाल ठीक कइले हां सन.

पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि बेतिया जिला के लउरिया में माहुर मिलल दारू पियला से एके गांव में 16 लोग दू दिन में मर गइल. पुलिस जांच में जुटल बिया. सब लोग लौरिया थाना के देउरवा गांव के ह. एकरा पहिले नवादा:जिला 17 लोग दारू पियला से मरल रहे. ओहू जा चार आदमी के आंख के रोशनी चल गइल रहे. साल 2016 में 15-16 अगस्त के गोपालगंज के खजूरबानी में शराब पियला से 21 आदमी मरल रहले. ए मामला में 13 आदमी के सजा भइल बा. 9 आदमी के त फांसी के सजा सुनावल गइल बा. 2017 में रोहतास जिला के काराकाट बलौक के कछवा थाना क्षेत्र के दनवार गांव में शराब पियला से चार जन के जान गइल रहे.

पांड़े बाबा दारूबंदी के नीमन उपाय बतावत रहुवीं. उहां के कहनाम बा कि नीतीश जी दारू केदोकान घटा दिहले रहिते आ दाम दूना-तिगुना क दिहले रहिते त सरकारी खजाना में सरकार के आमदनी बढ़ जाइत. पियक्कड़ लोग त अबो बलेक में कीन के चोरा के पीयत बा. बलेक में बिकइला पर पइसा बलेकिया केजेब में जाता आ जहां से दारू बिहार में आवत बा, उहां चल जाता. सरकार कहेले कि दारूबंदी से सरकार के पांच हजार करोड़ के नुकसान भइल बा. बाकिर पांड़े बाबा के कहला के मोताबिक ई बीस हजार करोड़ से ऊपर के नुकसान बा. दारू बनावे वाला कारखाना बंद हो गइली सन. ओइमे काम करे वाला हजारन लोग बेकार हो गइल. ई जोड़ लिहल जाव त नुकासान बीस हजार करोड़सेबीसी के बा. एकर भरपाई करे खातिर सरकारआदमीपर कई तरह के टैक्स लगा दिहलस. सरकार के आमदनी घटल, लोग के नौकरी गइल, कई गो टेक्स बढ़ गइल आ एकरा बादो दारू बिकाते बा.

हड़बड़ी में कवनो काम के फल नीमन ना मिलेला. नीतीशो कुमार हड़बड़ी में दारूबंदी क दिहले. एकरा बादो दारू बंद ना भइल. बिहार में महुराइल दारू पी के मरे वाला कई गो कांड हो गइली सन. नीतीशजी दारूबंदी के लेके जेतने तनेन हो तारे, ओतने उनका पर टूटे के खतरा बढ़ल जाता. दरकार त ई रहे कि दारूबंदी खातिर लोग के समझावल जाइत. घर-घर के औरतन के दारू रोके खातिर तैनात कइल जाइत. दाम एतना बढ़ा दिहल जाइत कि रोज पीये वाला, महीना में एक बेर खातिर सोचे पर मजबूर हो जाइत.

छोड़ीं ई बतकही, हमहूं का लेके बइठ जाई ले मलिकार. अपना घर आ गांव-जवार के बतकही का जगहा बेमतलब के बात लिखे लागी ले. मकई-धान के बोअनी-रोपनी संपर गइल मलिकार. अबहीं ले त बरखा साथ दिहले बा, अगे देखीं का होला. करोनवा ओरा गइल का मलिकार. तिसरका लहर आवे के बड़ा हल्ला रहल हा, बाकिर एह घरी करोना से नोकसान के खबर नइखे सुनात. फगुआ के बाद से अबहीं ले एतना मन डेराइल मलिकार कि कहीं आइल-गइल भा निकलल-पइसल मुशकिल क दिहलस. ओराये के खबर मिलित त हम आपन पूजा पाठ क अइतीं. आपन खेयाल राखेब. बाकी अगिला पाती में.
राउरे, मलिकाइन

(ओमप्रकाश अश्क वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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