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Bhojpuri: दुनिया के सबसे बड़का एयरलिफ्ट, ना बम फूटल ना गोली चलल

Bhojpuri: दुनिया के सबसे बड़का एयरलिफ्ट, ना बम फूटल ना गोली चलल

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दुनिया के सबसे बड़ एयरलिफ्ट ऑपरेशन में हवाई जहाज के करीब अढ़ाई लाख फेरा लगल रहे। ना बम चलल ना बंदूक, ना खून के एक कतरा भी बहल अउर हो गइल काम। ई ऑपरेशन 15 महीना तक चल रहे। ओह घरी अमेरिका के राष्ट्रपति रहन ट्रूमेन।

पंकज प्रवीर जेएनयू से इंटरनेशनल रिलेशंस में एमए कइला के बाद यूपीएससी के तइयारी करत रहन। दिल्ली से गांवे अइल रहन। साथी-संघतिया के जमघट लागल रहे। अफगानिस्तान के हलात पs चर्चा होत रहे। नवलकिशोर कहले, अमेरिका जइसन बरियार देश के अफगानिस्तान में तौहीन हो गइल। अमेरिका हजारों लोग के बचइलस लेकिन काबुल में 13 सैनिक मारे जाए से ओकर सब कइल धइल पानी में चल गइल। राष्ट्रपति जो बाइडन के अमेरिका में किरकिरी हो रहल बा। अमित रंजन पकज प्रवीर देने देख के कहले, का पंकज भाई ! का कहत बाड़s ? का काबुल हवाई अड्डा से लोग के निकाले में अमेरिकी नीति फेल हो गइल ? पंकज प्रवीर जबाब देले, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन कइसे ई खतरनाक मिशन में नाकाम हो गइले, एकरा के समझे खातिर एगो पुरान घटना के जिकिर जरूरी बा। ई घटना दुनिया के सबसे बड़ एयरलिफ्ट ऑपरेशन रहे जवना में हवाई जहाज के करीब अढ़ाई लाख लाख फेरा लगल रहे। ना बम चलल ना बंदूक, ना खून के एक कतरा भी बहल अउर हो गइल काम। ई ऑपरेशन 15 महीना तक चल रहे। ओह घरी अमेरिका के राष्ट्रपति रहन ट्रूमेन।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रूमेन से बाइडन के तुलना

पंकज प्रवीर घटनाक्रम बतावे के पहिले अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन अउर पूर्व राष्ट्रपति हैरी ट्रूमेन के बीच तुलना कइले। बाइडन अउर ट्रूमेन दूनो जना डेमोक्रेटिक पटी के राष्ट्रपति रहन। ट्रूमेन के ऐतिहासिक एयरलिफ्ट से डेमोक्रेटिक पाटी के लोकप्रियता आसमान पs पहुंच गउल रहे। ऊ 1948 में दोबारा राष्ट्रपति के चुनाव जीतले। 2021 में जो बाइडन के नाकाम एयरलिफ्ट से डोमोक्रेटिक पाटी के ग्राफ लगातार नीचे गिर रहल बा। जब ट्रूमेन एयरलिफ्ट ऑपरेशन के रणनीति बनवले रहन ओह घरी दुनिया के हालत बहुत खराब रहे। सेकेंड वर्ल्डवार खतम हो गइले रहे। अमेरिका जापान में एटम बम गिरा के तबाही मचा चुल रहे। तब ले सोबियत संघ (रूस) भी एटम बम बना ले रहे। महाजुद्ध खतम भइल तs अमोरिका अउर सोबियत संघ में शीतयुद्ध शुरू हो गइल। दुनिय़ा के सरदार बने खातिर दूनो देश आमने-सामने आ गइले। एही बीच सोवियत संघ जानबूझ के अमेरिका अउर ब्रिटेन से पंगा लेलस। अब बुझाये लागल कि एटम बम वला दू देश में लड़ाई शुरू हो जाई। राष्ट्रपति ट्रूमेन खुद महाजुद्ध के बिनाश देखले रहन। उहे जापान पs एटम बम गिरावे के औडर देले रहन। तब ट्रूमेन बहुत बुद्धिमानी से एह मामला के हैंडिल कइले। दुनिया में आज तक अतना लंबा अउर बड एयरलिफ्ट कबो ना भइल। ई ट्रूमेन के लीडरशिप क्वालिटी रहे कि बिना कवनो खून खराबा के एयरलिफ्ट ऑपरेशन पूरा हो गइल। ई एयरलिफ्ट बेलकुल लग रहे। एकरा में आदिमी कम अउर खाये-पीये के समान के अधिक लिफ्ट कइल गइल रहे।

सोबियत संघ के मनमानी से बर्लिन में घेराबंदी

पंकज प्रवीर मेन टौपिक पs अइले। सेकेंड वर्ल्डवार खतम भइल तs मित्र देश (सोवियत संघ, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस) पराजित जर्मनी के दू भाग में बांट देले। पश्चिम जर्मनी में अमेरिका अउर ब्रिटेन के बरचस्व कायम भइल। पूर्वी जर्मनी में सोवियत संघ के दबदबा हो गइल। राजधानी बर्लिन के भी पश्चिम अउर पूर्वी भाग में बंटवारा कइल गइल। सोवियत संघ पूरा जर्मनी पs कब्जा कइल चाहत रहे। एही बीच मई 1948 में सोवियत संघ पूर्वी बर्लिन शहर के घराबंदी कर देलस। सड़क बनावे के नंव पs बैरिकेड खाड़ा कर दिहल गइल। सोवियत संघ रेल गाड़ी अउर नाव खेवे पs भी रोक देलस। बर्लिन स्प्री नदी के किनारे बसल बा। ईहां नाव चाहे मोटरबोट से पंहुच जा सकत रहे। लेकिन सोवियत संघ के रोक के चलते पश्चिम बर्लिन चारो तरफ से घेरा गइल। पश्चिम बर्लिन में रहे वला अमेरिका-ब्रिटेन के समर्थक लोग पिंजरा में कैद हो गइले। कोई पश्चिम बर्लिन तब्बे पहुंच सकत रहे जब ऊ रूस के दबदबा वला इलाका के पार करे। लेकिन ई संभव ना रहे। पश्चिम बर्लिन के टोटल सप्लाई ठप हो गइल। खाये-पीये के समान के कमी होखे लागल। ओह घरी खाना कोइला के चूल्हा पs बनत रहे। कोयला के कमी होखे लागल। सोवियत संघ पश्चिम बर्लिन के बिजली भी काट देलस। हालत खराब होखे लागल।

1948 – पश्चिम बर्लिन में एयरलिफ्ट

पंकज प्रवीर के कहानी जारी रहे। ओह घरी में पश्चिम बर्लिन में अमेरिका के सैनिक अफसर जनरल लुकस क्ले तैनात रहन। ऊ राष्ट्रपति ट्रूमेन के संदेश भेजले, हालत बहुत खराब बा। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रहित सबसे ऊपर बा। सोबियत संघ नाकाबंदी के जरिये अमेरिकी सेना के पश्चिम बर्लिन छोड़े खातिर दबान बना रहल बा। लेकिन हमरा बिचार से अमेरिका के पश्चिम बर्लिन में बनल रहे के चाहीं। अमेरिका के ताकत अउर इज्जत खातिर ई बहुत जरूरी बा। अगर पश्चिम जर्मनी में रशद पहुंचा दिहल जाई तs हमनी के ईहां मुस्तैदी से डटल रहब जा। ई संदेश सुन के राष्ट्रपति ट्रूमेन बहुत प्रभावित भइले। पश्चिम जर्मनी में खाये-पीये के समान के 36 दिन के ही स्टौक बांच गइल रहे। कोइला के स्टौक भी 45 दिन ही रहे। तब जा के राष्ट्रपति ट्रूमेन इंग्लैंड के परधानमंतरी से बात कइले। पश्चिम जर्मनी जाए खातिर खाली हवाई मार्ग ही खुला रहे। लेकिन एकरो में खतरा रहे। सोवियत प्रभाव वला पूर्वी जर्मनी के ऊपर से ही हवाई जाहज के जाये के रहे। लेकिन अमेरिका अउर इंगलैंड जोखिम उठावे खातिर तइयार हो गइले। तब एयरलिफ्ट के जोजना बनावल गइल।

ऐतिहासिक एयरलिफ्ट ऑपरेशन

24 जून 1948 से एयर लिफ्ट ऑपरेशन शुरू भइल । अमेरिका के 17 अउर इंगलैंड के आठ हवाई जहाज एकरा में शामिल भइले। रोज 646 टन आटा, 109 टन मीट- मछरी, 180 टन आलू, 180 टन चीनी, 11 टन कौफी, 19 टन दूध के पौडर पश्चिम बर्लिन पहुंचावल जाये लागल। रोज करीब चार हजार टन कोइला, पेट्रोल अउर डीडल के भी जरूरत रहे। कोयला से खाना के अलावा बिजली भी बनत रहे। कोइला, पेट्रोल भी हवाई जहाज से ढोयाले लागल। सारा समान पैरासूट से पश्चिम बर्लिन में गिरे लागल। एने से समान जहाज में लदा के पश्चिम बर्लिन जाए। ओने से अगर कनवो अमेरिकी सैनिक भा कवनो नागरिक बाहर निकलल चाहस तs उनको ले आवल जाए। जहाज तs खालिये लौटत रहे।

15 महीना शांति से चलल बर्लिन एयरलिफ्ट

सोवियत संघ ई देख के पहिले तs तिलमिलाईल लेकिन मित्र देश के ताकत देख के चुप लगा गइल। अमेरिका ई अभियान शांति से चलावल चाहत रहे लेकिन ऊ बैकअप प्लान भी तइयार रखले रहे। राष्ट्रपति ट्रूमेन एयरलिफ्ट के सुरक्षित बनावे खातिर लंदन के एयरफोर्स स्टेशन पs बी-29 लड़ाकू बिमान भेज देले रहन। ई लड़ाकू बिमान एटम बम गिरावे के क्षमता से लैस रहे। सोबियत संघ के स्टालिन भी तीसरा विश्वयुद्ध ना चाहत रहन। ई एयरलिफ्ट बेरोकटोक चलत रहल। सोबियत संघ के चाल नाकाम हो गइल। अंत में थक हार के सोबियत संघ सितम्बर 1949 में पश्चिम बर्लिन से आपन घेरा हटा लेलस। ई एयरलिफ्ट 15 महीना चलल जवना में 23 लाख 25 हजार 510 टन समान गिरावल गइल। 25 हवाई जहाज करीब ढाई लाख फेरा लगवले। ना बम फूटल ना गोली चलल अउर पूरा होइल बर्लिन एयरलिफ्ट। अंत में पंकज प्रवीर कहले, अगर ट्रूमेन जइसन बाइडन भी बैकअप प्लान में अगल-बगल परमाणु क्षमता वला लड़ाकू बिमान तइयार रखिते तs आइएस खोरासन के काबुल में धमाका करे के हिम्मत ना होइत। एकरा बाद मंडली में केहू कुछ ना बोलल।

Tags: Bhojpuri News, Bihar News in hindi, News in Bhojpuri

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