खबर का असर: रिजेक्टेड कैंडिडेट्स को 'दारोगा' बनाने वाले बीएसएससी ने रद्द किया रिजल्ट

दारोगा के अभ्यर्थी

दस्तावेज में माला (रॉल नंबर-C02478) और रश्मि (रॉल नंबर-B00019) को पास कर दिया गया था जबकि इन दोनों की उम्मीदवारी पहले रद्द कर दी गई थी. दारोगा अभ्यर्थी विभा का कहना था कि दारोगा भर्ती में लाखों की लेन देन और पैरवी हुई है.

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बिहार में एकबार फिर से ईटीवी/न्यूज 18 की खबर का असर हुआ है. दारोगा परीक्षा में हुए अनियमितता की खबर को दस्तावेजों के साथ प्रमुखता से दिखाये जाने के बाद से कर्मचारी चयन आयोग ने नोटिस जारी करते हुए उन चारों पास अभ्यर्थियों का रिजल्ट कैंसिल कर दिया है.

ईटीवी/ न्यूज18 को एक दस्तावेज हाथ लगा था जिसके मुताबिक जिस कैंडिडेट को दारोगा परीक्षा में शामिल होने से रिजेक्ट कर दिया गया था, उन्हें फाइनल रिजल्ट में पास कर दिया गया.

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में केस के बाद एक से अधिक जगहों से फॉर्म भरने वाले अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द कर दी गई थी. दरअसल, 1 सितंबर 2017 को दारोगा परीक्षा का अंतिम रिजल्ट जारी हुआ था जिसमें 97 अभ्यर्थियों को अंतिम रूप से दारोगा के लिए चयन किया गया है. इस रिजल्ट में दो रॉल नंबर ऐसे हैं जिसकी उम्मीदवारी पहले ही रद्द कर दी गई थी.

दस्तावेज में माला (रॉल नंबर-C02478) और रश्मि (रॉल नंबर-B00019) को पास कर दिया गया था जबकि इन दोनों की उम्मीदवारी पहले रद्द कर दी गई थी. दारोगा अभ्यर्थी विभा का कहना था कि दारोगा भर्ती में लाखों की लेन देन और पैरवी हुई है. आखिर कैसे वैसे उम्मीदवारों को पास कर दिया गया जिन्हें रिजेक्ट कर दिया था. दूसरे अभ्यर्थी मुकेश का कहना था कि BSCC हर बार किसी न किसी घोटाले में फंस जाता है. कोई भी परीक्षा सफलतापूर्वक करानेे में आयोग असफल रहा है.

इस पूरे मामले में जब हमने बिहार कर्मचारी आयोग से पक्ष जानना चाहा था तो आयोग के सचिव योगेंद्र पासवान ने अपना बचाव किया. उन्होंने कहा कि हमें ये पता ही नहीं की कौन रिजेक्ट है और कौन नहीं.

इसके अलावा बीएसएससी का एक और कारनामा सामने आया था. 14 जुलाई 2017 को जारी किये गए विज्ञापन में आयोग साफ तौर पर लिखता है कि यह सीमित प्रतियोगिता परीक्षा विज्ञापन संख्या 704 में भाग ले चुके अभ्यर्थियों के लिए ही सीमित है.

दस्तावेजो में साफ पता चलता था कि दारोगा अभ्यर्थी रविंद्र कुमार (रॉल नंबर-s00133) विज्ञापन सं 704 के द्वारा आयोजित परीक्षा में शामिल ही नहीं हुआ था. परीक्षा के रिजल्ट में हर पेपर में एब्सेंट था.

इस खबर पर राज्य पुलिस मुख्यालय ने संज्ञान लिया था. मुख्यालय एडीजी ए के सिंघल ने आयोग को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच करने की बात कही थी.
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