Lockdown: 72 घंटे लगातार पैदल चलकर कोटा से बिहार पहुंचा 150 मजदूरों का जत्‍था, पढ़िए दर्द की यह दास्‍तां
Gopalganj News in Hindi

Lockdown: 72 घंटे लगातार पैदल चलकर कोटा से बिहार पहुंचा 150 मजदूरों का जत्‍था, पढ़िए दर्द की यह दास्‍तां
राजस्‍थान के कोटा से बिहार के गोपालगंज पहुंचे 150 मजदूर.

लॉकडाउन (Lockdown) लागू होने के बाद राजस्‍थान (Rajasthan) के कोटा में भूख के परेशान 150 मजदूरों ने पैदल ही अपने घर का रुख कर लिया. पढ़िए दर्द की यह दास्‍तां.

  • Share this:
गोपालगंज : राजस्थान (Rajasthan) के कोटा से पैदल चले करीब डेढ़ सौ मजदूरों का जत्था गोपालगंज (Gopalganj) पहुंचा है. यहां बिहार की सीमा से सटे कुचायकोट के जलालपुर चेकपोस्ट पर मजदूरों ने रजिस्ट्रेशन कराने से पहले अपनी पैदल सफर की दास्‍तां साझा की. इसी जत्‍थे में शामिल महेश्वर शर्मा बताते हैं कि वह बिहार के मधेपुरा के रहने वाले हैं. वह राजस्‍थान के कोटा में स्थिति फॉस्‍ट फूड सेंटर रेस्‍ट्रां में काम करते थे. देश में लॉकडाउन (Lockdown) लागू होने के साथ कोटा के सभी होटल और स्‍ट्रीट फास्ट फूड की दुकानें बंद हो गईं.

दुकानों के बंद होने के साथ ही महेश्वर शर्मा जैसे लोगों की मुश्किलें बढ़ने लगी. पहले जो थोड़ी बहुत जमा पूंजी थी, उसकी मदद से कुछ दिन जीवन लग गया. इसके बाद हालातों ने दो वक्‍त की रोटी के लिए भी मोहताज कर दिया था. अब ऐसी कोई वजह नहीं बची थी कि वहां रुका जाए. घर जाने की जब जब सोची, तो साधन के आभाव ने पैर रोक दिए. इस बीच, पेट में भूख की आग इस कदर बढ़ गई कि कदम अपने आप अपने घर की तरफ निकल पड़े. कोटा से निकलने के बाद महेश्‍वर शर्मा ने गोपालगंज तक की करीब हजार किमी की दूरी लगातार पैदल चलकर तीन दिन में पूरी की.

भूख की तड़प से परेशान होकर निकल पड़े घर की ओर
कोटा में महेश्‍वर शर्मा की तरह सैकड़ों ऐसे मजदूर थे, जो पास अपना कुछ नहीं बचा था. भूख की तड़प इनको भी महेश्‍वर के साथ खींच कर अपने घर को ले आई थी. महेश्‍वर के ही साथी रामनरेश बताते हैं कि वह भी कोटा में रहकर फास्‍ट फूड की दुकान चलाते थे. लॉकडाउन की वजह से उसके सामने पैसों की ऐसी तंगी हुई कि उनके पास भी खाने की समस्या हो गई, जिसके बाद रामनरेश सहनी और महेश्वर शर्मा अपने डेढ़ सौ साथियों के साथ पैदल ही कोटा से मधेपुरा के लिए चल पड़े थे. तीन दिन पहले कोटा से निकले इन लोगों के पास न ही रुपए थे और न ही खाने का ज्‍यादा सामान. खाने के नाम पर जो था वह भूंजा और चूड़ा था.
72 घंटे लगातार पैदल चल पूरा किया 1028 किमी का सफर


रास्‍ते में भूख जब ज्‍यादा तंग करने लगती तो दो फांके चूड़ा खाकर पानी पी लेते और थोड़ा आराम कर फिर आगे बढ़ जाते. रास्‍ते में कभी किसी ट्रक वाले को तरस आ जाता तो कुछ दूर के लिए लिफ्ट भी मिल जाती थी, नहीं तो पैदल सफर जारी ही था. किसी तरह 72 घंटे लगातार पैदल सफर कर 150 मजदूरों का यह जत्‍था बिहार के गोपालगंज पहुंच ही गया. गोपालगंज पहुंचने के बाद, इन सभी लोगों का रजिस्ट्रेशन कराया गया है. सभी की स्क्रीनिंग कराई जा रही है. इसके बाद ये बिहार सरकार द्वारा आवंटित बसों से उनके गृह जिले में भेजे जाएंगे.

बॉर्डर पर हो रहा है मजदूरों का स्‍वास्‍थ्‍य परीक्षण
बता दें कि बिहार के बाहर दूसरे राज्यों से लगातार मजदूरों और अन्य लोगों का बिहार में आने का सिलसिला जारी है. यहां जिला प्रशासन के द्वारा अब तक 16 हजार से ज्यादा लोगों का रजिस्ट्रेशन कराने के बाद सभी का मेडिकल चेकअप किया जा रहा है. स्क्रीनिंग कराने के बाद उनके गृह जिले में बसों से भेजा जा रहा है. जबकि गैरसरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 25 हजार से ज्यादा लोग बिना मेडिकल जांच और रजिस्ट्रेशन के ही बिहार की सीमा में प्रवेश किये हैं. जिनका कोई सरकारी आंकड़ा नहीं है. हालांकि जिला प्रशासन के द्वारा लगातार लोगों से अपना खुद का मेडिकल चेकअप कराने और उनके पड़ोसियों को जिला प्रशासन को सूचित करने की अपील की जा रही है

 

 

ये भी पढ़ें

जेल में बंद लालू को सुशील कुमार मोदी ने दी 'गंगाजल' और 'अपहरण' देखने की सलाह
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज