AIMIM की एंट्री से रोचक हो गया है ठाकुरगंज विधानसभा सीट का मुकाबला, अभी नौशाद आलम JDU से हैं MLA

वर्तमान में अभी नौशाद आलम जदयू से विधायक हैं. वो 2010 के आम चुनाव से अब तक इस सीट से विधायक हैं.
वर्तमान में अभी नौशाद आलम जदयू से विधायक हैं. वो 2010 के आम चुनाव से अब तक इस सीट से विधायक हैं.

साल वर्ष 1995 में भाजपा के सिकंदर सिंह ने कांग्रेस को मात दी थी. फिर साल 2005 फरवरी के चुनाव में कांग्रेस के डॉ. जावेद आजाद (Dr. Javed Azad) समाजवादी पार्टी (सपा) से खड़े ताराचंद धानुका को हराकर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 24, 2020, 11:27 AM IST
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(रिपोर्ट- आशीष सिन्हा)

किशनगंज. बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly elections 2020) के लिए भले ही तारीखों का एलान अभी नहीं हुआ हो लेकिन पूरे प्रदेश में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. बीजेपी, जदयू और राजद सहित सभी दल चुनावी मैदान में उतर चुके हैं. कोई जनता तक पहुंच बनाने के लिए वर्चुअल रैली कर रहा है तो कोई सोशल मीडिया पर कम्पेन चलाकर हवा बनाने की कोशिश में जुटा हुआ है. वहीं, बात यदि किशनगंज जिले (Kishanganj District) की करें तो यहां के ठाकुरगंज विधानसभा (Thakurganj Assembly) क्षेत्र में राजनीति माहौल बना हुआ है. सभी दलों के नेता जोरदार तरीके से ताल ठोक रहे हैं. हालांकि, इस विधानसभा सीट पर वर्तामान में अभी नौशाद आलम जदयू से विधायक हैं. वो 2010 के आम चुनाव से अब तक इस सीट से विधायक हैं.

ठाकुरगंज विधानसभा बिहार की सीमा पर बसा हुआ है. इसकी सीमाएं नेपाल और पश्चिम बंगाल से लगती है. ऐसे में यहां बंगला के साथ-साथ नेपाली संस्कृति का भी थोड़ा बहुत प्रभाव है. यही वजह है कि सांस्कृतिक रूप से बिहार के इस जिले की अलग पहचान है. परिसीमन के बाद ठाकुरगंज विधानसभा में पोठिया प्रखंड को हटाकर दिघलबैंक प्रखंड की 14 पंचायतों को शामिल किया गया. ठाकुरगंज की 22 पंचायत व दिघलबैंक प्रखंड की 14 पंचायत मिलाकर कुल 36 पंचायत ठाकुरगंज विधानसभा में हैं.  बता दें कि दिघलबैंक प्रखण्ड पहले 52 बहादुरगंज विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा था.



जदयू प्रत्याशी रहे नौशाद आलम ने चुनाव जीता
साल वर्ष 1995 में भाजपा के सिकंदर सिंह ने कांग्रेस को मात दी थी. फिर साल 2005 फरवरी के चुनाव में कांग्रेस के डॉ. जावेद आजाद समाजवादी पार्टी (सपा) से खड़े ताराचंद धानुका को हराकर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे. इस चुनाव में अंतर केवल 179 मतों का रहा था, तो वहीं, वर्ष 2005 नवंबर के चुनाव में समाजवादी पार्टी से ही खड़े गोपाल अग्रवाल ने कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. जावेद आजाद  को पराजित किया था. वर्ष 2010 के चुनाव में लोजपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे नौशाद आलम ने जीत दर्ज की जो बाद में जदयू में शामिल हो गए थे. इसी तरह वर्ष 2015 के आम चुनाव में जदयू प्रत्याशी रहे नौशाद आलम ने चुनाव जीता. इस चुनाव में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिनिधि गोपाल अग्रवाल को पराजित किया था.

मुस्लिमों की जनसंख्या अच्छी है
बता दें कि इस विधानसभा सीट पर मुस्लिमों की जनसंख्या अच्छी है. ऐसे में कहा जा रहा है कि इस सीट पर एनडीए की तरफ से जदयू के ही उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर सकते हैं. वहीं, इस बार असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM की इंट्री रोचक हो सकती है. AIMIM ने यहां मजबूत आधार बना लिया है, तथा पार्टी ने यहां पिछले कई सालों से मेहनत की है. एनडीए गठबंधन की बात करें तो इस बार जदयू के सामने सीट बचाने की चुनौती होगी.
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