नेपाल से निकलने वाली बकरा नदी अररिया आकर बन जाती है 'डायन', जानिए वजह...
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नेपाल से निकलने वाली बकरा नदी अररिया आकर बन जाती है 'डायन', जानिए वजह...
नेपाल से निकलने वाली बकरा नदी इस मौसम हर साल अररिया में बाढ़ और तबाही लाती है

किसानों की सैकड़ों एकड़ की खेती की जमीन और कच्चे मकानों को बकरा नदी (Bakra River) हर साल अपने में समा लेती है. बड़ी संख्या में लोग बेघर हो जाते हैं. जमींदार और किसान नदी के पेट में खेती की अपनी जमीन को गंवा कर दूसरे की खेतों में काम करने को मजबूर हैं

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अररिया. नेपाल से निकलने वाली बकरा नदी बिहार (Bihar) के अररिया जिले (Araria District) के ग्रामीणों के लिए अभिशाप बन गई है. तेज कटान और सर्पीली चाल की वजह से बकरा नदी (Bakra River) को डायन कहा जाता है. नेपाल (Nepal) के सीमावर्ती सिकटी प्रखंड के पड़रिया कौवाकोह पंचायत से होकर आने वाली बकरा नदी की वक्र चाल से वर्षों से जूझते आ रहे हैं. किसानों की सैकड़ों एकड़ की खेती की जमीन और कच्चे मकानों को यह नदी हर साल अपने में समा लेती है. बड़ी संख्या में लोग बेघर हो जाते हैं. जमींदार और किसान नदी के पेट में खेती की अपनी जमीन को गंवा कर दूसरे की खेतों में काम करने को मजबूर हैं.

इलाके के कई ग्रामीणों ने बताया कि पांच वर्ष पूर्व यह नदी पुल के नीचे से होकर बहती थी. लेकिन अब नदी ने एक किलोमीटर तक अपनी धारा बदल ली और गांव से बिल्कुल सटकर बह रही है. इस वजह से किसानों की सैंकड़ों एकड़ खेती की जमीन और कच्चे मकान नदी के पेट में समा चुके हैं.

नदी में पैर रखने पर महसूस होता है मानो फ्रिज के पानी मे पैर रख दिया हो. दरअसल नदी की इस शीतलता के पीछे इसका रौद्र रूप छिपा होता है जिसकी वजह से इलाके के लोग हर वर्ष बर्बाद होते रहे हैं. जिला आपदा पदाधिकारी शंभू कुमार ने बताया कि नदी के कटान को रोकने के लिए काम जारी है. लेकिन ग्रामीण इसे ऊंट के मुंह मे जीरा बताते हुए कहते हैं कि जब तक नदी को पुल के नीचे से नहीं बहाया जाता तब तक यह समस्या बनी रहेगी.
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