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माता-पिता को ठेले में बैठाकर बनारस से अररिया पहुंचा ये श्रवण कुमार, 9 दिनों में तय किया 550 KM का सफर
Araria News in Hindi

SATISH KUMAR | News18 Bihar
Updated: May 20, 2020, 10:43 PM IST
माता-पिता को ठेले में बैठाकर बनारस से अररिया पहुंचा ये श्रवण कुमार, 9 दिनों में तय किया 550 KM का सफर
कोरोनाबंदी में अररिया के श्रवण कुमार की बहादुरी की चर्चा न सिर्फ बिहार के अररिया में बल्कि फेसबुक और ट्विटर के जरिए पूरे देश में हो रही है.

11 साल का तबारक ने करीब 550 किलोमीटर की दूरी 9 दिनों में तय किया. वह अपने माता-पिता को ठेले में पीछे बैठाकर बनारस से बिहार के अररिया पहुंच गया.

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अररिया. कोरोना संकट (Corona Crisis) के दौर में मजदूरों के पैदल ही सैकड़ों-हजारों किलोमीटर का सफर करने की तमाम तस्वीरें आ रही हैं. इसी कड़ी में, 11 साल का तबारक ने करीब 550 किलोमीटर की दूरी 9 दिनों में तय किया. वह अपने माता-पिता को ठेले में पीछे बैठाकर बनारस से बिहार के अररिया पहुंच गया.

मार्बल की दुकान पर मजदूरी करते घायल हो गए थे 'श्रवण कुमार' के पिता
कोरोनाबंदी में अररिया के श्रवण कुमार की बहादुरी की चर्चा न सिर्फ बिहार के अररिया में बल्कि फेसबुक और ट्विटर के जरिए पूरे देश में हो रही है. दरअसल में जोकीहाट के उदाहाट गांव का रहने वाले तबारक के पिता जब बनारस में मार्बल की दुकान पर मजदूरी करने के दौरान घायल हो गए, तब 11 साल का यह बहादुर अपनी मां को लेकर बनारस अपने पिता के पास पहुंच गया. उसी दौरान लॉकडाउन लग गया. मजदूरी में कमाए गए रुपए जब खर्च हो गए तब घर लौटने की मजबूरी हो गई लेकिन महानगरों से घर वापसी की इस आपाधापी में घायल पिता और अपनी मां को लेकर तबारक ठेले पर ही अपने घर के लिए निकल पड़ा.

रास्ते में जिसने भी इस बहादुर बच्चे को देखा, उसने वीडियो बना सोशल मीडिया पर डाल दिया. जिसके बाद तबारक फेसबुक और ट्विटर पर छा गया. न्यूज18 ने इस बीच तबारक और उसके परिवार को भी खोज निकाला. बनारस से अररिया 9 दिनों तक ठेला चलाकर तबारक अपने घर पहुंचा है.



तबारक ने न्यूज18 को बताया कि घर लौटना मजबूरी था, इसलिए हिम्मत जुटाकर चलते रहे. वहीं तबारक के पिता मो. इस्राइल ने बताया कि मार्बल उठाने के दौरान मेरे पैर में जख्म हो गया था, इसलिए


ठेला चलाने में असमर्थ था. बीच रास्ते में भी बहुत लोगों ने भोजन और पानी से मदद की और हमलोग यहां आ गए.

बहादुर बेटे के जज्बे को कर रहे सलाम
स्थानीय ग्रामीण मो. शाहबाज आलम ने बताया कि मेरे ही जमीन पर यह परिवार वर्षों से रह रहा है जो काफी गुरवत में जीने को मजबूर है. तबारक अपने घर में सबसे छोटा है. तबारक की इस तरह घर
वापसी पर गांव के लोग न सिर्फ फक्र कर रहे हैं बल्कि हर किसी के जुबां पर इस कलयुगी श्रवण कुमार की चर्चा है.

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First published: May 20, 2020, 10:28 PM IST
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