अररिया लोकसभा सीट: उपचुनाव की कामयाबी दोहराने को बेताब महागठबंधन

2018 में अररिया लोकसभा सीट पर सासंद तस्लीमुस्द्दीन की मौत की वजह से उपचुनाव हुए थे. उस उपचुनाव में तस्लीमुद्दीन के पुत्र सरफराज आलम ने आरजेडी के टिकट पर जीत हासिल की थी.

News18 Bihar
Updated: April 23, 2019, 5:36 PM IST
अररिया लोकसभा सीट: उपचुनाव की कामयाबी दोहराने को बेताब महागठबंधन
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Updated: April 23, 2019, 5:36 PM IST
2018 में अररिया लोकसभा सीट पर सासंद तस्लीमुस्द्दीन की मौत की वजह से उपचुनाव हुए थे. उस उपचुनाव में तस्लीमुद्दीन के पुत्र सरफराज आलम ने आरजेडी के टिकट पर जीत हासिल की थी. इस जीत की चर्चा केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी के खिलाफ 'संदेश' के रूप में खूब हुई थी. अररिया सीट पर एक बार फिर आरजेडी की तरफ से सरफराज आलम चुनाव मैदान में हैं.

सीमांचल के इलाके में मात्र यही एक सीट है जहां एनडीए गठबंधन ने अपना प्रत्याशी खड़ा किया है. बीजेपी की तरफ से पूर्व सांसद प्रदीप कुमार सिंह हैं. उपचुनाव के दौरान भी इन्हीं दोनों प्रत्याशियों के बीच मुकाबला हुआ था. एक तरह से यह सीट महागठबंधन और एनडीए दोनों के लिए ही प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है क्योंकि बीजेपी पहले कई बार इस जीत पर विजय पताका भी फहरा चुकी है.

क्या है चुनावी इतिहास

1967 में इस सीट पर पहली बार चुनाव हुआ तो कांग्रेस के तुलमोहन राम ने जीत दर्ज की थी. उसके बाद कांग्रेस 1971 का चुनाव तो जीती लेकिन 1977 में पार्टी को यहां भारतीय लोक दल के प्रत्याशी महेंद्र नारायण सरदार से हार का सामना करना पड़ा. फिर 80 और 84 के चुनाव कांग्रेस जीती तो जनता दल के सुखदेव पासवान ने 89, 91 और 96 के चुनाव में लगातार जीत दर्ज की. 1998 में पहली बार यहां से बीजेपी के टिकट पर रामजी दास ऋषिदेव जीते थे. बाद 1999 के चुनाव में सुखदेव पासवान ने आरजेडी के टिकट पर यह सीट जीती. 2004 के चुनाव में जब बीजेपी का देशभर में इंडिया शाइनिंग का नारा फेल हुआ तो सुखदेव पासवान ने पार्टी के टिकट पर अररिया में जीत कायम की थी. 2009 में बीजेपी के प्रदीप सिंह यहां से जीते जो इस बार भी चुनाव मैदान में है. 2014 में इस सीट पर आरजेडी के दिग्गज तस्लीमुद्दीन जीते थे जिनकी मौत के बाद 2018 में उपचुनाव हुए थे.

तस्लीमुद्दीन


क्या हैं समीकरण

सवर्ण: 2.25 लाख
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मुस्लिम: 7.75 लाख

पिछड़ा, अति-पिछड़ा-संथाली: 5.25 लाख

यादव: करीब तीन लाख

अब सीट का गणित कुछ ऐसा है कि आरजेडी माय समीकरण को देखते हुए अपनी जीत की कोशिश करती है तो वहीं बीजेपी सवर्णों पिछड़ा और अतिपिछड़ा वोटरों के जरिए अपनी जीत हासिल करनी कोशिश में लगी है.

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First published: April 23, 2019, 5:06 PM IST
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