बिना शव के निकली अर्थी, सांकेतिक रूप में हुआ अंतिम संस्कार, पढ़ें पूरा मामला...

परिजनों ने मृतक अशोक पासवान का शव नहीं मिलने के बावजूद हिन्दू रीति-रिवाज के मुताबिक अंतिम संस्कार का निर्णय किया. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मृत शरीर के बदले 'कुश' और मिट्टी के बर्तन को ही अर्थी पर रखा गया.

News18 Bihar
Updated: August 2, 2019, 12:44 PM IST
बिना शव के निकली अर्थी, सांकेतिक रूप में हुआ अंतिम संस्कार, पढ़ें पूरा मामला...
मृतक अशोक पासवान के शव की सांकेतिक अर्थी बनाई गई और उसे कंधा दिया गया.
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Updated: August 2, 2019, 12:44 PM IST
दो दिन पहले बुधवार को खबर आई कि एक लापता पुलिसकर्मी के शव की शिनाख्त किए बिना ही पटना पुलिस ने लावारिस समझकर उसका दाह संस्कार कर दिया. मृतक पुलिसकर्मी पुलिस लाइन में तैनात 45 वर्षीय अशोक पासवान था. उसका परिवार उसे तलाश कर रहा था. जाहिर है पटना पुलिस के इस कारनामे के कारण एक पत्नी को उसके मृत पति के अंतिम दर्शन भी नसीब नहीं हो सके. ऐसे में मृतक जवान का शव नहीं होने के कारण हिंदू मान्यताओं के अनुसार परिजनों ने सांकेतिक रूप में बिना शव के ही अर्थी निकाली और प्रतीकात्मक रूप से अंतिम संस्कार किया.

प्रतीकात्मक तौर पर अंतिम संस्कार
दरअसल परिजनों ने मृतक अशोक पासवान का शव नहीं मिलने के बावजूद हिन्दू रीति-रिवाज के मुताबिक अंतिम संस्कार का निर्णय किया. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मृत शरीर के बदले 'कुश' और मिट्टी के बर्तन को ही अर्थी पर रखा गया. परिजनों ने आंसू बहाए और मृतक सिपाही की पत्नी के हाथों की चूड़ियां तोड़ी गईं और मांग से सिंदूर मिटाने की रस्म अदा की गई. इसके बाद विधिवत अंतिम संस्कार भी किया गया.

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मृतक अशोक पासवान की पत्नी के हाथ से चूड़ियां निकाली गईं.


लावारिस समझ जला दिया था शव
गौरतलब है कि अररिया के सिमराहा थाना क्षेत्र के मदारगंज के रहने वाले कांस्टेबल अशोक पासवान की ड्यूटी पटना के राजभवन में लगी थी. जानकारी के मुताबिक सिपाही अशोक पासवान 16 जुलाई को अपने घर से राजभवन जाने के लिए निकले थे. उनकी ड्यूटी वहीं पर थी. लेकिन ड्यूटी का समय खत्म होने के बाद भी वह घर लौटकर नहीं आए.

पटना के बुद्धा कॉलोनी थाने में दर्ज था मामला
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अशोक की पत्नी और बच्चे घर पर उनका इंतजार करते रहे. फिर उनकी खोजबीन की. इसके बाद 22 जुलाई को अशोक के परिजनों ने पुलिस लाइन जाकर अधिकारियों को उनके गुम हो जाने की सूचना दी. साथ ही बुद्धा कॉलोनी थाने में गुमशुदगी की एफआईआर भी दर्ज कराई.

20 जुलाई को जला दिया गया शव
इसी दौरान 17 जुलाई को पुलिस ने गांधी मैदान के पास से एक अज्ञात शख्स की लाश बरामद की. शिनाख्त करने के मकसद से मृतक की एक तस्वीर पटना पुलिस के वॉट्सएप ग्रुप में डाल दी गई. लेकिन ग्रुप में शामिल कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अशोक पासवान को नहीं पहचान पाया. इसके बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद लाश मॉर्चरी में रख दी. 72 घंटे बीत जाने के बाद 20 जुलाई को उस लाश को लावारिस समझकर उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया.

araria constable

बेटे ने की तस्वीर से पहचान
इस बीच अशोक पासवान की पत्नी और बच्चे लगातार थाने के चक्कर लगा रहे थे. तभी बुद्धा कॉलोनी थाने के SHO रविशंकर सिंह ने 30 जुलाई की रात पटना पुलिस का वॉट्सएप ग्रुप खंगाला. उसमें शेयर की गई तस्वीरों को देखा. इसी दौरान उनकी नजर गांधी मैदान थाना पुलिस द्वारा शिनाख्त के लिए शेयर की गई फोटो पर पड़ी. SHO रविशंकर को कुछ शक हुआ. उन्होंने अशोक पासवान के बेटे को थाने बुलाकर वो तस्वीर दिखाई. जिसे देखकर अशोक का बेटा सदमे में आ गया. वो तस्वीर उसके पिता की ही थी.

सीबीआई की जांच चाहते हैं परिजन
पटना की पुलिस के अनुसार अशोक की लाश सादी ड्रेस में थी और कोई आईडी भी नहीं था. उनके पास मोबाइल भी मौजूद नहीं था. इसी वजह से शिनाख्त नहीं हो सकी. वहीं, मृत अशोक पासवान के बड़े भाई ने न्यूज़ 18 से कहा कि उन्हें अब पुलिस पर भरोसा नहीं रहा, इसलिए मामले की सीबीआई जांच की जाए ताकि पता चल सके हत्या क्यों और किसने की?

(रिपोर्ट- सतीश कुमार)

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First published: August 2, 2019, 11:22 AM IST
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