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मां काली की पूजा का अनोखा विधान, कैदियों की बनाई फूलों की माला से शुरू होता है अनुष्ठान

SATISH KUMAR | News18 Bihar
Updated: October 26, 2019, 10:17 PM IST
मां काली की पूजा का अनोखा विधान, कैदियों की बनाई फूलों की माला से शुरू होता है अनुष्ठान
अररिया के मां खड्गेश्वरी मंदिर में कैदियों की बनाई फूलों की माला से होती है देवी काली की पूजा.

बिहार के अररिया (Arariya) जिले में स्थित मां खड्गेश्वरी मंदिर (Khadgeshwari Temple) में जेल के कैदियों की बनाई फूलों की माला से शुरू होती है मां काली की पूजा. दिवाली के त्योहार के दिन ही बिहार और बंगाल में काली पूजन (Kali puja in Bengal & Bihar) की रही है परंपरा.

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अररिया. दिवाली (Diwali 2019) के त्योहार के साथ ही बिहार और बंगाल में देवी काली की पूजा (Kali puja in Bengal & Bihar) का भी विधान है. बिहार के कई जिलों में दिवाली के साथ ही काली पूजा (Kali Puja) का भी आयोजन किया जाता है. कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को होने वाली यह पूजा पारंपरिक रूप से की जाती है. बिहार के अररिया (Arariya) जिले में भी पूरे विधि-विधान के साथ काली पूजा का आयोजन किया जाता है. यहां के मां खड्गेश्वरी मंदिर (Khadgeshwari Temple) में होने वाली काली पूजा का तो इस पूरे इलाके में विशिष्ट महत्व है. इस मंदिर में पिछले कई दशकों से एक अनोखी परंपरा चली आ रही है. यहां पर अररिया जेल में बंद कैदियों द्वारा बनाई गई फूलों की माला (Prisoner makes Garlands of Flowers) से ही मां काली की पूजा होती है. इस साल भी मां खड्गेश्वरी के मंदिर में इस विशिष्ट परंपरा के साथ काली पूजन होगा.

152 फीट ऊंचा है यह मंदिर
अररिया में स्थित मां खड्गेश्वरी मंदिर पूर्वी बिहार के कुछ मशहूर मंदिरों में से एक है. यहां के स्थानीय लोगों ने बताया कि इस ऐतिहासिक मंदिर में वर्ष 1884 से ही मां काली की पूजा हो रही है. हालांकि अभी जिस स्वरूप में मंदिर दिखता है, उसका निर्माण बाद में हुआ. मंदिर के पुजारी और संस्थापक नानू बाबा ने 1970 में यहां पर 152 फीट ऊंचा मंदिर बनवाया. नानू बाबा ने बताया कि अररिया जेल के कैदी वर्षों से मां काली के लिए फूलों की माला गूंथते रहे हैं. परंपरा है कि कैदियों की बनाई माला से ही माता की पूजा शुरू की जाती रही है. मंदिर में सही समय पर यह फूलों की माला पहुंच जाए, इसके लिए एक सिपाही की भी ड्यूटी लगाई गई है. अभी इस ड्यूटी पर सिपाही अंजनी कुमार तैनात हैं.

Prisoners make garlands of flowers for Kali Puja in Arariya-Bihar
मां खड्गेश्वरी मंदिर में अररिया और आसपास के जिलों के अलावा पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं.


कैसे शुरू हुई कैदियों की माला से पूजा की परंपरा
मां खड्गेश्वरी मंदिर में कैदियों की बनाई फूलों की माला से देवी काली की पूजा शुरू होने की परंपरा की कहानी भी बड़ी रोचक है. मंदिर के पुजारी नानू बाबा ने बताया कि एक बार अररिया जेल में तैनात वरिष्ठ अधिकारी को मां काली का सपना आया. इसके बाद से ही मंदिर में कैदियों की बनाई माला से पूजा शुरू करने की परंपरा आरंभ हुई. उन्होंने बताया कि पिछले 40 साल से इस मंदिर में यह परंपरा निभाई जा रही है.

जेल के कैदियों की आस्था का प्रतीक है मंदिर
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ऐसा नहीं है कि मां काली की पूजा के लिए फूलों की माला बनाना अररिया जेल के कैदियों की ड्यूटी है, बल्कि इन कैदियों की इस मंदिर और मां काली के प्रति आस्था इतनी गहरी है कि वे नियमित रूप से यह काम करते हैं. अररिया जेल के अधीक्षक सत्येंद्र कुमार ने बताया कि जेल में जितने भी कैदी हैं, वे सभी मां काली के भक्त के रूप में फूलों की माला बनाते हैं. आपको बता दें कि इस मंदिर में सिर्फ अररिया और आसपास के जिलों के ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ीसंख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

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First published: October 26, 2019, 10:17 PM IST
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